khabarhunt.in

खबर का शिकार

 UP BJP New President Selection: UP बीजेपी को नया अध्यक्ष कब मिलेगा? देरी की वजह क्या?

pm-modi-nadda-amit-shah-

जल्द होगा यूपी बीजेपी अध्यक्ष का चयन

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम जल्द सामने आ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, मार्च के पहले सप्ताह में नए अध्यक्ष का चयन हो जाएगा। जिलाध्यक्षों की सूची जारी होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के प्रभारी पीयूष गोयल लखनऊ पहुंचेंगे। उनके नेतृत्व में नामांकन प्रक्रिया पूरी होगी और अगले दिन नए अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी।

कैसा होगा बीजेपी का नया अध्यक्ष?

बीजेपी इस बार ऐसा अध्यक्ष चाहती है, जो संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखे और कार्यकर्ताओं में जोश भर सके। क्योंकि यही चेहरा 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेगा। जातीय समीकरण के अलावा नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक दक्षता भी अहम मापदंड होंगे।

पिछले अध्यक्षों का आकलन

बीजेपी ने 2017 में सत्ता में आने के बाद प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी केशव प्रसाद मौर्य को दी थी, लेकिन बाद में उन्हें उपमुख्यमंत्री बना दिया गया और महेंद्रनाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के बाद स्वतंत्र देव सिंह को यह जिम्मेदारी दी गई, जिनके कार्यकाल में पार्टी ने 2022 का विधानसभा चुनाव जीता। हालांकि, संगठन पर सरकार की पकड़ मजबूत हो गई और पार्टी का ग्राफ गिरता दिखा। भूपेंद्र चौधरी को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी संगठन और सरकार के बीच तालमेल की कमी देखने को मिली, जिससे लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन प्रभावित हुआ।

नए अध्यक्ष के लिए प्रमुख नाम

इस बार बीजेपी ऐसे नेता को अध्यक्ष बनाना चाहती है, जो संगठन को मजबूत कर सके और सरकार से स्वतंत्र होकर काम करे। चर्चाओं में स्वतंत्र देव सिंह और भूपेंद्र चौधरी के नाम हैं, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व सहमत नहीं दिख रहा। संभावित नामों में हरीश द्विवेदी और बीएल वर्मा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इनके अलावा विजय बहादुर पाठक, विद्या सागर सोनकर और अमरपाल मौर्या जैसे नामों पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, बीजेपी कोई अप्रत्याशित फैसला भी ले सकती है।

विधानसभा चुनाव 2027 की चुनौती

नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने 2027 का विधानसभा चुनाव सबसे बड़ी चुनौती होगी। समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ के चलते मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है। बीजेपी इस बार किसी ऐसे दलित या ओबीसी चेहरे को आगे ला सकती है, जो कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर सके और पार्टी को फिर से मजबूती दे सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *