देशभर में इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘The Emergency Diaries: Years That Forged a Leader’ नामक पुस्तक का ऐलान किया। यह पुस्तक संकलित की गई है BlueKraft Digital Foundation द्वारा, और इसे आज शाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च किया जाएगा।
क्यों है यह पुस्तक खास?
- प्रथम विभक्त अनुभव: यह पुस्तक पीएम मोदी के स्व-साक्षात्कारों, तत्कालीन साथियों की यादों, और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों पर आधारित है ।
- नेता बनने की रूपरेखा: यह बताती है कि कैसे एक युवा RSS प्रचरक के रूप में उन्होंने इमरजेंसी के समय जनता एवं लोकतंत्र के मूल्यों के लिए संघर्ष किया। पूर्व प्रधानमंत्री HD देवेगौड़ा ने इसका प्रस्तावना लिखा है।
PM मोदी का संदेश और आह्वान
मोदी ने X पोस्ट में लिखा:
“‘The Emergency Diaries’ मेरी यात्रा को उजागर करता है। यह कई यादें लौटाता है… मैं उन सभी को आवाहन करता हूँ जिन्होंने उन अंधकारमय वर्षों को देखा है, कि वे सोशल मीडिया पर अपनी कहानियाँ साझा करें।”
उन्होंने यह भी कहा:
“जब इमरजेंसी जब [24 जून 1975] लागू हुई, मैं एक युवा RSS प्रचरक था। उस दौर की सीख ने हमें लोकतांत्रिक ढांचे की अहमियत महसूस कराई… मुझे खुशी है कि इसके सहायक अनुभव इस पुस्तक में हैं।”
संवैधानिक आपदा: ‘संविधान हत्या दिवस’
मोदी ने देश को याद दिलाया कि 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाना चाहिए—क्योंकि उस दिन फूँक दी गई थी मौलिक अधिकारों और लोकतंत्र की आत्मा । इसके साथ उन्होंने 42वें संशोधन जैसे अधिनायकवादी कदमों पर चोट की, जो लोकतंत्र के खिलाफ थे।
लोकतंत्र के लिए स्वतंत्रता संघर्ष
पीएम मोदी ने उन सभी व्यक्तियों को सलाम किया, जिन्होंने इमरजेंसी के खिलाफ आवाज़ उठाई—चाहे वे सभी पृष्ठभूमि से हों, उनका एक लक्ष्य था: भारत में लोकतंत्र को सुरक्षित रखना ।
उन्होंने कहा कि इन संगठित प्रयासों ने नैतिक आधार पर सत्ता को चुनौती दी और 1977 में लोकतंत्र की वापसी सुनिश्चित की ।
भविष्य की प्रतिबद्धता और विकासशील भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय है संविधान के मूल्यों को सुदृढ़ करने का और विकसित भारत के सपनों को साकार करने का।
“हम उस भारत को बनाएँगे जिसमें गरीब, कमजोर और वंचित का उद्धार हो!”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विडंबना
- इमरजेंसी जून 1975–मार्च 1977 तक लगी, तीन वर्षों तक देशभर में लोकतांत्रिक ढांचे को कारावास में रखा गया ।
- प्रेस को मिर्गिस्तह किए, विधानसभा की आवाज़ को बंद किया गया, विरोधी नेताओं का अंतःकरण किया गया, और जनता का डर भरा माहौल बना ।
- 42वें संविधान संशोधन को तत्कालीन सरकार ने अधिनायकवाद का उपकरण बना डाला।
क्यों आज की किताब महत्वपूर्ण है?
- युवा पीएम मोदी की राजनीतिक संघर्ष की छवि सामने आती है।
- यह लोकतंत्र-विरोधी सहीं के खिलाफ एक दस्तावेज़ है।
- नई पीढ़ी को अधिनायक की सच्चाई से परिचित कराने का प्रयास है।
- यह स्वतंत्र व विवेकी विचारधारा की आवश्यकता का संदेश देता है।
निष्कर्ष:
- ‘The Emergency Diaries’ सिर्फ एक आत्मकथा नहीं है—यह धर्मयुद्ध और आत्मनिर्भरता की एक साक्षरता कहानी है।
- संविधान हत्या दिवस के रूप में 25 जून की याद बनी रहे—देश को पुनः ऐसे वर्षों की याद दिलती है जब लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रहा था।
- यह पुस्तक सार्वजनिक स्मृति को जिंदा रखती है और लोकतंत्र की कीमत समझाती है।
















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