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जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग केस: कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपियों पर आरोप तय — एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का पर्दाफाश

Terror funding case in Jammu and Kashmir: Court takes major action, charges framed against two accused - An international conspiracy exposed

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की जड़ें कमजोर करने के लिए सुरक्षाबलों और जांच एजेंसियों की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी कड़ी में एक बड़े आतंकी फंडिंग केस में अदालत ने दो आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि यह कोई साधारण मामला नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र था, जिसमें पाकिस्तान में बैठे आतंकी कमांडर, खाड़ी देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक और अन्य विदेशी नेटवर्क शामिल थे। इन नेटवर्क के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के लिए धन पहुंचाया जा रहा था।


केस की पृष्ठभूमि

यह मामला कई महीनों की गहन जांच का नतीजा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त ऑपरेशन के जरिए इस फंडिंग रैकेट को पकड़ने में सफलता पाई।

  • फंडिंग का स्रोत: पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन।
  • मध्यस्थ: खाड़ी देशों (विशेषकर दुबई, सऊदी अरब, कतर) में मौजूद पाकिस्तानी नागरिक।
  • माध्यम: हवाला नेटवर्क, जिसमें अवैध मनी ट्रांसफर चैनल का इस्तेमाल किया गया।
  • उद्देश्य: जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों के लिए हथियार, विस्फोटक और भर्ती अभियानों को वित्तीय सहयोग।

अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का खुलासा

जांच एजेंसियों ने जो तथ्य कोर्ट में पेश किए, वे चौंकाने वाले हैं।

  1. पाकिस्तान में बैठे कमांडर
    • लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कुछ टॉप कमांडर ने इस नेटवर्क को ऑपरेट किया।
    • सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड चैट ऐप और वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) कॉल्स के जरिए निर्देश दिए गए।
  2. खाड़ी देशों का रोल
    • खाड़ी में बसे कुछ पाकिस्तानी नागरिकों ने भारतीय तीर्थयात्रियों, प्रवासियों और व्यापारियों के साथ संपर्क साधकर हवाला चैनल सक्रिय रखा।
    • वैध व्यापार और धार्मिक यात्रा के बहाने धन हस्तांतरण को छिपाया गया।
  3. विदेशी नेटवर्क की भूमिका
    • कुछ नेपाली और बांग्लादेशी बिचौलियों का इस्तेमाल फंड को भारत में लाने के लिए किया गया।
    • मनी ट्रांसफर को ट्रैक करने से बचने के लिए “मल्टी-लेयर” सिस्टम अपनाया गया।

हवाला रूट: कैसे काम करता था नेटवर्क

यह पूरी फंडिंग हवाला सिस्टम के जरिए की जाती थी। हवाला एक गैर-औपचारिक वित्तीय लेन-देन प्रणाली है, जिसमें कोई बैंकिंग ट्रेल नहीं होता, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग में इसका खूब इस्तेमाल होता है।

  • पहला चरण: खाड़ी देशों में रहने वाले लोग नकद रकम हवाला ऑपरेटर को देते।
  • दूसरा चरण: ऑपरेटर पाकिस्तान में बैठे सहयोगियों को सूचना देता।
  • तीसरा चरण: पाकिस्तान से जुड़ा हवाला नेटवर्क, जम्मू-कश्मीर में अपने एजेंट के जरिए रकम पहुंचाता।
  • चौथा चरण: स्थानीय आतंकी मॉड्यूल उस रकम का इस्तेमाल हथियार खरीदने और आतंकियों को भुगतान करने में करता।

आरोपियों पर कोर्ट की कार्रवाई

कोर्ट ने दो मुख्य आरोपियों — (नाम सुरक्षा कारणों से उजागर नहीं) — के खिलाफ अपराध प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 228 के तहत आरोप तय किए हैं।

  • आरोप:
    1. आतंकी फंडिंग में संलिप्तता (UAPA की धारा 17, 18, 40 के तहत)
    2. मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA की धारा 3 और 4 के तहत)
    3. भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की साजिश (IPC धारा 120B, 121A)
  • अगली सुनवाई: 20 अगस्त 2025 को होगी, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

तीर्थयात्रियों और व्यापारियों की आड़

जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा और अन्य धार्मिक यात्राओं में आने वाले तीर्थयात्रियों को टारगेट कर मनी ट्रांसफर का बहाना बनाया।

  • तीर्थयात्रा में शामिल कुछ लोग संदिग्ध लेन-देन में पकड़े गए।
  • धार्मिक ट्रस्ट और एनजीओ के नाम पर भी पैसा भेजा गया।

इसी तरह, कश्मीर में आने वाले प्रवासी व्यापारी और मौसमी मजदूर हवाला नेटवर्क के माध्यम बन गए। कई मामलों में ये लोग अनजाने में इस नेटवर्क का हिस्सा बने, क्योंकि उन्हें फंड के असली स्रोत का पता नहीं था।


राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

टेरर फंडिंग केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह पूरे आतंकी इकोसिस्टम को मजबूत करती है।

  • भर्ती अभियान: युवा बेरोजगारों को आर्थिक मदद देकर उन्हें आतंकी संगठनों में शामिल करना।
  • प्रचार तंत्र: सोशल मीडिया और लोकल मीडिया में फर्जी खबरें फैलाने के लिए फंड देना।
  • स्थानीय समर्थन: आतंकियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देना ताकि उन्हें छुपने में मदद मिले।

सरकार और एजेंसियों की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस केस को क्रॉस-बॉर्डर टेरर फंडिंग का एक क्लासिक उदाहरण बताया है।

  • गृह मंत्रालय: “यह कार्रवाई हमारे जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का हिस्सा है। ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा।”
  • NIA अधिकारी: “हमने हवाला नेटवर्क के कई लिंक ट्रेस कर लिए हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होंगी।”
  • वित्तीय खुफिया इकाई (FIU): संदिग्ध ट्रांजैक्शन्स पर बैंकों को अलर्ट जारी किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत

क्योंकि यह केस कई देशों से जुड़ा है, भारत ने Interpol और खाड़ी देशों के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई है।

  • लक्ष्य:
    • हवाला ऑपरेटरों की पहचान करना।
    • खाड़ी देशों से फंडिंग चैनल को बंद कराना।
    • पाकिस्तान में बैठे मास्टरमाइंड पर दबाव बनाना।

अतीत के बड़े टेरर फंडिंग केस

इस केस से पहले भी कई हाई-प्रोफाइल फंडिंग नेटवर्क पकड़े गए:

  1. 2017 NIA केस: जिसमें अलगाववादी नेताओं पर पाकिस्तान से फंड लेने का आरोप लगा था।
  2. 2020 पुलवामा-फंडिंग कनेक्शन: हमले से पहले पाकिस्तान से भेजे गए 80 लाख रुपये की हवाला रकम का खुलासा।
  3. 2023 श्रीनगर हवाला केस: दिल्ली और श्रीनगर में एक साथ छापेमारी में 45 लाख रुपये नकद बरामद।

निष्कर्ष

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के लिए केवल हथियारबंद ऑपरेशन पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके वित्तीय स्रोत को काटना सबसे जरूरी है। इस ताजा केस ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और वे लगातार नए तरीके अपनाकर फंडिंग पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस केस में कोर्ट द्वारा आरोप तय किया जाना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, लेकिन असली जीत तब होगी जब पूरे नेटवर्क को नष्ट कर दिया जाए और भविष्य में ऐसे किसी भी चैनल को बनने से पहले रोक दिया जाए।


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