मंगलवार, 30 जून 2025 की सुबह कर्नाटक की राजनीति में एक खास तस्वीर ने सुर्खियां बटोर ली। मैसूरु एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, साथ ही अन्य कुछ मंत्री, प्रेस कैमरों के सामने हाथ मिलाकर एकता की मिसाल पेश करते दिखे।
एयरपोर्ट पर एकजुटता:
मेरी असिस्टेंट की तरह मैं प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बताना चाहूँगी: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया के प्रश्न पर शिवकुमार से पूछा —
“हम साथ नहीं हैं?”
शिवकुमार ने सिर हिला कर इसका जवाब सकारात्मक दिया।
इसके बाद दोनों नेता एक दूसरे का हाथ पकड़कर ऊपर उठाने से न केवल एकजुटता का प्रतीक तैयार हुआ, बल्कि यह बीजेपी के उन दावों को नकारने का इशारा था, जो कांग्रेस के अंदर वैचारिक या नेतृत्व संबंधी दरार की बात कर रहे थे।
KRS जलाशय पर Bagina अर्पण का पावन संकेत:
इसके ठीक बाद, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री KRS (कृष्णा राजा सागार) जलाशय पहुंचे, जहां उन्होंने Bagina — मौसम और जल-प्रति सुरक्षा की पूजा अर्चना — अर्पित की।
इस पवित्र स्थल की यात्रा से सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि उनकी सहकर्मी व कार्य-संतुलन स्थिरता का प्रतीक भी प्रतिबिंबित हुआ, विशेषकर जब ये तस्वीरें चर्चा में आई।
बीजेपी के आरोपों पर पलटवार:
राजनीतिक पटल पर यह प्रदर्शन निर्णायक साबित हुआ। विपक्षी पार्टी BJP ने पिछले दिनों लगातार यह दावा किया था कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच पार्टी या कार्यशैली को लेकर मतभेद हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा —
“कांग्रेस सरकार पांच साल पूरे करेगी और हम ‘बांदे’ (चट्टान) की तरह मजबूत हैं।”
यह पुकार न केवल शिवकुमार के मिज़ाज—जिन्हें ‘चट्टान’ कहकर संबोधित किया जाता है—की प्रशंसा थी, बल्कि अंदरुनी विवाद खत्म हो जाने का राजनीतिक संदेश भी था।
सीधी टिप्पणी BJP पर:
सिद्धारमैया ने BJP नेता श्रीरामुलु की भविष्यवाणी पर करारा प्रहार किया, जिनके अनुसार कांग्रेस सरकार गिरने वाली है और मध्यावधि के चुनाव हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी साख पर सवाल उठाते हुए कहा:
“वे चुनाव हार चुके हैं—लोकसभा और विधानसभा दोनों—इसलिए उनके दावे कितने सच होंगे?”
उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि “बीजेपी नेता झूठे हैं।”
Dasara के उद्घाटन की दी अटूट प्रतिबद्धता:
ऐतिहासिक रूप से कर्नाटक के सबसे बड़े त्योहार दसहरा पर मुख्यमंत्री का विशेष भूमिका होती है। इस बार भी विपक्ष से उठ रहे सवालों के बीच जब यह भविष्यवाणी की गई कि सिद्धारमैया को हटाया जा सकता है, तो उन्होंने कहा:
“मैं ही इस बार दशहरा का उद्घाटन करूँगा।”
इस वक्तव्य से यह साफ संदेश दिया गया कि सरकार और उसका नेतृत्व पूरी तरह से स्थिर है।
AICC महासचिव रंधीप सुरजेवाला का आगमन:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और AICC महासचिव रंधीप सुरजेवाला कर्नाटक की संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। सिद्धारमैया ने कहा कि सुरजेवाला की यात्रा एक कांग्रेस संगठनात्मक पुनर्निर्माण की तैयारी है। उनके आने से MLA लाइनों की भी समीक्षा होगी और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के रणनीतिक निर्णय लिए जाएंगे।
इन बातों से यह तस्वीर बनी — एयरपोर्ट पर एकजुटता की मिसाल, उसके बाद धार्मिक स्थल की यात्रा और संगठनात्मक सतर्कता — कि कांग्रेस में न केवल सरकार स्थिर है, बल्कि लोग, नेता और संगठन एक मिशन के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
देश के लिए क्या संदेश है?
- राजनीतिक स्थिरता का प्रतीक
इस एकजुटता ने यह संदेश दिया कि बहरहाल—चाहे नेता, संगठन, मांग या नीति—कांग्रेस की कार्य-योजना में कोई बाधा नहीं।
यह संकेत देता है—“हमारा घर चौपट नहीं, ठीक है, और आगे बढ़ रहे हैं।” - दुश्मन के आरोपों का खंडन
विपक्षी ताकतों द्वारा झूठ एवं अटकलों के आधार पर प्रोत्साहित आरोपों का ठोस खंडन हुआ।
यह स्पष्ट किया गया कि “विभाजन की राजनीति राजनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन कांग्रेस इसमें नहीं रुचि रखती।” - लोकतांत्रिक आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री रहते हैं अन्य रीति-नीति, लेकिन इवेंट में पब्लिकली हाथ उठाने से उन्होंने दाखिल किया “हम समर्थनकारी प्रतिनिधि-शक्ति हैं।”
ब्लॉग और ट्वीट पर वीडियो साझा करके उसने लोकतांत्रिक जनोक्ति को अपने पक्ष में सेंध लगाया।
आगे की राजनीति में संभावनाएँ
- BJP के दावों के अपुष्ट होने से उनकी विपक्षी भूमिका कमजोर पड़ सकती है।
- यदि सरकार दसहरे को नेतृत्वरहित करती, तो मुख्यमंत्री का दावा सौ फीसदी मूर्त शक्ति में परिवर्तित हो सकता है।
- संगठन स्तर पर रंधीप सुरजेवाला की सक्रियता कांग्रेस को मिड टर्म चैलेंज से अधिक कैम्पेन-तैयारी की ओर मोड़ सकती है।
निष्कर्ष
मैसूरु एयरपोर्ट पर प्रेस कैमरों के सामने हाथ उठाकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के एक-साथ नजर आने से साफ संकेत मिला है —
- कांग्रेस संगठनात्मक रूप से मजबूत और संगठित है।
- प्रदेश में नेतृत्व स्थिर है, और कोई अंदरुनी गृहयुद्ध नहीं चल रहा।
- विपक्षीय बयानबाज़ी के बीच कांग्रेस ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।
- दसहरा और संगठन बेहतर बनाने के लिए वास्तविकता में ठोस दिशा बताया गया है।
एक निष्कर्ष रूप में यह बातचीत सिर्फ प्रचार नहीं थी, यह कर्नाटक की राजनीति के अगले अध्याय की घोषणा थी — जहां नेतृत्व, संगठन और स्थापना में अंतरात्मा बना हुआ है।
















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