Supreme Court Article 32: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 32 के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए इस प्रावधान का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। शुक्रवार को न्यायालय ने इसी आधार पर एक याचिका को खारिज करते हुए इसे अदालत की प्रक्रिया और कानून का गंभीर दुरुपयोग बताया।
मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जबकि उससे संबंधित विषय पहले से ही बॉम्बे हाईकोर्ट में विचाराधीन था। अदालत ने इस कदम को न्यायिक अनुशासन के विपरीत बताते हुए कहा कि जब मामला हाईकोर्ट में लंबित हो, तब अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने की। पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 का उद्देश्य नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में त्वरित संवैधानिक उपचार देना है, न कि हर छोटे विवाद या प्रक्रियात्मक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप के लिए बाध्य करना।

बढ़ती याचिकाओं पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि अनुच्छेद 32 के तहत दायर होने वाले मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अदालत ने कहा कि अब तो हाईकोर्ट में स्थगन (स्टे) जैसे मामूली मामलों को लेकर भी सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं, जो इस संवैधानिक प्रावधान की मूल भावना के खिलाफ है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि खासकर दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों से इस तरह की याचिकाएं बड़ी संख्या में आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि हर छोटी बात पर सीधे शीर्ष अदालत पहुंचना आखिर किस तरह से उचित ठहराया जा सकता है। पीठ ने इसे अनुच्छेद 32 का खुला दुरुपयोग करार दिया।
याचिका को बताया कानून का गलत इस्तेमाल
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह याचिका न केवल न्यायालय की प्रक्रिया बल्कि कानून के भी घोर दुरुपयोग की श्रेणी में आती है। इसी कारण से इसे खारिज किया जाता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो भविष्य में इस तरह की याचिकाओं पर और सख्त रुख अपनाया जा सकता है।
हाईकोर्ट जाने पर अदालत का स्पष्ट संदेश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से यह अनुमति मांगी कि वह हाईकोर्ट का रुख कर सकें। इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने दो टूक शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट से किसी प्रकार की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “जहां जाना है, वहां जाकर सीधे आवेदन दाखिल करें। हमने आपकी किसी भी स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाई है।”
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कोई मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है, तो उसी विषय को लेकर अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना स्पष्ट रूप से दुरुपयोग माना जाएगा।
अनुच्छेद 32 क्या कहता है?
अनुच्छेद 32 भारतीय संविधान का एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान है, जिसे मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी माना जाता है। इसके तहत यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाकर न्याय की मांग कर सकता है। इस अनुच्छेद के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट को आदेश, निर्देश और विभिन्न प्रकार की रिट जारी करने का अधिकार प्राप्त है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में यह साफ कर दिया है कि अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल जिम्मेदारी और संयम के साथ किया जाना चाहिए। इसे वैकल्पिक कानूनी उपायों को नजरअंदाज करने या सामान्य मामलों में त्वरित राहत पाने का साधन नहीं बनाया जा सकता। अदालत की यह टिप्पणी न्यायिक व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक अहम संदेश मानी जा रही है।











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