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महाराष्ट्र विधानसभा में मारपीट के बाद स्पीकर का बड़ा फैसला: अब सदन के सत्र के दौरान आगंतुकों की एंट्री पूरी तरह बैन, आचार समिति गठन की भी तैयारी

Speaker's big decision after the fight in Maharashtra Assembly: Now entry of visitors is completely banned during the session of the House, preparations are also being made to form an Ethics Committee

राजनीति के मंच पर बहस और टकराव सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन जब यह टकराव मर्यादाओं की सीमाएं लांघ जाए, तो लोकतंत्र की प्रतिष्ठा पर गहरा आघात होता है। ऐसा ही कुछ हुआ महाराष्ट्र विधानसभा में, जहां बीजेपी विधायक गोपीचंद पडळकर और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड के समर्थकों के बीच सीधा टकराव हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि अब विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को बड़ा निर्णय लेना पड़ा — अब सदन के सत्र के दौरान कोई भी आगंतुक विधान भवन में प्रवेश नहीं कर सकेगा।


🔴 क्या हुआ था विधानसभा में?

17 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र की राजनीति में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। विधान भवन जैसी संवैधानिक और गरिमामयी जगह में दो विधायकों — एनसीपी (SP) के जितेंद्र आव्हाड और बीजेपी के गोपीचंद पडळकर — के समर्थकों के बीच हाथापाई हो गई।

जानकारी के मुताबिक, पहले इन दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस हुई थी। इसके अगले ही दिन उनके समर्थक विधान भवन परिसर में आपस में भिड़ गए। यह सब उस समय हुआ जब विधानसभा सत्र चल रहा था। यह घटना न केवल विधान भवन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली थी, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए एक शर्मनाक मिसाल भी बन गई।


🟠 स्पीकर का सख्त निर्णय

घटना के ठीक अगले दिन, 18 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बेहद सख्त निर्णय लिया। उन्होंने सदन में ऐलान करते हुए कहा:

“अब से विधान भवन परिसर में केवल मंत्री, विधायक, उनके अधिकृत निजी सचिव और सरकारी अधिकारी ही प्रवेश कर सकेंगे। किसी भी अन्य आगंतुक या समर्थक को सत्र के दौरान एंट्री नहीं दी जाएगी।”

यह फैसला विधानसभा की गरिमा की रक्षा के लिए लिया गया है। स्पीकर ने यह भी कहा कि जल्द ही एक विधानसभा आचार समिति (Legislature Ethics Committee) के गठन पर निर्णय लिया जाएगा।


🔵 क्या होंगे नए नियम?

  1. आगंतुकों पर प्रतिबंध:
    विधानसभा सत्र के दौरान कोई भी आगंतुक परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
  2. विधायकों की ज़िम्मेदारी:
    अगर कोई विधायक अपने साथ किसी व्यक्ति को लाते हैं, तो उस व्यक्ति के व्यवहार की पूरी ज़िम्मेदारी विधायक की होगी। यदि उस व्यक्ति से कोई अनुशासनहीनता होती है, तो उसका जवाबदेह संबंधित विधायक होगा।
  3. मीटिंग और भेंट पर रोक:
    सत्र के दौरान मंत्री या विधायक परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति के साथ आधिकारिक बैठक नहीं कर सकेंगे। न ही किसी आगंतुक से मुलाकात की अनुमति होगी।
  4. विशेषाधिकार उल्लंघन की कार्यवाही:
    घटना में शामिल दोनों विधायकों के समर्थकों — नितिन देशमुख (जितेंद्र आव्हाड के सहयोगी) और सरजे राव टकले (गोपीचंद पडळकर के सहयोगी) — पर विशेषाधिकार उल्लंघन की कार्यवाही की जाएगी। दोनों को विधानसभा सुरक्षा कर्मियों ने हिरासत में लिया था।

🔵 विधायकों ने जताया खेद

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिए गए इस निर्णय से पहले सदन में दोनों ही विधायक — जितेंद्र आव्हाड और गोपीचंद पडळकर — ने खेद जताया।

दोनों ने माना कि उनके समर्थकों के बीच जो हुआ, वह विधानसभा की गरिमा के खिलाफ था। इस पूरे प्रकरण के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय यही बन गया कि क्या अब राजनीति में व्यक्तिगत टकराव समर्थकों के ज़रिए सार्वजनिक मंचों तक पहुंचेगा?


🔴 स्पीकर की नैतिक चेतावनी

राहुल नार्वेकर ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि:

“विधानसभा कोई रणक्षेत्र नहीं है। यहां लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। अगर किसी भी पक्ष से ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि विधायक अगर चाहते हैं कि उनकी गरिमा और भूमिका समाज में बनी रहे, तो उन्हें अपने समर्थकों को भी अनुशासित रखना होगा।


🟢 आचार समिति क्यों जरूरी?

महाराष्ट्र विधानसभा में “आचार समिति” (Ethics Committee) का गठन वर्षों से लंबित था। अब इस ताज़ा घटनाक्रम ने इसे आवश्यक बना दिया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य होगा:

  • विधायकों के आचरण की निगरानी करना।
  • विधानसभा की गरिमा को सुरक्षित रखना।
  • अनुशासनहीनता के मामलों में स्वतंत्र जांच करना।
  • आवश्यकतानुसार विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की सिफारिश करना।

यदि यह समिति अस्तित्व में होती, तो शायद इस तरह की घटनाओं को पहले ही नियंत्रित किया जा सकता था।


🔵 विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस फैसले का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही सवाल उठाया है कि जब तक “संस्थागत अनुशासन” लागू नहीं होगा, तब तक केवल आगंतुकों पर रोक लगाने से काम नहीं चलेगा।

कांग्रेस नेता बाला साहेब थोराट ने कहा:

“यह फैसला ज़रूरी था, लेकिन ये संकेत भी है कि विधायक अपने समर्थकों पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे। ये लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।”

वहीं शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि विधानसभा की मर्यादा बनाए रखने के लिए सभी दलों को मिलकर आचार समिति की स्थापना सुनिश्चित करनी चाहिए।


🔴 बीजेपी और एनसीपी (SP) की भीतरी राजनीति

यह घटना सिर्फ एक टकराव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक स्थिति की भी झलक है। एनसीपी (शरद पवार गुट) और बीजेपी के बीच प्रदेश स्तर पर लगातार तनातनी बनी हुई है। गोपीचंद पडळकर जहां ओबीसी आरक्षण और मराठा राजनीति के मुद्दों को आक्रामक रूप से उठाते हैं, वहीं जितेंद्र आव्हाड एनसीपी के तेज-तर्रार नेताओं में माने जाते हैं। ऐसे में यह टकराव व्यक्तिगत कम और राजनीतिक ज़्यादा माना जा रहा है।


निष्कर्ष: क्या यह एक नई शुरुआत है?

विधान भवन में यह अभूतपूर्व घटना महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के लिए एक चेतावनी है। लोकतंत्र की ताकत उसकी बहस में है, लेकिन जब बहस हिंसा में बदल जाए, तो वह सत्ता की गरिमा को खंडित कर देती है।

स्पीकर राहुल नार्वेकर का यह फैसला भले ही सख्त हो, लेकिन यह एक ज़रूरी हस्तक्षेप था। अब देखना होगा कि प्रस्तावित विधानसभा आचार समिति कितनी जल्दी बनती है और कितना प्रभावशाली काम करती है।

राजनीतिक दलों और विधायकों को भी यह समझना होगा कि उनके शब्द और उनके समर्थकों का व्यवहार विधानसभा की प्रतिष्ठा को सीधे प्रभावित करता है। यदि आज इसका संज्ञान नहीं लिया गया, तो भविष्य में और बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है।

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