उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में किशोरियों के स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। महिला अस्पताल में स्थित मॉडल साथिया केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, किशोरियों में मासिक धर्म की अनियमितता के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने, शारीरिक गतिविधियों में कमी और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं।
दरअसल, बरेली में जनवरी और फरवरी महीने में 394 किशोरियों की काउंसलिंग की गई थी, जिनमें से अधिकांश को मासिक धर्म की समस्याएं जैसे जल्दी या देर से मासिक धर्म आने की शिकायत थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समस्या शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है, जो शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, तनाव और गलत दिनचर्या के परिणामस्वरूप होती है।

10-12 साल की उम्र में मासिक धर्म शुरू होने के मामले बढ़े
मॉडल साथिया केंद्र की काउंसलर अल्पना सक्सेना ने बताया कि अब हर महीने 10 से 15 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां 10-12 साल की किशोरियों को मासिक धर्म शुरू हो रहा है। यह उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच न कराने और खानपान में लापरवाही के कारण एनीमिया का खतरा भी बढ़ सकता है।
2024-25 में बढ़े काउंसलिंग के मामले
मॉडल साथिया केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में किशोरियों की काउंसलिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
- अप्रैल – 297
- मई – 322
- जून – 308
- जुलाई – 253
- अगस्त – 202
- सितंबर – 265
- अक्टूबर – 207
- नवंबर – 170
- दिसंबर – 200
- जनवरी – 193
- फरवरी – 201
विशेषज्ञों की राय – जीवनशैली में सुधार जरूरी
वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मृदुला शर्मा का कहना है कि किशोरियों में मासिक धर्म की अनियमितता का सबसे बड़ा कारण उनकी दिनचर्या का बिगड़ना है। पढ़ाई के अलावा वे शारीरिक गतिविधि कम कर रही हैं, जिसके कारण उनके हार्मोन असंतुलित हो रहे हैं।
मासिक धर्म को प्रभावित करने वाले कारण
- सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताना
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
- असंतुलित खानपान और देर से भोजन करना
- तनाव और अनियमित नींद
क्या करें किशोरियां?
डॉक्टरों की सलाह है कि किशोरियों को अपनी दिनचर्या संतुलित करनी चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए, समय पर भोजन करना चाहिए और सोशल मीडिया पर कम समय बिताना चाहिए। मासिक धर्म की अनियमितता को हल्के में न लें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें, ताकि भविष्य में किसी गंभीर बीमारी का सामना न करना पड़े।















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