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लाल किले में सुरक्षा में चूक: डमी बम का नहीं लगा सके पता, सात पुलिसकर्मी सस्पेंड

Security lapse in Red Fort: Could not detect the dummy bomb, seven policemen suspended

15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व से पहले दिल्ली में एक गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई है। भारत की आन-बान-शान का प्रतीक लाल किला, जहां हर साल प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं, वहां सुरक्षा में सेंध लगने की खबर ने पूरे तंत्र को हिला कर रख दिया है।

मॉक ड्रिल में खुली पोल

दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए लाल किले में कुल 17 मॉक ड्रिल आयोजित की थीं। इनका उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी हमले, बम विस्फोट या सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति से निपटने की तैयारी को जांचना था।

हालांकि, इन 17 में से 16 ड्रिल सफल रहीं, लेकिन एक मॉक ड्रिल में भारी चूक सामने आई। इस अभ्यास के दौरान डमी बम (नकली विस्फोटक उपकरण) को लाल किले के अंदर छिपाया गया था, जिसका उद्देश्य यह परखना था कि सुरक्षा एजेंसियां इसे समय रहते खोज पाती हैं या नहीं। दुर्भाग्यवश, तैनात पुलिसकर्मी इस डमी बम का पता नहीं लगा सके, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई।

सात पुलिसकर्मी सस्पेंड

इस चूक के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। इन पर लापरवाही, अनुशासनहीनता और प्रशिक्षण में दी गई गाइडलाइनों का पालन न करने का आरोप है। पुलिस विभाग ने इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि इस बार सुरक्षा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों की चिंता

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों में इस घटना को लेकर खासी चिंता देखी जा रही है। एक अधिकारी के अनुसार, “लाल किले की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसी कोई भी लापरवाही न केवल दिल्ली की सुरक्षा के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।”

स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ी सतर्कता

15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र को संबोधन और झंडारोहण कार्यक्रम होता है। इस आयोजन में देश-विदेश के कई गणमान्य लोग भी शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक अस्वीकार्य मानी जाती है।

इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और भी कड़ा कर दिया है। ड्रोन, स्नाइफर डॉग्स, बम स्क्वाड, स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। मुख्य द्वार, बैरिकेड्स, वीआईपी लाउंज, छतें और आसपास की इमारतों की बारीकी से जांच की जा रही है।

बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी

इसी बीच एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। सोमवार को दिल्ली पुलिस ने लाल किले में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे पांच बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। ये सभी बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे और संदिग्ध गतिविधियों के तहत इन्हें हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान इनके इरादों और नेटवर्क की जांच की जा रही है।

आईबी और रॉ की सक्रियता

इस घटना के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसी खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। वे यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि डमी बम वाले मॉक ड्रिल में सुरक्षा चूक किस स्तर पर हुई और क्या इसमें कोई अंदरूनी मिलीभगत थी। साथ ही, यह भी जांच हो रही है कि गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक किसी बड़े स्लीपर सेल या नेटवर्क से जुड़े थे या नहीं।

लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था: एक नज़र

लाल किले को हर साल स्वतंत्रता दिवस से पहले बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में लपेटा जाता है:

  1. आंतरिक सुरक्षा पर सीआईएसएफ और दिल्ली पुलिस की निगरानी।
  2. बाहरी परिधि की निगरानी में NSG और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती।
  3. ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल।
  4. स्नाइफर डॉग्स और बम डिटेक्शन यूनिट की तैनाती।
  5. सीसीटीवी सर्विलांस और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम।
  6. एंट्री पास आधारित प्रवेश, जिसमें स्कैनिंग अनिवार्य।

मॉक ड्रिल की अहमियत

मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि किसी आपदा या हमले की स्थिति में सुरक्षाकर्मी कितनी तेजी और प्रभावशीलता से प्रतिक्रिया कर पाते हैं। यह एक तरह से उनके प्रशिक्षण और मानसिक तैयारी की परीक्षा होती है।

लेकिन इस बार जिस प्रकार सुरक्षाकर्मी डमी बम की उपस्थिति को नहीं पहचान सके, उससे उनकी तत्परता और दक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है।

पूर्व घटनाओं की याद दिलाता मामला

यह घटना कुछ वर्षों पहले की उस घटना की याद दिलाती है जब 2017 में लाल किले के पास संदिग्ध बैग मिलने से अफरा-तफरी मच गई थी। हालांकि बाद में वह बैग निरापद निकला, लेकिन उसने सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया था।

इसके अलावा, 2000 में हुए लाल किले पर आतंकी हमले की यादें भी अब तक लोगों के ज़ेहन में हैं, जिसमें सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे। इसलिए, किसी भी स्तर पर लापरवाही बेहद घातक हो सकती है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

सुरक्षा चूक की खबर सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “जहां देश के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा में सेंध लग रही है, वहीं सरकार तमाशबीन बनी हुई है।” आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

सरकार की ओर से गृह मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि स्वतंत्रता दिवस तक सुरक्षा में कोई कमी न रह जाए।

दिल्ली पुलिस की जवाबदेही

दिल्ली पुलिस आयुक्त ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि, “यह बेहद गंभीर मामला है और हम इससे सबक लेकर और मजबूत तैयारी करेंगे। लापरवाही बरतने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। हम अपने जवानों को फिर से रिफ्रेश ट्रेनिंग दे रहे हैं।”

नागरिकों से अपील

प्रशासन और पुलिस ने राजधानी के नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि को तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को रिपोर्ट करें। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप सूचना सेवा भी शुरू की गई है।

निष्कर्ष: सतर्कता ही सुरक्षा की कुंजी

इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद या असामाजिक तत्व किसी भी समय, किसी भी स्थान पर वार कर सकते हैं। ऐसे में हमारी सुरक्षा एजेंसियों को हर पल सतर्क रहना होगा। मॉक ड्रिल में मिली असफलता भले ही एक अभ्यास का हिस्सा थी, लेकिन यह उस मानसिकता को उजागर करती है जो वास्तविक समय में जान-माल की हानि का कारण बन सकती है।

15 अगस्त के आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हर स्तर पर कड़ी निगरानी और प्रशिक्षण सुनिश्चित हो। साथ ही, जो लापरवाह हैं या सुरक्षा के मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए। तभी लाल किले की गरिमा और देश की प्रतिष्ठा अक्षुण्ण रह सकेगी।

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