कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ कार्य
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को उत्तर प्रदेश के संभल की शाही जामा मस्जिद की बाहरी दीवारों की पुताई का काम शुरू हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम शनिवार को मस्जिद का निरीक्षण करने पहुंची थी। इसके बाद मस्जिद की बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई का कार्य शुरू किया गया, जिसकी वीडियो भी सामने आई है।
कोर्ट ने दिया था एक हफ्ते में पुताई पूरी करने का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 मार्च को आदेश दिया था कि मस्जिद की बाहरी दीवारों की पुताई बिना किसी छेड़छाड़ के पूरी की जाए। इसके तहत 13 मार्च को एएसआई की टीम ने मस्जिद का सर्वेक्षण किया और काम की रूपरेखा तय की। इस आदेश के अनुसार, मस्जिद की बाहरी दीवारों को पेंट किया जाएगा और रमजान के दौरान लाइटिंग भी की जाएगी।

8 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
संभल की शाही जामा मस्जिद पहले भी सुर्खियों में रही है। नवंबर 2023 में हुए मस्जिद के सर्वे के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था, जिसके कारण हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस मामले में हाई कोर्ट ने मस्जिद के बाहरी हिस्से को सजाने की अनुमति दी है। अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।
ASI की टीम ने लिया जायजा
शाही जामा मस्जिद के सचिव मसूद फारूकी ने बताया कि शनिवार को एएसआई की टीम मस्जिद का निरीक्षण करने पहुंची थी। उन्होंने मस्जिद की बाहरी दीवारों पर पुताई के लिए आवश्यक मजदूरों और सामग्री का आकलन किया। इसके बाद 16 मार्च को रंगाई-पुताई का कार्य शुरू कर दिया गया।
हिंदू पक्ष की प्रतिक्रिया
हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, केवल मस्जिद की बाहरी दीवारों पर ही पुताई की जा रही है। अदालत ने एएसआई को मस्जिद के बाहरी हिस्से पर रोशनी लगाने का भी निर्देश दिया है।
मस्जिद कमेटी का पक्ष
शाही जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में याचिका दायर की थी। उनके अनुसार, मस्जिद की पुताई में हमेशा सफेद, हरा और सुनहरे रंग का उपयोग किया जाता रहा है और इस बार भी वही रंग लगाए जा रहे हैं। भगवा रंग लगाने की बात को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया और कहा कि शहर में अमन-चैन बनाए रखना जरूरी है।
पेंटिंग का खर्च कौन उठाएगा?
मस्जिद पर हो रहे पेंटिंग कार्य का खर्च मुख्य रूप से मस्जिद कमेटी द्वारा उठाया जा रहा है। हालांकि, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) भी कुछ खर्चा वहन कर सकता है। मस्जिद कमेटी के अनुसार, रमजान के दौरान मस्जिद पर लाइटिंग की भी व्यवस्था की जाएगी।















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