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कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की संभावना बढ़ी, WHO ने जताई चिंता

Possibility of booster dose of corona vaccine increased WHO expressed concern

दुनिया भर में कोरोना वायरस का नया वैरिएंट NB.1.8.1 तेजी से फैल रहा है, जिससे एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ गई है। इस वैरिएंट का पॉजिटिविटी रेट 11 फीसदी से ज्यादा बताया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस पर चिंता जताई है कि यह वैरिएंट इतना तेजी से क्यों फैल रहा है। हालांकि इससे अब तक ज्यादा मौतें नहीं हो रही हैं, लेकिन इसका तेज़ फैलाव जरूर चौंकाने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ओमिक्रॉन का ही नया रूप है। भारत में कोरोना वैक्सीनेशन के चलते लोगों में इम्यूनिटी मौजूद है, लेकिन कोरोना के ये नए वैरिएंट समय-समय पर अपने लक्षण और ताकत बदलते रहते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि इस समय NB.1.8.1 से मौत का बड़ा खतरा नहीं दिख रहा, लेकिन सतर्कता और सावधानी जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को फिर से कोविड गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए, जैसे कि मास्क पहनना, भीड़भाड़ से बचना और इम्यूनिटी मजबूत रखना। भारत में अभी नई वैक्सीन की जरूरत महसूस नहीं की जा रही है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में एहतियातन वैक्सीनेशन की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इस वैरिएंट से कोई और ज़्यादा खतरनाक सब-वैरिएंट पैदा हो गया, तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड वैक्सीन अब भी काफी असरदार है, खासकर गंभीर लक्षणों और मौत के खतरे को कम करने में। यदि वैक्सीन लगवाने के बाद किसी को संक्रमण होता भी है, तो उसकी तबीयत ज्यादा नहीं बिगड़ती और मरीज जल्दी ठीक हो सकता है, क्योंकि वैक्सीनेशन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लगातार कोरोना वायरस की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। हालांकि, पिछले साल जुलाई के बाद से कोविड के नए वैरिएंट की पॉजिटिविटी रेट 11% तक पहुंच गई है, जो चिंताजनक है। पॉजिटिविटी रेट का मतलब है – जितने लोगों की जांच हुई, उनमें से कितने लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। सिंगापुर, थाईलैंड, चीन के साथ अब भारत में भी कोविड मरीजों की संख्या में तेजी से इज़ाफा देखने को मिल रहा है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता बेहद ज़रूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी देशों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें। खासकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। डब्ल्यूएचओ ने देशों से यह भी कहा है कि वे स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को तेज करें, ताकि संक्रमित व्यक्तियों की पहचान जल्दी हो सके। साथ ही, जिन मरीजों में कोरोना के लक्षण हैं या जो हाल ही में कहीं यात्रा करके लौटे हैं, उनकी ट्रैवल हिस्ट्री की जांच करना और टेस्टिंग कराना बेहद जरूरी है। WHO का मानना है कि इस तरह की सावधानियों से संक्रमण के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के नए वैरिएंट से बचाव का सबसे अच्छा तरीका अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाना है। खासकर हृदय रोग, मधुमेह, लिवर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। कोरोना वायरस का नया वैरिएंट JN.1 अब केवल फ्लू जैसे सामान्य लक्षणों जैसे बुखार, खांसी और जुकाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतों से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर रहा है। इसके कारण पेट दर्द, उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए, कोविड के नए लक्षणों को पहचानना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

भारत में कोरोना का नया वैरिएंट कितना खतरनाक है? डेल्टा और ओमिक्रॉन के बाद अब NB.1.8.1 और LF.7 के साथ-साथ नया JN.1 वैरिएंट भी कई राज्यों में फैल चुका है। यह वायरस दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे इलाकों में तेजी से फैल रहा है। हालांकि विशेषज्ञ इसकी गंभीरता पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन सावधानी बरतना और कोविड गाइडलाइंस का पालन करना अभी भी बहुत जरूरी है ताकि संक्रमण को रोका जा सके।

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