ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के ड्रोन हमले
🔹 घटनाक्रम और पृष्ठभूमि
- 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने चार्ली-पारंपरिक दृष्टिकोण से पलटवार करते हुए ऑपरेशन सिंदूर 7 मई से प्रारंभ किया। इसमें नौ आतंकी ठिकानों को 23 मिनट में सटीक रूप से निशाना बनाया गया था ।
- जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने 8–10 मई को बड़े पैमाने पर अनआर्म्ड ड्रोन और लॉइटर म्यूनिशन भेजे, जिन्हें भारत ने प्रभावी रूप से रोक दिया ।
चीफ़ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ (CDS) अनिल चौहान के मुख्य बिंदु
- ड्रोन हमलों को बेरहमी से नाकाम
- 10 मई को भेजे गए अधिकांश ड्रोन और हमूनिशन को काइनेटिक (फायरिंग) और नॉन-काइनेटिक (जैसे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग) दोनों तरीकों से बेअसर किया गया ।
- कुछ ड्रोन तो लगभग पूरा-संभाला अवस्था में पकड़े गए, जिन्होंने कभी भी सेना या नागरिक ढांचे को नुकसान नहीं पहुँचाया।
- स्वदेशी तकनीक की भूमिका
- चौहान ने कहा कि इस घटना ने सिद्ध कर दिया है कि भारत-निर्मित काउंटर-UAS सिस्टम हमारी भौगोलिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए क्यों अनिवार्य हैं।
- हमें आत्मनिर्भरता बनाए रखनी होगी क्योंकि विदेशी तकनीकों पर निर्भरता हमारी तत्परता और उत्पादन क्षमता को सीमित करती है ।
- मौजूदा युद्ध तकनीक में बदलाव आवश्यक
- उन्होंने उल्लेख किया कि आज की लड़ाइयाँ बड़े प्लेटफॉर्म (जैसे लड़ाकू एयरक्राफ्ट) के बजाय छोटे, तेज, और नेटवर्क-सक्षम सिस्टम पर निर्भर कर रही हैं—यह उनके “तीसरे क्रांति” के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
- “कल की युद्ध प्रणाली आज काम नहीं करेंगी—कल की तकनीकों से आज की लड़ाई नहीं जीती जा सकती”—इस बयान ने आधुनिक युद्ध कौशल के बदलते स्वरूप पर जोर दिया।
- गुप्त जानकारी की अहमियत
- यदि हम स्वदेशी सिस्टम और तकनीक विकसित करेंगे तो हमारी रणनीति शत्रु से छिपी रहेगी, कीमत कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी ।
ड्रोन और आधुनिक युद्ध का नया स्वरूप
- विश्व स्तर पर हाल की लड़ाईयों में यह सिद्ध हो चुका है कि विमुक्त (Unmanned) उपकरण ने लड़ाई के ताकतिक स्तर को पूरी तरह बदल दिया है ।
- बड़ी तिमाही-उड़ने वाली इकाइयाँ (जैसे मिग-29, एफ-16) छोटी, तेजी से तैनात और डेटा-सक्षम ड्रोन के मुकाबले कमजोर पड़ रही हैं।
- सतह से हवा में मिसाइल और C-UAS सिस्टम का होना आज जरूरी है—ये हमें “लोअर एयरस्पेस” में हमेशा तैयार रखते हैं।
🇮🇳 स्वदेशी मिसाइल सिस्टम: “आकाशटीर” और “आकाश एनजी”
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाशटीर (IGMDP के अंतर्गत विकसित) और इसके अपग्रेडेड संस्करण आकाश NG ने बड़ी भूमिका निभाई।
- Mach 2.5 की ऊँचाई से 30 मीटर से 20 किमी तक मारक क्षमता वाले आकाश मिसाइल ने भारत के पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में ड्रोन और मिसाइल स्वॉर्म को इंटरसेप्ट किया। यह स्वदेशी Counter-UAS क्षमताओं का उदाहरण है।
वैश्विक सहयोग या आत्मनिर्भरता?
- ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से तत्काल हथियार सहयोग चाहता था—परंतु चौहान ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता ही रणनीतिक आवश्यकता है ।
- इंटरनेशनल विशेषज्ञों ने भी कहा कि भारतीय कार्रवाईयों ने पाकिस्तान के चाइनीज़-आधारित हथियार उपकरणों की कारगुज़ारी को बेनकाब किया ।
गैर-संपर्क युद्ध: नेटवर्क-सेंट्रिक रणनीति
- चौहान ने इसे “non‑contact warfare” (गैर-संपर्क युद्ध) कहा—जहां दुश्मनों की देखरेख के बिना, नेटवर्क, रडार, सैटेलाइट, सीधे लड़ाई के बजाय इंटेलिजेंस/डेटा आधारित अभियान शुरू किए गए।
- डिजिटल जुड़ाव और दूर से घुसपैठ कर, दुश्मन की ताकत को बिना टकराव के कठिनाई में डालना – यही ऑपरेशन सिंदूर की विशेषता थी।
क्या पाकिस्तान ने ड्रोन छोड़े थे?
- पाकिस्तान ने अनुमानतः 300–400 ड्रोन छोड़े, जिनमें से अधिकांश तुर्की‑चीन मिलेजुले ड्रोन थे ।
- इसके बावजूद, भारत की आधुनिक सेंसिंग, जैमिंग, इंटरसेप्शन तकनीक ने उन्हें समय पर बेअसर कर दिया और नुकसान शून्य रहा ।
प्रमुख सीख और आगे की चुनौतियाँ
- टेक्नोलॉजी की अनुकूलता:
- हमें ‘हमारे क्षेत्र’—विशेषकर पर्वतीय, मरुस्थलीय, देसी इलाकों के अनुरूप—C-UAS सिस्टम विकसित करने होंगे।
- नेटवर्क-सेंट्रिक संचालन:
- सैटेलाइट, रडार, ड्रोन, युद्धपोत और जमीन के सैनिकों का तेज़ डेटा साझा करना युद्ध का स्वरूप बदल रहा है।
- छोटे पैमानों की ताकत:
- बड़े जंगी विमान और युद्धपोतों की तुलना में, छोटे पुराने प्लेटफ़ॉर्म आज कम प्रभावी हैं—इसलिए भविष्य छोटे, चपल, और बहु-संयोजित उपकरणों का है।
- ऑपरेशनल राजनैतिक स्वतंत्रता:
- युद्ध-राजनीति में स्वदेशी सफलता से रणनीतिक स्वायत्तता मिलती है और विरोधियों से रहस्य बनाए रखता है ।
निष्कर्ष: स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी का भविष्य
- ऑपरेशन सिंदूर और CDS चौहान की बातों से स्पष्ट है कि भारत को ड्रोन युद्ध में शीर्ष पर बने रहने के लिए नवीन तकनीकों में निवेश करना होगा।
- भारत के लिए आत्मनिर्भरता सिर्फ सैन्य दृष्टिकोण नहीं—यह रणनीतिक औद्योगिक क्षमता और वैश्विक सुरक्षा भूमिका का प्रतीक है।
- आकाशटीर, C-UAS तकनीक, नेटवर्क-संचालित प्लेटफ़ॉर्म—ये सभी आधुनिक युद्ध के लिए इंडिया की रीढ़ हैं।
















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