रात को ब्रश न करना अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। मसूड़ों की बीमारी (पीरियडोंटाइटिस) के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया पोरफायरोमानास जिंजिवाइल्स, जो मुंह में पाया जाता है, दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। यह बैक्टीरिया ब्लड सर्कुलेशन के माध्यम से दिल तक पहुंच सकता है और वहां फाइब्रोसिस पैदा कर सकता है, जिससे दिल की संरचना में बदलाव होता है और इलेक्ट्रिक सिग्नल में रुकावट आती है। इस प्रक्रिया से एट्रियल फाइब्रिलेशन (AFib) जैसी बीमारियां और अचानक हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। यह अध्ययन इस बात को दर्शाता है कि रात में ब्रश करना हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

मसूड़ों की बीमारी (पीरियडोंटाइटिस) से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है, लेकिन अब एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि ऐसी स्थिति में एट्रियल फाइब्रिलेशन (AFib) का जोखिम 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। एट्रियल फाइब्रिलेशन एक गंभीर दिल की स्थिति है, जिसमें हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं। पिछले कुछ दशकों में इस तरह के मामलों में करीब दोगुना इजाफा हुआ है। 2010 में 3.35 करोड़ लोग इस समस्या से प्रभावित थे, जबकि 2019 में यह संख्या बढ़कर 6 करोड़ तक पहुंच गई। पहले यह माना जाता था कि मसूड़ों की सूजन से शरीर की इम्यूनिटी सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण कुछ रसायन रक्तप्रवाह में मिलकर शरीर के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन अब नए अध्ययन से पता चला है कि सिर्फ केमिकल्स ही नहीं, बल्कि बैक्टीरिया भी रक्तप्रवाह के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच रहे हैं। यह बैक्टीरिया दिल की मांसपेशियों, वॉल्व और धमनियों की अंदरूनी परतों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि पहले यह माना जाता था कि जिंजीवाइटिस वाले बैक्टीरिया केवल मसूड़ों तक सीमित रहते हैं, लेकिन अब नए अध्ययन से यह पता चला है कि यह बैक्टीरिया दिमाग, लिवर और गर्भाशय जैसे शरीर के अन्य हिस्सों में भी पाया जा चुका है। अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि यह बैक्टीरिया दिल तक कैसे पहुंचता है, लेकिन इस अध्ययन में यह बताया गया है कि पी जिंजेवाइल्स बैक्टीरिया सीधे दिल के बाएं आलिंद तक पहुंच सकता है। इस शोध से यह साबित होता है कि पीरियडोंटाइटिस और एट्रियल फाइब्रिलेशन (AFib) के बीच एक संभावित माइक्रोबियल कड़ी हो सकती है। अध्ययन के प्रमुख लेखक शुनसुके मियाउची के अनुसार, हालांकि अभी तक पीरियडोंटाइटिस और AFib के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं है, लेकिन बैक्टीरिया का रक्त में फैलाव इन दोनों स्थितियों को जोड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पी जिंजीवाइल्स बैक्टीरिया न केवल मसूड़ों की बीमारी, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर प्रभाव डालने की क्षमता रखता है।

अब यह साबित हो चुका है कि दांतों की बीमारी से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए इसका ख्याल रखना जरूरी है। हर रात नियमित रूप से ब्रश करें और दिन में एक बार फ्लॉसिंग जरूर करें, जिससे दांतों के बीच की गंदगी हटाई जा सके। इसके अलावा, रेगुलर डेंटल चेकअप भी कराते रहें। अगर मसूड़े स्वस्थ हैं, तो पी जिंजेवाइल्स जैसे बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने का रास्ता बंद हो सकता है। याद रखें कि दिन में दो बार ब्रश करें, सॉफ्ट ब्रिसल वाला टूथब्रश और फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। हर बार दो मिनट तक ब्रश करना चाहिए। हर तीन-चार महीने में टूथब्रश बदलें और अगर टूथब्रश के तार पहले ही खराब हो गए हों, तो उसे तुरंत बदलें। माउथवॉश और टंग क्लीनर का भी इस्तेमाल करें। मीठे खाद्य पदार्थों और ड्रिंक्स से दूर रहें और तंबाकू का सेवन न करें। हर छह महीने में डेंटिस्ट से चेकअप और सफाई जरूर कराएं। इस तरह से दांतों और दिल दोनों की सेहत बनी रहती है।
















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