घटना का परिचय
2017 में केरल की निवासी नर्स निमिषा प्रिया (वर्ष 1989, कोल्लेंगोड़े, पलक्कड़) यमन के राजधानी सना में एक छोटे क्लिनिक की मालकिन थीं, जिसकी सह-स्थापना उन्होंने यमन के व्यापारी तलाल अब्दो मेहदी के साथ की थी क्लिनिक की स्थापना 2015 में हुई और इस दौरान तलाल ने उनका पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज हड़प लिए थे। आरोप है कि निमिषा ने कथित दुर्व्यवहार, आर्थिक और शारीरिक एवं यौन शोषण का सामना किया, जिसके बाद उन्होंने किटामाइन इंजेक्शन देकर तलाल को बेहोश कर उसकी मृत्यु का कारण बने ।
पोस्ट-मार्टम के बाद, तमाम आरोपों के बीच, शव को काटकर पानी की टंकी में डाल दिया गया – जो जेल बातचीत और मीडिया रिपोर्ट्स का हिस्सा बना ।
गिरफ्तारी और दोषसिद्धि
- गिरफ्तारी: अगस्त 2017 में निमिषा भागने की कोशिश करते समय पकड़ी गईं।
- ट्रायल: 2018 में यमन की अदालत ने उन्हें हत्या का दोषी करार दिया और फांसी की सजा सुनाई ।
- अपील: 2020 में यमन के सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा।
- अंतिम मंजूरी: दिसंबर 2024 में यमन के राष्ट्रपति रशाद अल-आलिमी ने फांसी की मंजूरी दी; जनवरी 2025 में सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने भी यह मंजूर की।
🗓रविवार, 16 जुलाई 2025 की फांसी—निलंबन
16 जुलाई 2025 गुरुवार को निमिषा की फांसी होनी तय थी, लेकिन अंतिम समय में अहम कूटनीतिक और धार्मिक हस्तक्षेपों की वजह से इसे स्थगित कर दिया गया।
कैलेंडर:
| तिथि | घटनाक्रम |
|---|---|
| 14 जुलाई 2025 | यमन प्रशासन ने फांसी टाल दी; आदेश दिनांकित |
| 15–16 जुलाई | कूटनीतिक/आध्यात्मिक मिशन, अंतिम दौर की वार्ता जारी |
‘ब्लड मनी’ की भूमिका
इस पूरे मामले में अंतिम विकल्प ‘ब्लड मनी’ – शरियत के अंतर्गत दी जाने वाली मुआवज़ा राशि है, जिसे मृतक के परिवार की सहमति से ही दिया जा सकता है।
- भारतीय सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में बताया कि यही इकलौती कानूनी राह बची है ।
- अगले चरण की वार्ता का केंद्र बिंदु यह राशि और मृतक परिवार की सहमति बन चुकी है ।
वित्तीय पहलू:
- केरला बिजनेसमैन M. A. यूसुफ अली ने घोषणा की कि वे आवश्यक राशि देने हेतु तैयार हैं।
- बचाव कार्यों वाले संगठन ने ₹58,000 (लगभग USD 58,000) जुटाने की जानकारी दी – यह केवल प्रारंभिक राशि है ।
धार्मिक/आध्यात्मिक हस्तक्षेप
मध्यस्थता में प्रमुख भूमिका निभाने वाले प्रमुख मुस्लिम धार्मिक नेता:
- कांतापुरम A.P. अबूबकर मुसलियार (ग्रैंड मुफ़्ती ऑफ इंडिया):
उन्होंने यमन के शूरा काउंसिल के एक सदस्य से संपर्क स्थापित किया, जो मृतक परिवार से बातचीत की कोशीश कर रहे हैं। - येमेनी इस्लामी विद्वान—शेख हबीब ओमर:
औपचारिक-सूची प्रतिनिधियों में से एक; परिवार व जनजातीय नेता उनसे सीधा जुड़े हुए थे ।
🇮🇳 भारतीय सरकार की कूटनीतिक भूमिका
- आपातकालीन प्रयास: भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि उनके पास शांति वार्ता—बिना यमन में राजनयिक उपस्थिति—के माध्यम之外 और विकल्प नहीं है ।
- गुप्त चैनलों से हस्तक्षेप:
- एक प्रभावशाली यमनी शक (शेख) से संपर्क हुआ ।
- यमन में भारतीय मिशन से जुड़े लोग भी पारस्परिक रूप से जुड़कर वार्ता में योगदान दे रहे थे ।
- केंद्रीय व राज्य राजनीतिज्ञों—CM, विपक्षी दल—ने प्रेस में और कोर्ट में तत्काल कदम उठाए ।
मृत्यु परिवार की प्रतिक्रिया
- मृतक के भाई अब्देलफत्ताह मेहदी ने स्पष्ट किया कि कोई भी क्षमा मंजूर नहीं है; उन्हें केवल फांसी स्वीकार्य है ।
- उन्होंने भारतीय मीडिया की आलोचना करते हुए कहा, “इन्हें पीड़ित की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है” ।
- HT ने उद्धृत किया: “हमारी राय साफ है: हम क़ियास [प्रतिशोध] में रुके नहीं हैं, किसी और में नहीं।”
यह स्पष्ट करता है कि शवदान-आर्थीक समझौते की परम सहमति नहीं है, और परिवार अभी दृढ़ता से फांसी की पक्षधर है।
चल रहे वार्ता—
फांसी स्थगिति के बाद कई बिंदुओं पर चर्चा हो रही है:
- संघर्ष जारी: मृतक परिवार की सहमति न मिलना अभी तक मुख्य अड़चन बनी हुई है ।
- धर्म-राजनीतिक मध्यस्थ: शेख हबीब ओमर, कांतापुरम मुसलियार, राजनयिक-धरोहर के व्यक्ति वार्ता संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।ब्लड मनी राशि निर्धारण: यह तय कि काेई व्यवस्थापन संभव है—विशेष रूप से M. A. यूसुफ अली की पहल
- घरेलू–अंतर्राष्ट्रीय दबाव: सुप्रीम कोर्ट, राज्य सरकार, विपक्ष और मानवाधिकार समूहों की लगातार निगाहें इस मसले पर बनी हुई हैं
🧭 कानूनी—मानवाधिकार—राजनीतिक दृष्टिकोण
कानूनी मुद्दे
- बिना राजनयिक उपस्थिति: यमन में भारत की कोई दूतावासीय उपस्थिति नहीं है; मामला पूरी तरह अनौपचारिक चैनलों से निपटाया जा रहा है।
- ब्लड मनी: शरियत और यमनी कानून के तहत वैध है, लेकिन परिवार की सहमति अनिवार्य है ।
- भारतीय विधि: भारत में फांसी की सजा है, लेकिन विदेश में लागु नहीं होती; विदेश में भारतीय नागरिकों को उनके न्याय क्षेत्र के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाता है।
मानवाधिकार
- अमान्य ट्रायल की आशंका: निमिषा को न तो इंटरप्रेटर उपलब्ध कराया गया, न ही उचित कानूनी प्रतिनिधि — यह भारतीय व मानवाधिकार समूहों ने उठाया है।
- डिफॉल्ट केवल भारत की सीमा: भारत सरकार कह चुकी है कि मानवाधिकार लक्ष्यों को दबाव के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा सकता—चूंकि दोहरी राजनयिक मौजूदगी नहीं है ।
राजनीतिक निहितार्थ
- राजनीतिक दलों की तीव्र गतिविधियां:
कांग्रेस की KC वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा; विपक्ष तथा राज्य सरकार ने तत्काल संलग्नता दिखाई । - राज्य-केन्द्र तालमेल: केरल CM पिनारायी विजयन ने केंद व धार्मिक हस्तक्षेपों की सराहना की ।
वर्तमान स्थिति और आगे की राह
समय अभी भी मृतक परिवार की अंतिम सहमति तक ही तय है। फांसी टली जरूर है, लेकिन स्थायी निर्णय नहीं आया है—निमिषा की स्थिति फिलहाल ‘अदालती/कानूनी अस्थायी स्थिति’ में बनी हुई है।
वार्ता–योजना:
- धार्मिक व राजनयिक दलों की भूमिका जारी है।
- ब्लड मनी राशि और परिवार की सहमति अंतिम निर्णय के लिए निर्णायक होंगे।
- सना में यमन के स्थानीय अधिकारियों, जेल प्रशासन, कोर्ट और जनजातीय नेताओं के साथ स्थिर संपर्क आवश्यक है।
निष्कर्ष
- न्याय बनाम दया: मृतक परिवार न्याय चाहता है; लेकिन इंसानियत-बंदगी में सबसे उचित उपाय ‘ब्लड मनी’ है।
- आंतरिक-दुनिया छाप: भारतियों के लिए यह दर्दनाक–विवादित मामला बना हुआ है—एक ओर हिंसा दंडनीय, दूसरी ओर एक महिला की जिंदगी भी बचानी है।
- राजनयिक कमजोरी: यमन में भारत की गैर-मौजूदगी की रक्षा में साजिश–कानूनी सुपुर्दगी, अपेक्षित मानवीय सहानुभूति को चुनौती दे रही है।
अंतिम टिप्पणियाँ
- फांसी की स्थिति:
- स्थगित की गई है (14–15 जुलाई को अंतिम आदेश) ।
- लेकिन अनुमति एवं स्थायी निर्णय नहीं – मृतक परिवार की सहमति अनिवार्य है।
- ब्लड मनी भुगतान:
- वर्तमान में चर्चा का केंद्र; राशि और पारिवारिक स्वीकृति अभी अटकी हुई है ।
- फंसी बनाम रिहाई:
- मृतक परिवार फांसी चाहता है—बिना क्षमा—जहां दया मानवता से जुड़ी है, वही न्याय कानून से जुड़ा है ।
- धार्मिक और राजनयिक भूमिका:
- कांतापुरम मुसलियार और शेख हबीब ओमर मध्यस्थता में सक्रिय; भारतीय सरकार ने ‘गुप्त’ अथवा अनौपचारिक कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा दिया ।
निष्कर्ष
- यह जटिल अंतर्राष्ट्रीय–अधिकार–न्याय का मामला है, जिसमें
फांसी–स्यायत–ब्लड मनी तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। - मृतक परिवार फांसी चाहता है, सरकार तथा समर्थक ‘ब्लड मनी’ समझौते की राह तलाश रहे हैं।
- धार्मिक हस्तक्षेप और रुके समझौतों की गणना के बावजूद, आपसी सहमति ही भविष्य तय करेगी।
आगे की संभावनाएं:
- मृतक परिवार की सहमति—‘ब्लड मनी’ को मानना—तो संभव है निमिषा को यमन की जेल से रिहा किया जाए।
- अगर परिवार फांसी पर अड़ा रहता है—तो यमन प्रशासन अपने कानून के मुताबिक आगे कदम उठा सकता है, जिसमें भारत की कोई कूटनीतिक शक्ति काम नहीं कर सकती।
















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