उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आश्रम में 15 जून को हर साल नीम करोली बाबा का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस खास मौके पर देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां बाबा के दर्शन करने आते हैं। लेकिन इस बार जो बात सबसे ज़्यादा चर्चा में रही, वो हैं दो ऐसे भक्त जो अपनी गहरी श्रद्धा के साथ सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर कैंची धाम पहुंचे।
राजस्थान से पैदल चले सुरेश बिश्नोई

राजस्थान के सांचौर से आने वाले सुरेश बिश्नोई, एक स्कूल शिक्षक हैं और बाबा के परम भक्त हैं। उन्होंने 17 मई को स्कूल की छुट्टियों के बाद अपनी यात्रा शुरू की और 1,500 किलोमीटर से भी ज़्यादा पैदल चलकर कैंची धाम पहुंचे। सबसे खास बात ये रही कि उन्होंने पूरे सफर में अन्न नहीं खाया। सिर्फ फल खाए और तरल चीजें पीकर यात्रा पूरी की। ये उनकी भक्ति और समर्पण का एक बड़ा उदाहरण है।
दिल्ली से आए प्रकाश सियोता और उनका बेटा

दिल्ली के प्रकाश सियोता और उनके छोटे बेटे ने भी बाबा की भक्ति में बड़ी मिसाल पेश की। दोनों ने भी कई सौ किलोमीटर पैदल चलकर कैंची धाम की यात्रा पूरी की। यह दिखाता है कि आस्था में जब दृढ़ निश्चय हो, तो कोई रास्ता लंबा नहीं लगता।
क्यों खास है कैंची धाम?

नीम करोली बाबा का कैंची धाम आश्रम एक पवित्र स्थान माना जाता है। हर साल 15 जून को इसका स्थापना दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लाखों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेने देश के कोने-कोने से यहां आते हैं। बाबा के भक्तों में आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े बिज़नेस लीडर और विदेशी हस्तियां भी शामिल हैं।
निष्कर्ष
सुरेश बिश्नोई और प्रकाश सियोता जैसे भक्त यह साबित करते हैं कि सच्ची श्रद्धा में ना थकान होती है, ना दूरी मायने रखती है। इनकी भक्ति न सिर्फ लोगों को प्रेरित करती है, बल्कि यह दिखाती है कि आस्था जब दिल से हो, तो हर मंज़िल आसान हो जाती है।
















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