परिचय: एक नक्शे ने क्यों भड़काई राजनीति?
हाल में NCERT द्वारा जारी कक्षा-8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “Exploring Society: India and Beyond” में प्रकाशित एक नक्शे ने इतिहास और पहचान की जटिल दुश्वारियों को फिर से उजागर कर दिया। इस नक्शे में 18वीं सदी के दौरान राजस्थान की कई पूर्व राजपूताना रियासतों (जैसे जैसलमेर, बूँदी, मेवाड़ आदि) को मराठा साम्राज्य के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है, जिसके बल पर व्यापक विरोध शुरू हो गया।
विवाद का केंद्रबिंदु: इतिहास या इतिहास की व्याख्या?
— राजपूताना की प्रतिष्ठा पर चोट
जैसलमेर के महारावल, चैतन्य राज सिंह भाटी ने सोशल मीडिया (X) पर इस नक्शे को “इतिहासगत रूप से भ्रामक, तथ्यात्मक रूप से निराधार और अत्यंत आपत्तिजनक” बताया। उनका कहना था कि जैसलमेर पर मराठाओं का कोई आधिपत्य, आक्रमण या कर वसूली का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है, और यह नक्शा उनकी विरासत का अपमान है।
बुंद-बीकानेर, मेवाड़, अलवर आदि रियासतों के वारिसों ने भी इस नक्शे को इतिहास विकृति और राजनीतिक एजेंडा से प्रेरित करार दिया। ब्रिगेडियर भूपेश सिंह हाडा (बुंदी के पूर्व राजपरिवार), महिमा कुमारी मेवाड़, और जितेंद्र सिंह (अलवर) ने NCERT को मामले में हस्तक्षेप की अपील की।
— मराठा इतिहास का पक्ष
वहीं, मराठा इतिहासकारों ने भी इस नक्शे का बचाव किया। उनका कहना है कि सीधे शासन का अर्थ ज़रूरी नहीं; कई रियासतें वसूली, सामμάτων या संधियों के ज़रिए मराठाओं को राजस्व और सियासी स्वीकृति देती थीं। हिस्टोरियन पांडुरंग बालकवाडे और Scindia Research Centre ने 1752 के अहमदनामा (Ahadnama) जैसे दस्तावेजों का हवाला दिया, जिसमें मराठाओं को मुग़ल क्षेत्रीय रियासतों में कर वसूली का अधिकार मिला था। इसी आधार पर, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में सीमाओं का विस्तार दिखाया गया है।
स्थिति को और तेज करता विरोध
जयपुर में युवा संगठन युवा शक्ति संयोजन ने सड़क पर उतरकर राजपूताना इतिहास पर इस नक्शा को “इतिहास विकृति” करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामूली सुधार नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसका राजनीतिक असर आगामी स्थानीय चुनावों में हो सकता है।
NCERT का रुख: कहना तो खुले लेकिन कार्रवाई नियमानुसार
NCERT के सामाजिक विज्ञान खंड प्रमुख माइकल डैनिनो ने India Today से कहा कि यह नक्शा अध्ययन-स्रोतों पर आधारित तैयार किया गया है और यदि इसमें कोई त्रुटि मिलेगी, तो संशोधन की ज़रूरत स्वीकार की जाएगी। लेकिन इसके लिए पहले शोध और सत्यापन जरूरी है। डैनिनो के अनुसार सीमाओं की स्पष्टता जरूरी है—कि कौन सीधे नियंत्रित क्षेत्र थे और किसके बीच केवल संधि आधारित प्रोटोकोल था। इससे साफ स्पष्ट होगा कि इतिहास को साधारण रूप से राजनैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए।
जांच की मांग—NCERT ने की समिति गठन
विरोध तेज होने पर NCERT ने एक विशेषज्ञ समिति बनाई, जिसका नेतृत्व डॉ. रंजना आर्य कर रही हैं। समिति पाठ्यपुस्तक सामग्री और नक्शे की समीक्षा करेगी और आवश्यकतानुसार भविष्य के संस्करण के लिए संशोधित नक्शा तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
ऐतिहासिक और शैक्षणिक संदर्भ
- मराठा साम्राज्य ने 1674–1818 के बीच उत्तरी सीमाओं में दिल्ली, पंजाब और दुबारा मुग़लों पर प्रभाव स्थापित किया।
- राजस्थान के राजपूत रियासतों ने अधिकांश काल में अपनी स्वायत्तता बनाए रखी। पर कुछ हिस्सों में मराठाओं का प्रभाव वसूल या संधि आधारित था।
- पिछले वर्षों में NCERT पाठ्यपुस्तकों को विभिन्न राजनीतिक एजेंडों के तहत इतिहास की व्याख्याओं के लिए आलोचना झेलनी पड़ी है (“सैफ्रोनाइजेशन”, इतिहास निरूपण में पक्षपात)
सारांश: इतिहास बनाम व्याख्या
यह विवाद केवल एक नक्शे का नहीं, बल्कि इतिहास की व्याख्या और पहचान की गहराई का है—राज्य-व्यवस्था, विरासत, संदर्भ, सूचना स्रोत, और प्रतिष्ठा पर आधारित। पाठ्यक्रियाएँ जब राष्ट्रीय पाठ्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी संभालें, तो उन्हें व्यापक, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित होना चाहिए।















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