दिल्ली में सरकार बदलने के बाद कई इलाकों के नाम बदलने की मांग उठने लगी है। बीजेपी के कुछ विधायकों का तर्क है कि पुराने नाम गुलामी की याद दिलाते हैं, इसलिए इन्हें बदला जाना चाहिए। वहीं, आम आदमी पार्टी इसे सिर्फ एक राजनीतिक एजेंडा करार दे रही है। इस मुद्दे को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है।
दिल्ली विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने कुछ इलाकों के नाम बदलने का प्रस्ताव रखा। पहले मुस्तफाबाद का नाम बदलने की मांग हुई थी और अब नजफगढ़ और मोहम्मदपुर के नाम बदलने की बातें हो रही हैं। नजफगढ़ को नाहरगढ़ और मोहम्मदपुर को माधवपुरम करने की मांग की जा रही है।
बीजेपी का मानना है कि नजफगढ़ का नाम मुगल सूबेदार नजफ खान के नाम पर रखा गया था, जिसे अब हटाकर राजा नाहर सिंह के नाम पर किया जाना चाहिए। विधायक अनिल शर्मा के मुताबिक, मोहम्मदपुर गांव के लोग लंबे समय से नाम बदलने की मांग कर रहे हैं। मुस्तफाबाद को लेकर भी बीजेपी विधायकों का कहना है कि यहां 60% हिंदू आबादी है, इसलिए इसका नाम शिवपुरी या शिवविहार कर देना चाहिए।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी का कहना है कि सरकार नाम बदलने में व्यस्त है और असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार को बिजली, पानी और रोजगार जैसे बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए, न कि नाम बदलने पर।
पूर्व वार्ड पार्षद भगत सिंह टोकस ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उनका कहना है कि 2021 में एमसीडी ने मोहम्मदपुर का नाम बदलने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
लोगों की राय भी बंटी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि नाम बदलने से ऐतिहासिक गलतियों को सुधारा जा सकता है, जबकि कई लोगों का कहना है कि इससे कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। जनता चाहती है कि सरकार विकास कार्यों पर ध्यान दे, मुफ्त बिजली और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं को प्राथमिकता दे।
नाम बदलने का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है, जिससे दिल्ली में सियासी तापमान और बढ़ सकता है।













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