MVA vs Mahayuti: देशभर में खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस बार सबसे ज्यादा निगाहें महाराष्ट्र पर टिकी हैं। यहां सात सीटों पर चुनाव होना है, जिससे सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प बन गया है।
राज्य से जिन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, विपक्ष की ओर से शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नाम शामिल हैं। ऐसे में ये सभी दोबारा उच्च सदन में जगह बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन मौजूदा विधानसभा गणित उनके लिए राह आसान नहीं बना रहा।
महायुति को बढ़त, विपक्ष के लिए संघर्ष
वर्तमान संख्या बल को देखें तो सात में से लगभग पांच सीटों पर सत्ताधारी गठबंधन महायुति मजबूत स्थिति में दिख रहा है। वहीं बाकी दो सीटों के लिए विपक्षी मोर्चा महाविकास आघाड़ी के भीतर भी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
विपक्षी दलों में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी में हैं, जिससे सीट बंटवारे को लेकर आंतरिक खींचतान भी संभव है।

चुनाव प्रक्रिया और रणनीति
चुनाव आयोग ने 37 रिक्त पदों को भरने के लिए मतदान की तारीख तय कर दी है। इन चुनावों में आम मतदाता सीधे भाग नहीं लेते, बल्कि संबंधित राज्यों के विधायक वोट डालते हैं। इसलिए विधायकों की संख्या और गठबंधन समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
अगर कोई गठबंधन अपनी क्षमता से अधिक उम्मीदवार उतारता है, तो क्रॉस वोटिंग की स्थिति बन सकती है, जो परिणाम बदलने में अहम साबित हो सकती है। महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं, इसलिए इस बार भी रणनीतिक मतदान चर्चा में है।
विधानसभा का अंकगणित क्या कहता है
राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास सबसे ज्यादा विधायक हैं। इसके साथ एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी धड़ा जुड़ा हुआ है। इन तीनों की संयुक्त ताकत महायुति को स्पष्ट बढ़त देती है।
दूसरी ओर, विपक्षी मोर्चे में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी शामिल है, जिनकी कुल संख्या अपेक्षाकृत कम है। यही कारण है कि विपक्ष को सीटें निकालने के लिए अतिरिक्त रणनीति बनानी पड़ सकती है।
विधानपरिषद भी अहम
महाराष्ट्र की विधानपरिषद में भी दलों की स्थिति सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में झुकी हुई है। ऐसे में ऊपरी सदन के चुनाव में छोटे दलों, निर्दलीय विधायकों और असंतुष्ट सदस्यों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
संभावित चेहरे और राजनीतिक संदेश
संभावना है कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल नए और पुराने चेहरों का संतुलन बनाकर उम्मीदवार उतारें। वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का मौका भी होगा। शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नेताओं की वापसी विपक्ष की प्राथमिकता मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, सात सीटों के इस मुकाबले में अंकगणित के साथ-साथ रणनीति और जोड़-तोड़ भी अहम होगी। नतीजे न सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति बल्कि राज्यसभा में शक्ति संतुलन पर भी असर डालेंगे।














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