उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के बिथरी चैनपुर क्षेत्र स्थित रामायण वाटिका में एक मुस्लिम युवक की एंट्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामला उस समय सुर्खियों में आ गया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस विषय को लेकर दोनों समुदायों के लोगों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब करणी सेना युवा जिला उपाध्यक्ष ठाकुर अरुण चौहान ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने उस युवक की पहचान जाहिर करते हुए सवाल उठाया कि जब वह युवक हिंदू धर्म को नहीं मानता, तो फिर धार्मिक स्थल जैसे रामायण वाटिका में क्यों आया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वह युवक वहां मौजूद हिंदू लड़कियों की फोटो और वीडियो बना रहा था और उनसे दोस्ती करने की कोशिश कर रहा था, जिसे उन्होंने “लव जिहाद” की साजिश करार दिया।
रामायण वाटिका में एंट्री बैन की मांग

अरुण चौहान ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे लोगों की रामायण वाटिका में एंट्री पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि धार्मिक भावनाएं आहत न हों।
वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले अली रजवी ने भी एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “सिर्फ किसी की टोपी देखकर यह कैसे तय किया जा सकता है कि वह गलत इरादे से आया है? क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं? हमें भी हर सार्वजनिक स्थान पर जाने का उतना ही हक है, जितना किसी और को है।”
सोशल मीडिया पर गरमाई बहस
अली रजवी ने इस मामले में बरेली पुलिस, यूपी पुलिस और एडीजी जोन को टैग करते हुए भेदभाव की शिकायत की और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच बरेली पुलिस ने भी एक्स पर जवाब देते हुए कहा कि बिथरी चैनपुर थाना प्रभारी को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बहस हो रही है। कुछ लोग अरुण चौहान के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कई इसे धार्मिक भेदभाव करार दे रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थल पर किसी भी धर्म के व्यक्ति को केवल उसके धर्म या पहनावे के आधार पर रोकना असंवैधानिक है, जब तक वह कोई गैरकानूनी गतिविधि न कर रहा हो।














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