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मुंबई की कबूतरखाने बहस: 51 स्थल बंद, दाना खिलाना पूर्णतः प्रतिबंधित, FIR से लेकर विरोध मार्च तक

Mumbai's pigeon house debate: 51 places closed, feeding pigeons completely banned, from FIR to protest march

मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा शहर के 51 कबूतरखानाओं को बंद करने और सार्वजनिक रूप से कबूतरों को दाना खिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित किए जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद BMC ने दाना खिलानेवालों पर जुर्माना, FIR और सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खासकर प्राचीन दादर कबूतरखाना पर विशेष कार्रवाई की गई है, जहां अब तक 100 से अधिक लोगों का चालान काटा गया है।


कानून और आदेश का परिदृश्य

➤ महाराष्ट्र सरकार की बंदी आदेश

  • 3 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने आदेश दिया कि मुंबई में सभी 51 कबूतरखानाएँ बंद की जाएँ, क्योंकि उनका संचालन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। साँस संबंधी बीमारियों और सफाई–निर्मलता संबंधी चिंताओं के कारण यह कार्रवाई की गई।

➤ बॉम्बे हाई कोर्ट की अंतरिम सुनवाई

  • 30 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने की अनुमति दी और कहा कि जो लोग कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज करके सार्वजनिक रूप से कबूतरों को दाना देंगे, उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई और आपराधिक शिकायत दर्ज की जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने साफ कहा कि नदियों के रूप में कबूतरों का मजमा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण खतरा बन चुका है।
  • हालांकि कोर्ट ने तत्काल कबूतरखानों को तोड़ने से रोक भी लगाई, लेकिन संरक्षित रूप से उन्हें सील करने की मंजूरी दी गई ताकि लोग वहाँ पर आकर दाना न डाल सकें।

BMC की कार्रवाई: कबूतरखानों की सीलिंग और जुर्माना

  • BMC ने 51 कबूतरखानों को completely sealed कर दिया—विशेष रूप से दादर का Grade‑II heritage Kabutarkhana को प्लास्टिक शीट्स और बाँस से ढंक कर बंद कर दिया गया।
  • दादर में BMC ने 4 और 6 जुलाई को 50 बैग (प्रत्येक 50 कि.ग्रा.) अनाज जब्त किया, जबकि नियमित आपूर्तिकर्ताओं को नोटिस जारी किया गया।
  • 3–12 जुलाई 2025 के बीच, 107 लोगों पर ₹500 का जुर्माना लगाया गया — कुल ₹55,700 राशि वसूलिय गई। सबसे अधिक उल्लंघन दादर में दर्ज हुआ, वहीं गोरेगाँव और बांगुर नगर क्षेत्रों में भी कार्रवाई हुई।

FIR दर्ज: पहला आपराधिक मामला

  • बॉम्बे HC के आदेश के दो दिन बाद, महिम थाना ने पहली FIR आंदोलनकारी लोगों के खिलाफ दर्ज की, जो एल जे रोड स्थित कबूतरखाने में बैलेंस नहीं मानते हुए दाना डाल रहे थे।
  • FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 223 (order disobedience), 270 (जन स्वास्थ्य को जोखिम), और 271 (संक्रामक रोग फैलने वाला उपेक्षित कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया।

स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय खतरे

  • HC और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया कि कबूतरों की बढ़ती संख्या और उनके droppings के लगातार संचय से respiratory infections, hypersensitivity pneumonitis, histoplasmosis, और cryptococcosis जैसी खतरनाक बीमारियाँ अस्पतालों में सामने आई हैं।
  • 또한 कबूतरों के droppings की अम्लीय प्रकृति से पुरावशेष जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और अन्य heritage संरचनाओं में भरण-भंग की समस्या बढ़ी है।

सांस्कृतिक विरोध और नागरिक भूख हड़ताल

  • 3 अगस्त 2025 को 1,000 से भी अधिक नागरिक, जिनमें कई जैन धार्मिक नेता शामिल थे, कोलाबा जैन मंदिर से गेटवे ऑफ इंडिया तक शांति यात्रा निकाली।
  • जैन मुनि नरेशचंद्र जी महाराज ने 10 अगस्त से अनशन शुरू करने की चेतावनी दी यदि कबूतरों को दाना खिलाना फिर से शुरू नहीं किया गया।
  • activists जैसे Sneha Visaria और Mitesh Jain ने कहा कि यह प्रतिबंध नैतिक और संवैधानिक रूप से गलत है, क्योंकि संविधान की अनुच्छेद 51(A)(g) के तहत सभी प्राणियों के प्रति दया दिखाना नागरिक कर्तव्य है।

कबूतरखानों का इतिहास

  • “Kabutarkhana” की शुरुआत मुंबई में 1930 के दशक में हुई, खासकर Dadar Kabutarkhana का निर्माण 1933 में हुआ था। यह जेयन समुदाय तथा अन्य धार्मिक समूहों द्वारा संचालित पारंपरिक feeding स्थल था।
  • यह स्थान संस्कृति और heritage का हिस्सा बन गया था, जहाँ हर रोज हज़ारों कबूतर भूखे दाना मिलने पर इकट्ठे होते थे।

विवाद के दो पहलू: स्वास्थ्य बनाम धार्मिक भावनाएं

✅ सार्वजनिक स्वास्थ्य का पक्ष

  • कृषि एवं स्वास्थ्य बहसों ने स्पष्ट किया कि कबूतरों की droppings से संक्रमण फैलता है, विशेषकर गीली छतों, narrowed footpaths, और public gathering spots में।
  • मानव स्वास्थ्य रिपोर्टों में Asma, lung fibrosis और hypersensitivity जैसे गंभीर रोग जुड़े पाए गए हैं।

❤️ धार्मिक और सांस्कृतिक भावना

  • जैन समुदाय के लिए यह feeding act एक पुण्य और अनुष्ठान है, जिसे बंद करना धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन माना गया।
  • ऐसे समुदायों ने अदालत में चुनौती भी दी है कि BMC की कार्रवाई अवैज्ञानिक और संवैधानिक भावना के विरुद्ध है।

प्रशासनिक कार्यवाही का विश्लेषण

  • BMC ने कानून के तहत health code, heritage संरक्षा, sanitation नियम, और public nuisance विधानों के मुताबिक कार्रवाई की।
  • पहले महिम में FIR, फिर CCTV surveillance और vigilance teams तैनात की गईं। tribunal और मीडिया में BMC को समर्थकों ने ‘सुरक्षा बिन्दु’ पर सही कदम बताया।

आगे की घटनाक्रम और सुनवाई

  • 7 अगस्त 2025 को बॉम्बे HC ने अगली सुनवाई रखी है, जिसमें KEM हॉस्पिटल के pulmonary विभाग प्रमुख सहित अन्य एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
  • BMC को अगले चार सप्ताह में सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करनी है और स्वास्थ्य प्रमाण, enforcement रिपोर्ट शामिल करनी है।
  • citizen groups योजना बना रहे हैं कि अगर बैन वापस नहीं लिया गया, तो constitutional petition दायर करेंगे — citing Article 51A(g) and PCA Act।

मुख्य सारांश

पहलूविवरण
कुल कबूतरखाने51 स्थानों को बंद
प्रमुख स्थलदादर (Grade-II heritage)
FIR और जुर्माना107 लोगों को ₹500 चालान, FIR दर्ज
स्वास्थ्य जोखिमPigeon droppings से lung diseases & hygiene hazards
कानूनी आदेशBombay HC और Maharashtra सरकार द्वारा प्रतिबंध
सामाजिक प्रतिक्रियाJain community शर्मा; protest march & hunger strike
भविष्य का रुखअगली सुनवाई, scientific evidence औऱ community dialogue जरूरी

निष्कर्ष: समाधान की सीमा कौन तय करेगा?

मुंबई में कबूतरखाना बंदी और feeding ban की कहानी सिर्फ वडा‑घंटों की कार्रवाई नहीं—यह यह बताती है कि कैसे एक शहरवाद, धर्म, स्वास्थ्य, कानून, और पहचान की कसौटी पर एक सामान्य क्रिया—पक्षियों को दाना—चढ़ सकती है।

स्वास्थ्य और साफ-सफाई का पक्ष उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि संवेदनशील धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं की रक्षा। शहर के भविष्य में ऐसे मुद्दों पर निर्णायक सामंजस्य बनाना चाहिए।

Mumbai की यह चुनौती बताती है कि modern urban governance में संवेदनशीलता, वैज्ञानिक प्रमाण, न्यायालयीन आदेश, और सार्वजनिक संवाद—इन सबका सामंजस्य ही एक संतुलित नीति का हिस्सा होना चाहिए।


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