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MP News: सोशल स्टॉक एक्सचेंज से पहली बार जुटेगा फंड, विदेश में नौकरी के लिए युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

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MP News: मध्य प्रदेश में सामाजिक उद्देश्य से जुड़े एक प्रोजेक्ट के लिए पहली बार सोशल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए धन जुटाने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को विदेशों में रोजगार के लिए प्रशिक्षित करना है। इस योजना में नाबार्ड (NABARD) ने रुचि दिखाई है, जबकि नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) इसकी क्रियान्वयन एजेंसी होगी।

सूत्रों के अनुसार, नाबार्ड के अलावा कुछ अन्य संस्थानों ने भी सोशल स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से निवेश करने की इच्छा जताई है। हालांकि, शासन से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद ही फंड जुटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रदेश में पहला अवसर होगा, जब किसी सामाजिक महत्व की योजना के लिए इस प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों से राशि एकत्र की जाएगी। इससे पहले दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग सफल रहे हैं। इस पहल को युवाओं को वैश्विक रोजगार से जोड़ने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

जापान और जर्मनी के लिए 600 युवाओं को प्रशिक्षण

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की इस योजना के तहत प्रदेश के 600 युवाओं को जापान और जर्मनी में नौकरी के अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा। चयनित युवाओं को भोपाल स्थित ग्लोबल स्किल पार्क में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान हॉस्टल, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जल्द ही आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

नौकरी मिलने पर ही शुल्क भुगतान

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योजना की खास बात यह है कि सरकार प्रशिक्षण शुल्क तभी देगी, जब संबंधित युवा को विदेश में नौकरी मिल जाएगी। प्रति युवा एक लाख से सवा लाख रुपये तक NSDC को दिए जाएंगे। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 15 प्रतिशत राशि सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड से, 15 प्रतिशत लाभार्थियों के अंशदान से और शेष राशि NSDC द्वारा जुटाई जाएगी।

चयन और पात्रता

युवाओं का चयन रजिस्ट्रेशन के बाद मेरिट के आधार पर होगा। 12वीं पास और आईटीआई उत्तीर्ण ओबीसी व अल्पसंख्यक वर्ग के युवा पात्र होंगे। उन्हें नर्सिंग, सिविल कंस्ट्रक्शन, एग्रीकल्चर, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। जापान के लिए 6 माह और जर्मनी के लिए 9 माह का प्रशिक्षण तय है, जिसमें भाषा, कार्यसंस्कृति और सामाजिक परिवेश की जानकारी भी शामिल होगी।

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