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Mayawati BSP Meeting: बसपा को उभारने का मायावती का सीक्रेट प्लान: अखिलेश के ‘PDA’ में सेंधमारी, BJP का गेम भी बिगाड़ने की तैयारी

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उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पिछले 13 सालों से सत्ता से बाहर है और पार्टी का सियासी आधार चुनाव दर चुनाव कमजोर होता जा रहा है। लेकिन अब बसपा प्रमुख मायावती आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पुरानी ताकत को वापस लाने की कवायद में जुटी हैं। मायावती पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने और नए समीकरण बनाने के लिए खामोशी से काम कर रही हैं।

ओबीसी को जोड़ने की नई रणनीति: बसपा का मिशन-2027

मायावती ने मंगलवार को प्रदेश नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें पहली बार ओबीसी नेताओं को भी बुलाया गया। इस बैठक का उद्देश्य ओबीसी समाज को बसपा से जोड़ने की रणनीति तैयार करना था। मायावती ने इस बैठक में बसपा के खिसके हुए जनाधार को वापस लाने और 2027 में सत्ता की वापसी का खाका तैयार करने की योजना बनाई। इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में खास चर्चा हो रही है क्योंकि यह बसपा के पुराने ‘बहुजन समाज’ के फार्मूले को दोबारा लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है।

सपा के पीडीए में सेंधमारी का प्लान

मायावती की नजर सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोटबैंक पर है। अखिलेश यादव के 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए फार्मूला ने सफलता हासिल की थी, जिसमें सपा ने 37 सीटें जीती थीं। मायावती अब उसी वोटबैंक में सेंधमारी की योजना बना रही हैं। उनके अनुसार ओबीसी और दलित समुदाय को एक साथ जोड़कर वह सपा के वोटबैंक में सेंधमारी करना चाहती हैं, ताकि बसपा की स्थिति को पुनः मजबूत किया जा सके।

बीजेपी के गेम में खलल डालने की तैयारी

यूपी में ओबीसी समुदाय का सबसे बड़ा वोटबैंक है, और यही वोटबैंक सत्ता बनाने और बिगाड़ने में सक्षम है। मायावती बखूबी समझ रही हैं कि केवल दलित वोटों के सहारे सत्ता में वापसी नहीं हो सकती। इसलिए उन्होंने ओबीसी जातियों को जोड़ने की रणनीति बनाई है, जो 2014 में बीजेपी का कोर वोटबैंक बन गए थे। बसपा की यह रणनीति बीजेपी के वोटबैंक में सेंधमारी करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

भाईचारा कमेटी का पुनर्निर्माण

बसपा ने 13 साल बाद भाईचारा कमेटी को फिर से गठित करने का फैसला किया है। इस कमेटी में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), ओबीसी और मुस्लिमों को शामिल किया गया है। भविष्य में ब्राह्मण और अन्य जातियों को भी इसमें जोड़ने की योजना बनाई गई है। 2007 में मायावती ने इस फॉर्मूले के जरिए दलित और ओबीसी के साथ ब्राह्मण समाज को जोड़कर सियासी ताकत बनाई थी, और अब वह उसी मॉडल पर काम कर रही हैं।

जिला स्तर पर नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति

मायावती ने संगठन को और भी मजबूत करने के लिए हर जिले में नए जिला अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। इनमें से कई युवा नेता हैं, जिनकी उम्र 40 साल से कम है। जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद पार्टी बूथ और सेक्टर कमेटियों का गठन भी कर रही है, जिससे पार्टी की जड़ें फिर से मजबूत हो सकें।

चंदा लेने की परंपरा का अंत

मायावती ने पार्टी की कैडर बैठक में यह आदेश दिया कि अब पार्टी कार्यकर्ताओं से चंदा नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकांश समर्थक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, इसलिए चंदा लेने की परंपरा को समाप्त कर दिया गया है। अगर कोई स्वेच्छा से पार्टी में योगदान करना चाहता है, तो यह स्वीकार किया जाएगा, लेकिन कोई अनिवार्यता नहीं होगी।

2027 चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन

मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 200 कमजोर सीटों पर प्रभारी नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इन सीटों पर पहले से ही उम्मीदवारों को चयनित किया जाएगा ताकि चुनावी तैयारी में कोई कमी न हो।

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