तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास स्थित पाशमायलारम औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार, 30 जून 2025 को सुबह सिगाची इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड नामक फार्मास्युटिकल कंपनी में भीषण विस्फोट हुआ। यह धमाका इतना भयानक था कि फैक्ट्री की इमारत का एक बड़ा हिस्सा, विशेष रूप से वह सेक्शन जहां रिएक्टर स्थापित था, पूरी तरह ढह गया। इस हादसे में अब तक 37 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है, जिससे मौतों की संख्या में और इज़ाफा होने की आशंका जताई जा रही है।
धमाके का कारण और प्रारंभिक जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे जब फैक्ट्री में रोज़ की तरह काम चल रहा था, तभी अचानक एक ज़ोरदार धमाका हुआ। बताया जा रहा है कि यह धमाका फैक्ट्री में स्थित एक रिएक्टर में हुए अत्यधिक दबाव (pressure build-up) के चलते हुआ, जिससे पूरा रिएक्टर यूनिट ध्वस्त हो गया। कई मज़दूर उस समय अंदर काम कर रहे थे और इमारत के मलबे के नीचे दब गए।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के औद्योगिक यूनिट्स और मकानों की खिड़कियां भी टूट गईं। लोगों ने बताया कि धमाके की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।
मृतकों की संख्या और पहचान
अब तक 37 मजदूरों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। हालांकि, केवल चार शवों की ही पहचान हो पाई है, बाकी शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। इस कार्य के लिए स्पेशल फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है, जो डीएनए सैंपल्स के ज़रिए मृतकों की पहचान कर रही है।
सरकार का मुआवज़ा और संवेदना
तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार, 1 जुलाई 2025 को घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायज़ा लिया। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री सी. दामोदर राजा नरसिम्हा, श्रम मंत्री विवेक वेंकटस्वामी, आईटी और उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू, तथा राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि विस्फोट में मारे गए मज़दूरों के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवज़ा दिया जाएगा, जबकि घायलों को ₹10 लाख की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जाए और मृतकों की पहचान का काम प्राथमिकता पर किया जाए।
राहत एवं बचाव कार्य
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। अब तक 15 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, ताकि और शवों को निकाला जा सके।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है और विस्फोट के सटीक कारणों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिएक्टर में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी और अत्यधिक दबाव ही संभवतः इस विस्फोट का कारण बना।
फैक्ट्री संचालन पर विराम
सिगाची इंडस्ट्रीज़, जो माइक्रोक्रिस्टलाइन सेल्यूलोज़ (MCC) जैसे फार्मास्युटिकल कंपोनेंट्स के निर्माण में अग्रणी मानी जाती है, ने एक बयान में कहा है कि इस हादसे में उनका मुख्य उत्पादन इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट हो गया है। कंपनी ने फैक्ट्री के संचालन को फिलहाल अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों में डर
फैक्ट्री में काम करने वाले बचे हुए कर्मचारियों और पास के क्षेत्रों के लोगों में इस हादसे को लेकर गहरी दहशत है। कर्मचारियों ने बताया कि सुरक्षा मानकों को लेकर फैक्ट्री में पहले से ही लापरवाही बरती जा रही थी। कई मजदूरों ने दावा किया कि मशीनों की नियमित जांच नहीं की जाती थी और पुराने उपकरणों का उपयोग किया जा रहा था।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस हादसे ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फैक्ट्री में रिएक्टर के दबाव नियंत्रण के लिए उचित अलार्म सिस्टम होता और नियमित निरीक्षण किया गया होता, तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता। राज्य सरकार ने भी इस बात पर गंभीरता दिखाई है और अन्य सभी केमिकल कंपनियों की जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य भर में स्थित फार्मा और केमिकल फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
तेलंगाना के पाशमायलारम में हुआ यह भीषण विस्फोट न केवल मज़दूरों की ज़िंदगियों का अंत लेकर आया, बल्कि यह उन सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए चेतावनी भी है, जो सुरक्षा को लेकर लापरवाह रवैया अपनाती हैं। सस्ती लागत और तेज़ उत्पादन की होड़ में मजदूरों की ज़िंदगी को दांव पर लगाना कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है।
अब जरूरत है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों मिलकर औद्योगिक सुरक्षा मानकों को और सख्त करें और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित करें। वहीं, पीड़ितों को न्याय और सहायता पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस घटना की जांच पूरी निष्पक्षता से की जाए और जिम्मेदार लोगों को कठोर सज़ा दी जाए — यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी उन 37 जानों को, जो रोज़ी-रोटी के लिए फैक्ट्री गए थे और लौटकर कभी नहीं आ सके।
















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