संगम का जल हुआ शुद्ध, अब आचमन और स्नान के योग्य
महाकुंभ के समापन के बाद प्रयागराज में गंगा और यमुना के संगम का जल फिर से आचमन और स्नान के योग्य हो गया है। भारत सरकार के सेंट्रल पोल्युशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दाखिल रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
CPCB की जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे

CPCB ने 28 फरवरी को एनजीटी में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसे 7 मार्च को सार्वजनिक किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, संगम के विभिन्न घाटों का जल सभी पर्यावरणीय मानकों पर खरा उतरा है और गंदगी का स्तर अधिकतम सीमा से भी कम पाया गया है।
संगम के जल की गुणवत्ता के आंकड़े
CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, संगम नोज पर लिए गए जल के नमूनों में:
- फीकल कॉलिफ़ॉर्म – 1700 (अधिकतम सीमा 2500)
- BOD (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) – 2.51 (अधिकतम सीमा 3)
- DO (डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन) – 8.5 (कम से कम 5 होना चाहिए)
- pH स्तर – 8.23 (आदर्श सीमा 6.5 से 8.5)
इसका मतलब यह है कि संगम का जल अब पूरी तरह से स्नान और आचमन के योग्य है।
अन्य स्थानों पर भी गंगा का जल शुद्ध
CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज में गंगा नदी के अन्य स्थानों पर भी जल की गुणवत्ता बेहतर हुई है। इनमें नागवासुकी मंदिर के समीप बहने वाली गंगा, सोमेश्वर घाट, कर्जन ब्रिज सहित अन्य 18 स्थानों का जल भी सभी मानकों पर खरा पाया गया है।
महाकुंभ के दौरान थी जल की खराब स्थिति
महाकुंभ के दौरान सीपीसीबी की एक रिपोर्ट में संगम के जल में फीकल कॉलिफ़ॉर्म की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई थी, जिससे सियासी विवाद भी खड़ा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, शास्त्री ब्रिज के पास संगम के समीप गंगा के जल में फीकल कॉलिफ़ॉर्म का स्तर 7900 तक पहुंच गया था, जो तय सीमा से तीन गुना अधिक था।
अब नई रिपोर्ट के अनुसार, महाकुंभ के बाद जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और संगम का पानी एक बार फिर आचमन और स्नान के योग्य हो गया है।















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