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Mahakumbh 2025: डीजीपी प्रशांत कुमार ने किया पुलिस प्रशासन का गौरवगान

dgp prashant kumar

65 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज महाकुंभ में आज महाशिवरात्रि के अवसर पर अंतिम स्नान के साथ ही यह भव्य आयोजन संपन्न हो गया। इस वर्ष महाकुंभ में रिकॉर्ड 65 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर आस्था की डुबकी लगाई। इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की विशेष भूमिका ने इस आयोजन को सकुशल संपन्न कराने में अहम योगदान दिया, जिस पर डीजीपी प्रशांत कुमार ने गर्व जताया।

तकनीक आधारित सुरक्षा मॉडल बना उदाहरण

Prayagraj: Devotees gather to take a holy dip at Sangam during ongoing Maha Kumbh Mela 2025, in Praygraj, Sunday, Feb. 23, 2925. (PTI Photo) (PTI02_23_2025_000133A)

डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि इतने बड़े आयोजन का ऐसा सुरक्षा और प्रबंधन मॉडल पहले कभी नहीं देखा गया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व और दिशा-निर्देश में यूपी पुलिस ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और पुलिसिंग में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। विश्वस्तरीय तकनीकों और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का प्रभावी इस्तेमाल किया गया, जिससे कुंभ की सुरक्षा को अभूतपूर्व सफलता मिली।

पुलिस प्रशासन की अनुकरणीय सेवा

डीजीपी ने पुलिस प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 45 दिनों में पुलिस बल ने बिना शस्त्र के अपने व्यवहार से श्रद्धालुओं का दिल जीता। अन्य संस्थाओं और एजेंसियों के सहयोग से पुलिस ने कुंभ को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाया। रेलवे और जीआरपी के साथ भी समन्वय शानदार रहा, जिससे यात्रा को सुगम बनाया जा सका।

अन्य धर्मस्थलों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

महाकुंभ के दौरान काशी विश्वनाथ, अयोध्या और विंध्यवासिनी देवी मंदिर में भी प्रतिदिन पांच से दस लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। इससे पुलिस प्रशासन की क्षमता का पूरी तरह से परीक्षण हुआ, जिसमें पुलिसबल पूरी तरह खरा उतरा। आज भी वाराणसी में शैव अखाड़ों के पांच अखाड़ों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर लिया, जबकि दो अखाड़े दोपहर बाद दर्शन करेंगे।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा रही प्राथमिकता

डीजीपी ने कहा कि हमारी पुलिस टीम दो महीने पहले से ही तैयारियों में जुटी थी। 30 हजार से अधिक खोए हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया। यह एक ऐसा मॉडल है, जिससे अन्य राज्य भी सीख सकते हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराना और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।

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