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Mahakumbh 2025: गंगा में प्रवाहित नारियल का क्या होता है? जानकर रह जाएंगे हैरान!

offering coconut in mahakumbh

लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे संगम नगरी

प्रयागराज में जारी महाकुंभ अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। अब तक 55.56 करोड़ से अधिक लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालु पूजा सामग्री, माता की चुनरी और नारियल गंगा में प्रवाहित करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन नारियलों का क्या होता है? घाटों के नाविक गोता लगाकर इन्हें निकाल लेते हैं और घाट पर मौजूद दुकानदारों को आधे दाम में बेच देते हैं। यही नारियल बार-बार पूजा में इस्तेमाल होता रहता है।

नदी में फेंके गए सिक्कों का भी उठाया जाता है फायदा

गंगा में श्रद्धालु सिक्के भी प्रवाहित करते हैं, जिन्हें नाविक चुंबक की मदद से निकाल लेते हैं और अपने पास रख लेते हैं। सिक्कों का तो व्यक्तिगत उपयोग होता है, लेकिन नारियल के दोबारा इस्तेमाल को श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ माना जा रहा है।

कुछ नारियल बह जाते हैं, कुछ कुचले जाते हैं

सभी नारियल इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनते। कुछ नदी में बह जाते हैं, तो कुछ स्नान कर रहे श्रद्धालुओं के पैरों तले कुचले जाते हैं। यही हाल माता की चुनरी और अन्य पूजा सामग्री का भी होता है। महाकुंभ में अब तक कुल 55.56 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। सिर्फ आज सुबह 10 बजे तक 49.02 लाख लोगों ने स्नान किया। महाकुंभ के समापन में 7 दिन बचे हैं, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या का नया रिकॉर्ड बन सकता है।

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