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लुधियाना वेस्ट बायपोल: AAP ने मारी बाज़ी, कांग्रेस में उठे सवाल

Ludhiana West Bypoll: AAP wins, questions raised in Congress

लुधियाना वेस्ट बायपोल का परिणाम 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक परिदृश्य को और भी रोचक बना चुका है। इस सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा ने कांग्रेस से हार चुके पूर्व मंत्री भरत भूषण आशु को 10,637 वोटों के विशाल अंतर से मात दी।

यह लगातार दूसरी हार है, क्योंकि वर्ष 2022 में भी आशु को AAP ने हराया था। नतीजे के बाद आशु ने कांग्रेस पंजाब के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।


हार के पीछे क्या कारण?

आशु ने हार का जिम्मा AAP की सत्ता का दुरुपयोग और उच्चाधिकार के प्रदर्शन पर डाला और कहा:

“सरकार की ताकत जीती है—उसके काम नहीं।”
“मैं पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ।”

उनके अनुसार, कांग्रेस का वोट शेयर 28% से गिरकर केवल 27.2% रह गया, जबकि AAP ने लगभग 39% वोट शेयर अपनी झोली में डाला। आशु ने यह भी जोड़ा कि विरोधी दलों में आंतरिक कलह लोगों की नजर में आ रही है ।


कांग्रेस में गहराता विभाजन

हार के बाद पंजाब कांग्रेस में चल रही आंतरिक गुटबाजी आगे खुलकर सामने आई। Simarjit Singh Bains ने आशु को “अहंकारी” बताया और यह आरोप लगाया कि आशु ने उन्हें नौटंकी के रूप में प्रयोग किया।

इस पर आशु ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“मैं उन्हें पार्टी का सदस्य भी नहीं मानता। उन्होंने नामांकन के बाद ही समर्थन छोड़ दिया।”

इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष Amrinder Singh Raja Warring और विपक्ष के नेता Partap Bajwa के आशु के प्रचार अभियान में न शामिल होने पर आशु ने कहा:

“अगर राज्य अध्यक्ष को न आमंत्रित करना पड़े, तो समझिए कि सोनचिरैया बैठ गई!”

आशु ने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने किसी को रोकने की कोशिश की और न ही कोई बाधा डाली ।


AAP की रणनीति और प्रदर्शन

AAP ने इस सीट को राज्य सरकार की मशीनरी से पार्टी की पारंपरिक एकाग्रता को साबित करते हुए स्वीकार करने में काफी जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे ‘प्यार बनाम घमंड’ की लड़ाई बताया और अपने सकारात्मक शासन मॉडल पर ज़ोर दिया ।

AAP ने संजीव अरोड़ा को फरवरी 2025 में पहले घोषित किया था, जिससे चुनाव प्रचार को मजबूत आधार मिला । वहीं बागड़पुरार भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने खास प्रभाव नहीं छोड़ा – BJP को एक चौथी पोजीशन पर सीमित रहने पर ही संतोष करना पड़ा ।


वोटर मनोविज्ञान: NOTA और उदेग

नौट-ऑफ-ऑप्शन (NOTA) ने 0.88% वोट प्राप्त किए और पिछले तीन चुनावों में लगातार इसी नतीजे को बनाए रखा। यह संकेत देता है कि एक निश्चित मतदाता वर्ग पूरा दर्जा बाहर ही दिखा।

वोट प्रतिशत में गिरावट (51.33% बनाम 64% वर्ष 2022 में) दर्शाती है कि मतदाता उदासीनता और चुनावी थकान भी कारक थीं।


चुनावी भविष्यवाणी: 2027 की राह

इस सीट का नतीजा AAP के लिए एक सकारात्मक संकेत है— मुख्यमंत्री मन ने इसे ‘मोरल बूस्टर’ बताया।

कांग्रेस ने “AAP ने सरकार की ताकत का इस्तेमाल किया” के आरोप लगाए , जबकि BJP ने AAP और कॉंग्रेस दोनों को टक्कर देने की तैयारी की घोषणा की ।


निष्कर्ष

  1. AAP उभरती सत्ता: राज्य सरकार की शक्ति का उपयोग, निवड क्षमता
  2. कांग्रेस की चुनौतियाँ: आंतरिक संघर्ष, नेतृत्व की अनुपस्थिति और संदेशों की अस्पष्टता
  3. मतदाता मनोविज्ञान: वोट प्रतिशत में गिरावट, पार्टी से अलग मत व्यवहार
  4. भविष्य की लड़ाई: BJP तैयार—AAP मजबूत—कांग्रेस को बड़ी लड़ाई की तैयारी करनी होगी

निष्कर्षस्वरूप, लुधियाना वेस्ट बायपोल पंजाब की आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की दिशा और प्रतिस्पर्धा के स्तर का पहला संकेतक साबित हुआ है।

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