कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप कांड: पीड़िता को शर्मिंदा करने वाला बयान और सत्ताधारी दल की ज़िम्मेदारी पर उठते सवाल
कोलकाता के साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह दर्दनाक घटना एक बार फिर राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता का विषय है सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी का वह बयान, जिसमें उन्होंने पीड़िता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि पीड़िता को शर्मिंदा करने वाला भी है।
घटना का विवरण
यह घटना बुधवार रात 7:30 बजे से 10:50 बजे के बीच की है। प्राथमिकी के मुताबिक, पीड़िता के साथ कॉलेज परिसर में ही गैंगरेप हुआ। अब तक पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक स्टाफ सदस्य है जो पहले इसी कॉलेज का छात्र रह चुका है और वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) का नेता है। यह तथ्य अपने आप में इस बात की ओर इशारा करता है कि अपराध में राजनीतिक सरंक्षण की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।
घटना की भयावहता तब और बढ़ जाती है जब यह सामने आता है कि यह मामला महज छह महीने पहले RG Kar मेडिकल कॉलेज में एक छात्रा के साथ हुए गैंगरेप और हत्या की भयावहता के बाद हुआ है। उस समय भी सरकार ने कड़ी कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत अब भी जस की तस है।
कल्याण बनर्जी का बयान: मानसिकता पर हमला या पीड़िता पर?
इस गंभीर मामले पर जब मीडिया ने तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा:
“जो महिलाएं ऐसे गंदे मानसिकता वाले लोगों के साथ घूम रही हैं, उन्हें समझना चाहिए कि वो किसके साथ हैं।”
यह बयान न केवल पीड़िता को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश है, बल्कि समाज में पहले से मौजूद विकृत सोच को और मज़बूत करता है, जिसमें अपराधी की बजाय महिला के कपड़े, चरित्र, या संगत को दोषी ठहराया जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि:
“न कानून, न पुलिस कुछ कर सकती है, जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी।”
बेशक यह बात सही है कि मानसिकता बदलना जरूरी है, लेकिन क्या एक जनप्रतिनिधि का काम सिर्फ उपदेश देना है? जब राज्य सरकार और पार्टी से जुड़े छात्र नेता ही ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो “मानसिकता” की बात करना अपने राजनीतिक दायित्वों से भागने जैसा नहीं है?
प्रशासनिक विफलता और जवाबदेही से भागती सरकार
बनर्जी ने यह भी कहा कि कॉलेज प्रशासन इस मामले में अगर दोषी है, तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि कॉलेज प्रशासन सरकार का हिस्सा नहीं है। यानी वो सरकार की भूमिका से अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस हर जगह महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर सकती। यह कथन भी अस्वीकार्य है, क्योंकि जब सरकार कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी से ही पीछे हटने लगे, तो जनता किससे उम्मीद रखे?
राजनीतिक संरक्षण और छात्र संगठन की भूमिका
गिरफ्तार आरोपियों में से एक तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) का सक्रिय नेता है। यह तथ्य न केवल राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे सत्ता से जुड़े छात्र संगठनों को कुछ कॉलेज परिसरों में अप्रत्यक्ष सुरक्षा कवच हासिल होता है।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब TMCP या अन्य राजनीतिक छात्र संगठनों के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हों। सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगा? या फिर सत्ता की चुप्पी इस संस्कृति को और बढ़ावा देगी?
महिला अधिकार संगठनों का विरोध
इस घटना और कल्याण बनर्जी के बयान पर कई महिला अधिकार संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया पर भी आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब एक सांसद ही पीड़िता को दोषी ठहराएंगे, तो समाज में बदलाव की उम्मीद कैसे की जाए?
कुछ संगठनों ने यह भी मांग की है कि सांसद को अपने बयान के लिए सार्वजनिक माफ़ी मांगनी चाहिए और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को स्पष्ट रूप से इस बयान से खुद को अलग करना चाहिए।
क्या है आगे की राह?
इस पूरे प्रकरण में सबसे जरूरी है कि राज्य सरकार इस मामले की तेजी से और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जाए, चाहे वे किसी भी राजनीतिक संगठन से जुड़े हों। साथ ही कॉलेज परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
इसके अलावा, सांसद कल्याण बनर्जी जैसे जनप्रतिनिधियों को भी यह समझना होगा कि उनका हर शब्द समाज पर असर डालता है। अगर वे पीड़ित को ही सवालों के घेरे में खड़ा करेंगे, तो अपराधियों को सामाजिक वैधता मिलती है।
निष्कर्ष
कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप कांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, यह प्रशासनिक विफलता, राजनीतिक संरक्षण और सामाजिक सोच की गिरावट का आईना है। कल्याण बनर्जी का बयान इस गिरावट को और गहराता है। ऐसे में ज़रूरत है सख्त कार्रवाई की, जवाबदेही की और संवेदनशील नेतृत्व की—ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक समाज मिल सके।
















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