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कोलकाता गैंगरेप केस: कानून के मंदिर में इंसानियत का चीरहरण, राजनीति में घमासान

Kolkata gang rape case: Humanity raped in the temple of law, political uproar

26 जून 2025 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने फिर से पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। कानून की पढ़ाई करने वाली एक 24 वर्षीय छात्रा के साथ, उसी के कॉलेज—साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज—के अंदर तीन युवकों ने गैंगरेप किया। यह घटना कास्बा इलाके में स्थित कॉलेज कैंपस के भीतर हुई, और इस शर्मनाक कांड के बाद राज्य की राजनीति में भी जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है।

घटना की पूरी जानकारी

पीड़िता लॉ की पहली वर्ष की छात्रा है, और पुलिस के अनुसार, उसके साथ तीन युवकों ने मिलकर कॉलेज परिसर में ही सामूहिक बलात्कार किया। तीनों आरोपी—मनोजित मिश्रा (31), जो कॉलेज का पूर्व छात्र है, और दो वर्तमान छात्र—जैब अहमद (19) और प्रमित मुखर्जी (20)—को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस द्वारा की गई मेडिकल जांच में यह पुष्टि हुई है कि पीड़िता के शरीर पर जबरदस्ती यौन संबंध बनाने, दांतों से काटने और नाखूनों से खरोंचने के निशान मिले हैं। मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि के बाद, तीनों आरोपियों को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

10 महीने पुरानी यादें ताज़ा

यह घटना बंगाल के लोगों को उस दर्दनाक घटना की याद दिला रही है, जो आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में लगभग 10 महीने पहले हुई थी। उस मामले में भी एक महिला के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में एक सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को दोषी पाया गया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। लेकिन अब सवाल उठ रहा है—क्या हम इन घटनाओं से कुछ सीख पा रहे हैं? शायद नहीं…

राजनीति में बवाल

इस घिनौनी वारदात के बाद बंगाल की सियासत में भी तूफान आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले में आरोपी के तार सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर आरोपी मनोजित मिश्रा की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और राज्य की स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के साथ नजर आ रहा है।

प्रदीप भंडारी ने कहा:

“एक बार फिर ममता बनर्जी की सरकार आरोपी के साथ खड़ी नज़र आ रही है।”

वहीं अमित मालवीय ने X (ट्विटर) पर लिखा:

“OUTRAGEOUS! मनोजित मिश्रा, जो गैंगरेप का मुख्य आरोपी है, उसका सीधा संबंध टीएमसी के सबसे ताकतवर लोगों से है। बंगाल महिलाओं के लिए अब डरावना सपना बन गया है।”

बीजेपी ने राज्य सरकार पर कवर-अप का भी आरोप लगाया और पूछा:

“ये चुप्पी क्यों है? आखिर किसे बचाने की कोशिश हो रही है?”

टीएमसी का पलटवार

बीजेपी के आरोपों का जवाब देने के लिए टीएमसी नेता शशि पांजा मीडिया के सामने आईं। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा कि बीजेपी इस दुखद हादसे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है।

शशि पांजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:

“घटना के 12 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, उनके मोबाइल फोन जब्त किए गए और पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। क्या बीजेपी शासित राज्यों में ऐसा त्वरित एक्शन देखा गया है?”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि:

“टीएमसी की छात्र इकाई कभी भी हिंसा को बढ़ावा नहीं देती। अगर बीजेपी को बंगाल में एक जिम्मेदार विपक्ष बनना है, तो उन्हें भी जिम्मेदारी से पेश आना होगा।”

असल सवाल

इस पूरे प्रकरण में कुछ बेहद जरूरी और असहज सवाल खड़े होते हैं:

  • कॉलेज कैंपस जैसी जगह, जो शिक्षा और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है, वहां ऐसा जघन्य अपराध कैसे हो सकता है?
  • क्या कॉलेज प्रशासन को किसी भी तरह की भनक नहीं लगी?
  • कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी क्यों विफल रहे?
  • क्या आरोपी का राजनीतिक संबंध होने पर कार्रवाई धीमी या प्रभावित होती है?
  • और सबसे अहम—क्या बेटियां अब पढ़ाई के लिए भी डर के साए में जाएंगी?

समाज और सिस्टम को झकझोरने वाली घटना

यह घटना सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं है—यह सामाजिक, नैतिक और राजनीतिक विफलता की तस्वीर है। यह वही राज्य है जहां महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पहले भी बड़े सवाल उठ चुके हैं। अब जब आरोपी के राजनीतिक संबंध सामने आए हैं, तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि सत्य सामने लाया जाए और दोषियों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के सजा मिले।

निष्कर्ष: कब बदलेगा सिस्टम?

जब तक समाज और सिस्टम में बुनियादी बदलाव नहीं होंगे, तब तक ऐसे अपराध रुकेंगे नहीं। सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी से बात नहीं बनेगी। ज़रूरत है एक ईमानदार, जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था की, जिसमें ना कोई आरोपी पार्टी के झंडे की आड़ ले सके और ना ही पीड़िता को इंसाफ के लिए संघर्ष करना पड़े।

इस मामले ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि महिला सुरक्षा अब भी सिर्फ नारेबाज़ी और घोषणाओं तक सीमित है।

हम आशा करते हैं कि पीड़िता को जल्द न्याय मिले, और वह दिन भी आए जब कॉलेज, स्कूल, सड़कें और घर—हर जगह एक महिला खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।

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