18 जून को दुबई और यरूशलम से रायटर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरे मध्य-पूर्व को तनाव की आग में झोंक दिया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बुधवार को देश की सरकारी मीडिया पर प्रसारित एक बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आत्मसमर्पण के आह्वान को स्वीकार नहीं करेगा, चाहे इसके लिए कोई भी दबाव या सैन्य हस्तक्षेप क्यों न हो।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल ने शुक्रवार को तेहरान पर बड़े पैमाने पर बमबारी की, और इसके बाद बुधवार को भी रात भर हमले जारी रखे। इजरायल की सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के 20 रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए, जो ईरान की मिसाइल निर्माण क्षमता से जुड़े थे। इनमें मिसाइलों के लिए कच्चा माल, पुर्जे और उत्पादन संयंत्र शामिल थे।
खामेनेई की चेतावनी: धमकी की भाषा बर्दाश्त नहीं
ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई का बयान बेहद सख्त और स्पष्ट था। उन्होंने अपने टेलीविजन संबोधन में कहा:
“ईरान, ईरानी राष्ट्र और उसके इतिहास को जानने वाले कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति इस राष्ट्र से धमकी भरी भाषा में बात नहीं करेगा… क्योंकि ईरानी राष्ट्र आत्मसमर्पण नहीं करेगा।”
खामेनेई ने अमेरिका को चेताते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने कोई सीधा सैन्य हस्तक्षेप किया, तो उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी:
“अमेरिकियों को यह समझ लेना चाहिए कि किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप से अपूरणीय क्षति होगी।”
यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत था कि ईरान अब किसी भी तरह के राजनीतिक या सैन्य दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है।
तेहरान से पलायन: भय का माहौल
इजरायल की ताज़ा बमबारी के बाद तेहरान में असुरक्षा और भय का माहौल है। रिपोर्ट के मुताबिक, हजारों नागरिक राजधानी से पलायन कर रहे हैं। रात भर शहर के ऊपर उड़ते जेट विमानों की आवाज़ें और बम धमाकों ने आम लोगों को दहशत में डाल दिया है।
इजरायली सेना ने कहा कि उनके 50 से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने रात भर में सटीक हमले किए और यह अभियान अभी और भी लंबा चल सकता है। इजरायली रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई “ईरानी परमाणु और मिसाइल गतिविधियों को रोकने” के उद्देश्य से की जा रही है।
अमेरिका की भूमिका: ट्रम्प के दिमाग में क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इन घटनाओं को बहुत गंभीरता से देख रहे हैं और अपने सलाहकारों के साथ विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा विकल्प यह है कि अमेरिका ईरानी परमाणु ठिकानों पर इजरायल के साथ मिलकर हमला कर सकता है।
एक सूत्र के मुताबिक, ट्रम्प के दिमाग में यह योजना है कि अगर ईरान इजरायल की बमबारी का जवाब देता है, तो अमेरिका सीधा हस्तक्षेप करके ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक इस योजना को सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।
ईरान का कड़ा रुख: अमेरिका को भी चेतावनी
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरीनी ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि अगर उसने इस संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी की, तो उसका जवाब ईरान की ओर से सीधे अमेरिका को दिया जाएगा।
बहरीनी ने यह भी कहा:
“हम पहले से ही अमेरिका को इजरायल के कार्यों में सहभागी मानते हैं।”
इस बयान से यह साफ हो गया कि ईरान अमेरिका और इजरायल को एक ही गठबंधन के रूप में देख रहा है, और अगर युद्ध हुआ, तो वह दोनों के खिलाफ मोर्चा खोलने में संकोच नहीं करेगा।
ईरान-इजरायल संघर्ष: क्या यह पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
ईरान और इजरायल के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, लेकिन हाल के हवाई हमलों ने इस तनाव को खुले युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया है। दोनों देशों के बीच इस समय जो स्थिति है, उसमें किसी भी पक्ष की छोटी सी प्रतिक्रिया भी बड़े युद्ध में बदल सकती है।
इसके साथ-साथ अमेरिका की संभावित भागीदारी ने स्थिति को और जटिल और खतरनाक बना दिया है। यदि ट्रम्प ने इजरायल का साथ देने का फैसला किया, तो यह संघर्ष सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक वैश्विक संकट में तब्दील हो सकता है।
निष्कर्ष: दुनिया को चाहिए कूटनीति, हथियार नहीं
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि मध्य-पूर्व एक बार फिर भयानक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। ईरान अपने आत्मसम्मान और संप्रभुता के लिए डटा हुआ है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर आक्रामक मुद्रा में है। अमेरिका का संभावित हस्तक्षेप इस आग में घी डालने का काम कर सकता है।
इस वक्त ज़रूरत है कूटनीति की, बातचीत की, मध्यस्थता की – ताकि एक और विनाशकारी युद्ध को टाला जा सके। वरना यह संघर्ष केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा, इसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ेगा।
संक्षेप में, खामेनेई का यह बयान महज़ राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि युद्ध और शांति के बीच की एक निर्णायक चेतावनी है।
















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