प्रस्तावित योजना और किसान विरोध
कर्नाटक सरकार द्वारा बेंगलुरु के पास देवनहल्ली तालुक में प्रस्तावित एयरोस्पेस पार्क परियोजना को लेकर चल रही विवादित ज़मीन अधिग्रहण प्रक्रिया आखिरकार थम गई है।
1,777 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट को लेकर 13 गांवों के किसानों ने लगातार 1,198 दिनों तक विरोध जताया, जिसके बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 15 जुलाई को इस अधिग्रहण को आधिकारिक रूप से रद्द करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम किसानों की मर्जी के खिलाफ जमीन नहीं लेंगे। लेकिन जो किसान अपनी जमीन स्वेच्छा से देना चाहें, उन्हें ज्यादा मुआवज़ा और विकसित जमीन का हिस्सा मिलेगा।”
देवनहल्ली परियोजना: क्यों थी महत्वपूर्ण?
देवनहल्ली बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित है, जहां पहले से ही कुछ एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन इकाइयाँ संचालित हो रही हैं।
- इस इलाके को “भारत का एयरोस्पेस हब” बनाने की योजना थी।
- HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड), ISRO और DRDO जैसे संस्थानों की निकटता इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को बढ़ाती है।
लेकिन भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीण किसानों की शिकायत थी कि:
- उन्हें उचित मुआवज़ा नहीं दिया जा रहा,
- कृषि जमीन को जबरन छीना जा रहा है,
- और उनका आजीविका का आधार खतरे में पड़ रहा है।
किसानों के विरोध पर सियासत
विपक्षी दलों और किसानों के संयुक्त दबाव के चलते सिद्धारमैया सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।
हालांकि कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने बयान दिया, “इसका मतलब यह नहीं कि परियोजना रद्द कर दी गई है। हमने स्वैच्छिक अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी रखने का फैसला लिया है।”
कृषि समुदाय का यह सामूहिक आंदोलन अब राजनीतिक चेतना और जनसुनवाई की मिसाल बन चुका है।
आंध्र प्रदेश की ओर से खुला न्यौता
कर्नाटक सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण को वापस लेने की घोषणा के तुरंत बाद, आंध्र प्रदेश के IT मंत्री नारा लोकेश ने एयरोस्पेस कंपनियों को एक “ओपन इनविटेशन” दे डाला।
❝Dear Aerospace industry… हमारे पास 8000 एकड़ तैयार ज़मीन है❞
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में नारा लोकेश ने लिखा:
“प्रिय एयरोस्पेस इंडस्ट्री, यह जानकर अफसोस हुआ कि आपकी परियोजना कर्नाटक में अटक गई। क्यों न आप आंध्र प्रदेश पर विचार करें? हमारे पास सर्वश्रेष्ठ नीति, आकर्षक प्रोत्साहन और बेंगलुरु के पास ही 8000 एकड़ तैयार ज़मीन है।”
इस बयान के पीछे उनका स्पष्ट इशारा था कि आंध्र प्रदेश अब एयरोस्पेस निवेश की अगली मंज़िल बनना चाहता है।
उल्लेखनीय है कि उनके पिता और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पहले ही HAL को अनंतपुर ज़िले में 10,000 एकड़ जमीन देने की पेशकश कर चुके हैं।
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या की प्रतिक्रिया और संकोच
दिलचस्प रूप से, बीजेपी के बेंगलुरु साउथ सांसद तेजस्वी सूर्या ने नारा लोकेश की “बिजनेस अक्लमंदी” की तारीफ़ करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट किया था।
हालांकि कुछ घंटों बाद उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दी, शायद कर्नाटक सरकार और स्थानीय किसानों की नाराज़गी के डर से।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब यह मामला केवल औद्योगिक नीति का नहीं, बल्कि राज्यीय प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक इमेज का हिस्सा बन चुका है।
कर्नाटक बनाम आंध्र: निवेश के लिए कौन तैयार?
| पहलू | कर्नाटक | आंध्र प्रदेश |
|---|---|---|
| भूमि अधिग्रहण स्थिति | आंशिक रूप से रोक, केवल स्वैच्छिक | 8000+ एकड़ तैयार भूमि उपलब्ध |
| किसानों का विरोध | तीव्र (1198 दिन लंबा आंदोलन) | विरोध की संभावना कम (कम जनसंख्या) |
| सरकार का रुख | अब रक्षात्मक, सामाजिक दबाव में | आक्रामक और खुला निमंत्रण |
| नीति प्रोत्साहन | पहले मौजूद, पर संशोधन की ज़रूरत | नई आकर्षक एयरोस्पेस नीति |
| स्थान | बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास (रणनीतिक) | बेंगलुरु सीमा से सटा अनंतपुर |
भारत में एयरोस्पेस हब की होड़
भारत सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम के तहत रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र को घरेलू उत्पादन में लाने का बड़ा प्रयास कर रही है।
ऐसे में HAL, Boeing, Airbus, Dassault जैसे कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं।
- तमिलनाडु में भी एयरोस्पेस कॉरिडोर की योजना चल रही है।
- तेलंगाना में भी हैदराबाद को डिफेंस और स्पेस इंडस्ट्री हब के रूप में उभारा जा रहा है।
आंध्र प्रदेश अब इस दौड़ में नई शक्ति के रूप में सामने आ रहा है।
सामाजिक लागत बनाम औद्योगिक लाभ
देवनहल्ली परियोजना के विरोध ने एक बड़ा सवाल उठाया है:
“क्या उद्योगों की स्थापना के लिए कृषि भूमि की बलि दी जानी चाहिए?”
- एक ओर सरकारों को निवेश, रोजगार और तकनीक चाहिए,
- दूसरी ओर किसान अपने पुश्तैनी ज़मीन और जीविका की रक्षा चाहते हैं।
इस संघर्ष को “विकास बनाम विस्थापन” की बहस के रूप में देखा जा सकता है।
निष्कर्ष: आगे क्या?
- कर्नाटक सरकार के कदम से यह संदेश गया है कि जनता की सुनवाई और सहमति आधारित विकास की मांग अब अपरिहार्य है।
- आंध्र प्रदेश इस मौके को भुनाने के लिए तैयार बैठा है—और नीति व भूमि के स्तर पर भी तैयार है।
- केंद्र सरकार और HAL जैसी संस्थाएं अब यह तय करेंगी कि अगला एयरोस्पेस पार्क किस राज्य में बनेगा।








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