नमस्कार दर्शकों, आज हम बात करने जा रहे हैं एक बेहद खास आयोजन की—विशाखापत्तनम में रहने वाले ओड़िया समाज द्वारा आयोजित रथ यात्रा महोत्सव की, जो 27 जून 2025 को श्रीजगन्नाथ धाम पूरी की परंपराओं के साथ-साथ यहां भी बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी।
आयोजक कौन हैं?
इस पावन आयोजन की जिम्मेदारी उठाई है उत्कल सांस्कृतिक समाज, जो कि विशाखापत्तनम में रहने वाले ओड़िया समुदाय का प्रमुख सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है। यह समाज वर्षों से न केवल ओड़िया संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है, बल्कि जगन्नाथ भक्ति की इस अनुपम परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है।
क्या होगा विशेष?
इस आयोजन की शुरुआत होगी दसपल्ला हिल्स स्थित मंदिर से, जहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं बड़ी श्रद्धा के साथ एक रंग-बिरंगे और आकर्षक रथ में विराजमान की जाएंगी। पाहंडी बीजे नामक पारंपरिक रस्म के तहत भगवानों को गर्भगृह से बाहर लाया जाएगा।
इसके बाद, समाज के अध्यक्ष और OSL ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट जे.के. नायक परंपरागत तौर पर झाड़ू लगाकर छेरा पहरा की रस्म निभाएंगे—एक ऐसी परंपरा जो भगवान के सामने सभी को समान दिखाती है।
रथ यात्रा का मार्ग
रथ यात्रा का मार्ग भी बेहद भव्य होगा। यह यात्रा VMRDA चिल्ड्रन एरीना, AU गेट, पार्क होटल और VUDA पार्क से होते हुए लॉसन बे कॉलोनी स्थित गुंडिचा मंदिर तक पहुंचेगी। इस दौरान पूरा वातावरण “हरे रामा, हरे कृष्णा”, “जय जगन्नाथ” जैसे मंत्रों और संकीर्तन की गूंज से भक्तिमय हो उठेगा।
विश्राम और बहुदा यात्रा
गुंडिचा मंदिर में भगवान 5 जुलाई तक विश्राम करेंगे। इस अवधि में विशेष पूजा-अर्चना, भजन, कीर्तन और ओड़िया व्यंजनों का वितरण किया जाएगा। भक्तजन वहां जाकर भगवान का प्रसाद भी ग्रहण कर सकते हैं।
5 जुलाई को बहुदा यात्रा के दिन भगवान वापस दसपल्ला हिल्स के मंदिर लौटेंगे।
सेवा भाव और संस्कृति का संगम
मारवाड़ी युवा मंच द्वारा इस पूरे रथ मार्ग पर श्रद्धालुओं को पेयजल सेवा प्रदान की जाएगी। साथ ही, उड़ीसा सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा नियुक्त कलाकार संकीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से यात्रा को और भी खास बना देंगे।
सभी से अपील
समाज के महासचिव बिनाल कुमार महांता ने सभी ओड़िया परिवारों और अन्य नागरिकों से इस पावन उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।”
आस्था, परंपरा और संस्कृति का मिलन
यह रथ यात्रा ना केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की बहुलता में एकता, भाषा और संस्कृति की विविधता, और लोक जीवन की गहराई का भी परिचायक है। यह आयोजन बताता है कि भले ही हम अलग-अलग राज्यों से हों, पर हमारी आस्थाएं, हमारी परंपराएं और हमारा प्रेम हमें एकसूत्र में बांधता है।
तो आइए, विशाखापत्तनम में जगन्नाथ जी की रथयात्रा में सहभागी बनें, भाव और भक्ति से भर जाएं, और गूंज उठे एक ही स्वर में—“जय जगन्नाथ!”
















Leave a Reply