इस मौसम में अक्सर लोग पकौड़े, समोसे, पूड़ी जैसे तेल में बने स्वादिष्ट खाने ज़्यादा खाते हैं। लेकिन ज़्यादा तला-भुना खाने से पाचन शक्ति यानी हमारी “अग्नि” धीमी हो जाती है। साथ ही वातावरण में नमी बढ़ने से वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में सूखापन, जोड़ों में दर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा, इस मौसम में पित्त दोष भी शरीर में जमा हो जाता है, जो गर्मी और पाचन से जुड़ा होता है। इससे जलन, पेट की दिक्कतें और शरीर में गर्मी महसूस हो सकती है। इसीलिए इस मौसम में जरूरी है कि हम सही खाना खाएं, नियमित दिनचर्या अपनाएं और थोड़ी सतर्कता बरतें, ताकि हमारा शरीर स्वस्थ और संतुलित बना रहे।

इस मौसम में अक्सर लोग पकौड़े, समोसे, पूड़ी जैसे तेल में बने स्वादिष्ट खाने ज़्यादा खाते हैं। लेकिन ज़्यादा तला-भुना खाने से पाचन शक्ति यानी हमारी “अग्नि” धीमी हो जाती है। साथ ही वातावरण में नमी बढ़ने से वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में सूखापन, जोड़ों में दर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा, इस मौसम में पित्त दोष भी शरीर में जमा हो जाता है, जो गर्मी और पाचन से जुड़ा होता है। इससे जलन, पेट की दिक्कतें और शरीर में गर्मी महसूस हो सकती है। इसीलिए इस मौसम में जरूरी है कि हम सही खाना खाएं, नियमित दिनचर्या अपनाएं और थोड़ी सतर्कता बरतें, ताकि हमारा शरीर स्वस्थ और संतुलित बना रहे।

बारिश में क्यों बिगड़ता है पाचन?
बरसात के मौसम में अक्सर लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसका कारण होता है वात और पित्त दोष का बढ़ना। जब पाचन कमजोर होता है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे पेट खराब होना, गैस, एसिडिटी और थकान। इस मौसम में नमी ज़्यादा होने के कारण इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है, और शरीर जल्दी कमजोर महसूस करने लगता है। इसीलिए आयुर्वेद में ‘ऋतुचर्या’ यानी मौसमी दिनचर्या और डाइट को फॉलो करने की सलाह दी जाती है, ताकि शरीर मौसम के हिसाब से ढल सके और बीमारियों से बचा रह सके।

जैसे मौसम बदलता है, वैसे ही बदलती है हमारी बॉडी
मौसम का असर सिर्फ बाहर की दुनिया पर ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर पर भी पड़ता है। आयुर्वेद मानता है कि अगर हम अपने खानपान और दिनचर्या को मौसम के हिसाब से बदल लें, तो ना सिर्फ हम बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि हमारी सेहत भी लंबे वक्त तक बनी रहती है। मतलब साफ है, मौसम के साथ तालमेल बनाना, सेहतमंद रहने की पहली शर्त है।

बारिश में सेहत का ख्याल रखना क्यों है जरूरी?
बरसात के मौसम में खाने-पीने की आदतों का हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है। आयुर्वेद की ‘ऋतुचर्या’ के मुताबिक, इस मौसम में हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला खाना खाना सबसे बेहतर होता है। भारी, ठंडा या बहुत तला-भुना खाना पाचन तंत्र को कमजोर कर सकता है, जिससे गैस, अपच, एसिडिटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि आप ताजा, साफ और घर का बना खाना ही खाएं। सुश्रुत और चरक संहिता में भी बताया गया है कि हमें मौसम के मुताबिक अपने खानपान और दिनचर्या को ढालना चाहिए ताकि शरीर संतुलन में रहे।

बरसात में साफ-सफाई है सबसे जरूरी
बारिश के मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए अपने घर और आसपास सफाई बनाए रखना बहुत जरूरी है। फल और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही खाएं, ताकि बैक्टीरिया और गंदगी पेट में न जाए। पैरों को साफ और सूखा रखें, क्योंकि गीले पैर होने से फंगल इंफेक्शन जल्दी होता है। मच्छरों और कीड़ों से बचने के लिए पानी इकट्ठा न होने दें और समय-समय पर सफाई करते रहें। छोटी-छोटी आदतें अपनाकर हम खुद को और अपने परिवार को इस मौसम में सेहतमंद रख सकते हैं।

बारिश में इस तरह करें नहाने की सही तैयारी
बारिश के मौसम में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, खासतौर पर नहाने के तरीके में थोड़ी सावधानी बरतना फायदेमंद हो सकता है। इस मौसम में कोशिश करें कि ठंडे पानी से नहाने की बजाय गुनगुने या हल्के गर्म पानी से स्नान करें, ताकि शरीर में ठंड न लगे और वात दोष न बढ़े। अगर संभव हो तो नहाने के पानी में नीम या तुलसी के पत्ते डालें। इससे स्किन पर बैक्टीरिया और संक्रमण फैलाने वाले कीटाणु पनप नहीं पाएंगे। ऐसे नहाने से त्वचा भी सुरक्षित रहती है और इंफेक्शन से भी बचाव होता है। इसके अलावा, नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह से सुखाएं और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। थोड़ी सी सावधानी आपको बरसात के मौसम में स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।
















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