पश्चिम एशिया एक बार फिर से युद्ध के मुहाने पर है। इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे गहरे सैन्य संघर्ष ने न केवल इस क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिला दिया है, बल्कि इसने वहां रह रहे हजारों विदेशी नागरिकों, विशेषकर भारतीयों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। हालात को देखते हुए भारत सरकार ने दो मोर्चों—ईरान और इज़राइल—से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु को सक्रिय किया है।
इज़राइल से भारतीयों की निकासी शुरू
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस समय लगभग 18,000 भारतीय नागरिक इज़राइल में रह रहे हैं, जिनमें छात्र, पेशेवर और प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। इज़राइल में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। शुक्रवार को इज़राइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत ईरान के भीतर परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने भी चेतावनी भरे संकेत दिए, जिससे तनाव और बढ़ गया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि भारत उन सभी नागरिकों को वापस लाएगा जो स्वेच्छा से इज़राइल छोड़ना चाहते हैं। इसके लिए एक संयोजित निकासी प्रक्रिया तैयार की गई है, जिसमें पहले नागरिकों को भूमि मार्ग के ज़रिए सीमावर्ती क्षेत्रों तक लाया जाएगा और उसके बाद हवाई मार्ग से भारत भेजा जाएगा।
भारत सरकार ने इज़राइल में रह रहे भारतीयों से अपील की है कि वे तुरंत तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास की वेबसाइट (https://www.indembassyisrael.gov.in/indian_national_reg) पर जाकर पंजीकरण कराएं, ताकि उन्हें निकासी योजनाओं के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर मदद मिल सके।
24/7 हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय
तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास ने एक 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है जो भारतीय नागरिकों को मदद प्रदान कर रहा है। किसी भी आपातकाल या जानकारी के लिए निम्नलिखित माध्यमों से संपर्क किया जा सकता है:
- टेलीफोन: +972 54-7520711 / +972 54-3278392
- ईमेल: cons1.telaviv@mea.gov.in
यह नियंत्रण कक्ष लगातार अपडेट ले रहा है और इज़राइल के हालात के आधार पर रूट प्लान, सीमा क्रॉसिंग और उड़ानों का समन्वय कर रहा है।
ईरान में ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत भारत की सक्रियता
इज़राइल के समानांतर, भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों को भी निकालना शुरू कर दिया है। खास तौर पर ईरान के मशहद और अन्य शहरों में रह रहे भारतीय छात्रों और कामगारों के लिए यह संकट काफी बड़ा बन गया था।
भारत ने इस संकट से निपटने के लिए ऑपरेशन सिंधु नामक एक विशेष निकासी अभियान शुरू किया। अब तक तीन चार्टर्ड उड़ानों के माध्यम से 800 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया है, जिनमें 300 से अधिक छात्र भी शामिल हैं।
एक और चार्टर उड़ान, जो कि मशहद से रवाना हुई, उसमें जम्मू-कश्मीर के 200 से अधिक छात्र सवार हैं। यह उड़ान आज दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने की संभावना है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि: क्या है इज़राइल-ईरान युद्ध का कारण?
इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब इज़राइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत ईरान के तीन प्रमुख क्षेत्रों—फोर्डो, नतांज़, और एस्फाहान—में स्थित परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इज़राइली सेना का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब है और इसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी था।
इसके बाद हालात और गंभीर तब हो गए जब अमेरिका ने भी इस सैन्य अभियान में शामिल होकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी विमानों ने तीनों परमाणु स्थलों पर “सफल हमला” किया। यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद पहली बार था जब अमेरिका ने ईरान की सरजमीं पर हमला किया।
भारत की स्थिति और कूटनीतिक रणनीति
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई सीधा राजनयिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से जारी की गई निकासी की व्यवस्था यह स्पष्ट करती है कि सरकार इस संघर्ष को गंभीर सैन्य टकराव के रूप में देख रही है।
भारत की रणनीति साफ है—नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विदेश में किसी भी भारतीय की जान को खतरा हो, तो भारत सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी।
भविष्य की चुनौती
हालांकि निकासी अभियान तेज़ी से चल रहा है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि हालात कब सामान्य होंगे। जिस तरह अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के अंदरूनी इलाकों में सैन्य कार्रवाई की है, उसका जवाब भी उतना ही तीखा हो सकता है।
भारत के लिए यह एक दोहरी चुनौती है:
- तेज़ और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना, और
- सभी पक्षों के साथ संतुलित कूटनीतिक संबंध बनाए रखना।
निष्कर्ष
इज़राइल-ईरान संघर्ष से उत्पन्न हालात न केवल पश्चिम एशिया की शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि इसमें फंसे विदेशी नागरिकों के लिए भी गंभीर संकट हैं। भारत सरकार की तत्परता, ऑपरेशन सिंधु की सफलता और 24×7 नियंत्रण कक्षों की स्थापना यह दिखाते हैं कि संकट के समय रणनीतिक सक्रियता और मानवीय संवेदना कैसे एक साथ काम करती हैं।
फिर भी यह एक चेतावनी है—आने वाले दिनों में भारत को अंतरराष्ट्रीय संकटों के लिए और भी सुदृढ़, त्वरित और तकनीकी रूप से सक्षम निकासी तंत्र बनाना होगा। क्योंकि एक उबलते विश्व में, अपने नागरिकों को बचा पाना ही एक राष्ट्र की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी।
















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