भारत ने शुक्रवार को मध्य एशियाई देशों द्वारा अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने की सराहना की और इस क्षेत्र के पांचों देशों — कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान — के साथ सुरक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क और विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह प्रतिबद्धता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-मध्य एशिया वार्ता में अपने उद्घाटन भाषण में व्यक्त की, जो इस क्षेत्र के लिए भारत के बढ़ते महत्व और साझेदारी को दर्शाती है।
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और सुरक्षा सहयोग
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में इस बात पर जोर दिया कि भारत उन सभी देशों का आभारी है जिन्होंने पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में यह समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की है।
व्यापार और निवेश को बढ़ावा
भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत इन देशों के लिए एक भरोसेमंद विकास भागीदार बन चुका है, जो केवल सुरक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापार, निवेश, कृषि प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, और नई तकनीकों का विकास भी शामिल है। इन पांचों देशों के साथ भारत ने कई क्षेत्रीय और द्विपक्षीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है, जिनमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, छात्रवृत्तियां, और सामुदायिक विकास के लिए अनुदान शामिल हैं।
विशेष रूप से उन्होंने उल्लेख किया कि भारत द्वारा उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें स्कूलों को कंप्यूटर और अस्पतालों को चिकित्सा उपकरण प्रदान करना शामिल है। इससे स्थानीय स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। इस तरह की पहल भारत की मध्य एशिया में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की नीति को दर्शाती हैं।
क्षेत्रीय संपर्क और कनेक्टिविटी
जयशंकर ने भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया। पिछले एक दशक में भारत और इन देशों के बीच आर्थिक, निवेश और व्यापारिक संबंध काफी मजबूत हुए हैं। कई सीधी उड़ानों के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच संपर्क बेहतर हुआ है, जिससे पर्यटकों और व्यवसायों के प्रवाह में वृद्धि हुई है।
कनेक्टिविटी में सुधार से न केवल व्यापार को बल मिला है, बल्कि भारत के छात्रों के लिए भी अवसर बढ़े हैं। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मध्य एशियाई देशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं।
भारत-मध्य एशिया वार्ता का इतिहास और महत्व
यह भारत-मध्य एशिया वार्ता का चौथा संस्करण है, जो 2019 में शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य सुरक्षा, व्यापार, निवेश, और संपर्क को बढ़ावा देना था। इस वर्ष की बैठक में छह विदेश मंत्रियों ने भाग लिया और क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, और विकास सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
यह वार्ता एक व्यापक बहुपक्षीय मंच प्रदान करती है, जहां भारत और मध्य एशियाई देश न केवल सुरक्षा बल्कि आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। जनवरी 2022 में इस संवाद को नेताओं के स्तर पर वर्चुअल शिखर सम्मेलन के रूप में बढ़ावा मिला, जिससे द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग को नया आयाम मिला।
डिजिटल और वित्तीय सहयोग पर फोकस
वार्ता से पहले हुई भारत-मध्य एशिया व्यापार परिषद की बैठक में डिजिटल प्रौद्योगिकी, फिनटेक, और अंतर-बैंकिंग सहयोग को बढ़ावा देने पर भी विचार हुआ। डिजिटल युग में वित्तीय और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा। इससे व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी और निवेश आकर्षित होगा।
जयशंकर ने कहा कि भारत और मध्य एशियाई देशों ने एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा विकसित किया है, जो सहयोग के लिए एक स्थायी आधार प्रदान करता है। यह ढांचा दोनों पक्षों को पारस्परिक लाभकारी परियोजनाओं में शामिल होने के लिए सक्षम बनाता है और विकास के लिए निरंतर सहयोग को सुनिश्चित करता है।
सामुदायिक विकास में भारत की भूमिका
विदेश मंत्री ने सामुदायिक विकास के क्षेत्र में भारत की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत मध्य एशियाई देशों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि वहां के स्थानीय समुदायों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
इन सामुदायिक विकास परियोजनाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, तकनीकी प्रशिक्षण, और आधारभूत संरचनाओं का निर्माण शामिल है। उदाहरण के लिए, कई स्कूलों को कंप्यूटर उपकरण और अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा उपकरण भारत की ओर से प्राप्त हुए हैं। इससे इन देशों में जीवन स्तर में सुधार हुआ है और भारत की छवि एक जिम्मेदार विकास साझेदार के रूप में बनी है।
क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए सहयोग
भारत और मध्य एशियाई देशों ने अपनी साझेदारी को केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा है। दोनों पक्ष क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। आतंकवाद, सीमा विवाद, और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की योजना है।
जयशंकर ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को संबोधित करना भारत और मध्य एशियाई देशों की प्राथमिकता है, और इस दिशा में वार्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस सहयोग से पूरे क्षेत्र की समृद्धि और शांति सुनिश्चित होगी।
भविष्य की संभावनाएं
भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुल रहे हैं। व्यापार, तकनीकी, शैक्षणिक, और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। भारत मध्य एशियाई देशों के लिए एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और गहरी होगी और क्षेत्रीय विकास, शांति और समृद्धि के लिए अधिक प्रभावशाली होगी। उन्होंने कहा कि भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच संबंधों को और व्यापक बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, और सामाजिक-आर्थिक विकास को लेकर सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। पहलगाम आतंकी हमले की निंदा से लेकर सामुदायिक विकास परियोजनाओं तक, भारत ने इस क्षेत्र में अपने सहयोग को बहुआयामी रूप दिया है।
यह वार्ता केवल क्षेत्रीय साझेदारी का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत और स्थायी सहयोग का आधार भी है, जो क्षेत्र की स्थिरता, समृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे सहयोग से भारत अपनी क्षेत्रीय भूमिका को और प्रभावशाली बना रहा है, और मध्य एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है।
इस प्रकार, भारत-मध्य एशिया वार्ता नई संभावनाओं के द्वार खोलती है, जो न केवल इन देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए समृद्धि और शांति लेकर आएगी।















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