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जालौर में नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क हादसा, बस में लगी भीषण आग – दो युवकों की मौके पर मौत, 50 यात्री बाल-बाल बचे

Horrific road accident on National Highway in Jalore, bus caught fire – two youths died on the spot, 50 passengers narrowly escaped

राजस्थान के जालौर जिले से रविवार को एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया। नेशनल हाईवे-68 पर सुबह करीब 10 बजे एक निजी बस और बाइक की जोरदार टक्कर हुई, जिसके बाद बस में अचानक आग लग गई। इस हादसे में दो बाइक सवार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बस में सवार 50 यात्री समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया।


हादसा कैसे हुआ?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा जालौर से लगभग 15 किलोमीटर दूर आहोर रोड पर हुआ। निजी बस बाड़मेर से अहमदाबाद की ओर जा रही थी, जबकि सामने से आ रही बाइक तेज गति में थी। जैसे ही दोनों वाहन एक मोड़ पर आमने-सामने आए, बस ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों सवार सड़क पर गिर पड़े। टक्कर के कुछ ही सेकंड बाद बस के इंजन के पास से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते उसमें आग भड़क गई।


मौके पर मचा हड़कंप

बस में आग लगते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी-अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और दरवाजों से बाहर कूदने लगे। कई यात्रियों को हल्की चोटें भी आईं। आस-पास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत मदद की और यात्रियों को बस से सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं, बाइक सवार दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।


मृतकों की पहचान

पुलिस ने बताया कि मृतक दोनों युवक जालौर के ही रहने वाले थे। उनकी पहचान 24 वर्षीय लोकेश चौधरी और 26 वर्षीय महेश विश्नोई के रूप में हुई है। दोनों किसी काम से शहर की ओर जा रहे थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।


आग पर काबू पाने में लगी एक घंटा

फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस का लगभग आधा हिस्सा जल चुका था। बस में रखा यात्रियों का काफी सामान और लगेज भी जलकर खाक हो गया। बस ड्राइवर और कंडक्टर सुरक्षित हैं, हालांकि ड्राइवर को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।


आग लगने की वजह क्या थी?

पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की प्राथमिक वजह बस के इंजन में शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। टक्कर के दौरान पेट्रोल टैंक और इंजन के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे चिंगारी निकली और आग तेजी से फैल गई। हालांकि, सटीक कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है।


यात्रियों ने सुनाई आपबीती

हादसे के समय बस में मौजूद कई यात्रियों ने बताया कि अगर वे कुछ सेकंड देर कर देते, तो शायद बच पाना मुश्किल था। एक यात्री ने कहा,

“जैसे ही टक्कर हुई, हम संभल भी नहीं पाए थे कि आग लग गई। लोग चिल्लाने लगे और धुआं भरने लगा। पीछे बैठे यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलना शुरू किया।”


प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

जालौर के जिला कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे और घटना की पूरी जानकारी ली। प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए तुरंत व्यवस्था की और मृतकों के परिवारों को सांत्वना दी। फिलहाल, जिला प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को ₹5 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है।


NH-68 पर हादसों का इतिहास

नेशनल हाईवे-68, जो बाड़मेर, जालौर, पाली और गुजरात को जोड़ता है, लंबे समय से हादसों के लिए कुख्यात है। यहां तेज रफ्तार, सड़क की खराब स्थिति और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। स्थानीय लोगों ने इस हादसे के बाद एक बार फिर सरकार से सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने और सड़क चौड़ीकरण की मांग की है।


सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन के मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई यात्रियों का कहना है कि बसों में फायर सेफ्टी उपकरण सही तरीके से नहीं होते और ड्राइवरों को भी आग लगने की स्थिति में बचाव की ट्रेनिंग नहीं दी जाती।


फिलहाल की स्थिति

  • मृतक: 2 (दोनों बाइक सवार)
  • घायल: कई यात्री हल्की चोटों के साथ
  • बचाए गए यात्री: लगभग 50
  • आग का कारण: प्रारंभिक जांच में इंजन शॉर्ट सर्किट
  • मुआवजा: मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख प्रत्येक

निष्कर्ष

जालौर का यह हादसा सिर्फ दो जिंदगियां खत्म करने वाला एक दुखद मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे सड़क सुरक्षा तंत्र की खामियों को भी उजागर करता है। अगर बस में फायर एक्सटिंग्विशर होते, ड्राइवर को आग बुझाने की ट्रेनिंग दी जाती, और सड़कें ज्यादा सुरक्षित होतीं, तो शायद आज कहानी कुछ और होती। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि सड़क हादसों को केवल आंकड़ों में न गिना जाए, बल्कि हर हादसे से सबक लेकर भविष्य में उन्हें रोकने के उपाय किए जाएं।

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