वाराणसी में त्योहारों का विशेष महत्व है, खासतौर पर होली का रंगोत्सव यहां अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के बाद से ही यहां होली की खुमारी चढ़ने लगती है, जो विभिन्न वर्गों द्वारा अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है। इस दौरान लाखों लोग वाराणसी पहुंचते हैं और रंगों के इस अद्भुत संगम का हिस्सा बनते हैं।
1. काशी की प्रसिद्ध मसान की होली
वाराणसी की एक अनूठी परंपरा “मसान की होली” (महाश्मशान होली) है, जो मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर खेली जाती है। महाशिवरात्रि के बाद रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ संग रंगोत्सव मनाने के बाद, अगले दिन अघोरी और घाटवासी चिता भस्म से होली खेलते हैं। यह परंपरा मोक्ष की नगरी काशी की विशिष्ट पहचान है और बीते वर्षों में यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है।
2. बाबा विश्वनाथ संग रंगभरी एकादशी की होली
महाशिवरात्रि के बाद रंगभरी एकादशी का पर्व वाराणसी में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान काशी विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार कर अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है और मां गौरा के गौने का आयोजन किया जाता है। यह पर्व होली की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है, जिसमें बाबा विश्वनाथ के भक्त उनके संग होली खेलते हैं।

3. घाटों पर मनाई जाने वाली पारंपरिक होली
वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों पर होली का नजारा देखने लायक होता है। यहां लोग पारंपरिक संगीत, नृत्य और स्वादिष्ट पकवानों के साथ होली का आनंद लेते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसमें हर उम्र के लोग बड़े उत्साह से शामिल होते हैं।
4. विदेशियों की होली: घाटों पर रंगों की धूम
वाराणसी की होली में विदेशी पर्यटकों की भी बड़ी भागीदारी होती है। होली से एक-दो दिन पहले ही विदेशी पर्यटक वाराणसी के घाटों पर नाचते-गाते और रंगों में सराबोर होते नजर आते हैं। इस अनूठी परंपरा को “विदेशियों की होली” के रूप में जाना जाता है, जो वाराणसी के सांस्कृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान देती है।
5. होली के बाद कवि सम्मेलनों की परंपर
होली समाप्त होने के बाद वाराणसी में विभिन्न कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में रंगों और प्रेम से भरी कविताएं और गीत प्रस्तुत किए जाते हैं। यह परंपरा वाराणसी के साहित्यिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है।
वाराणसी की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आनंद का अद्भुत संगम है, जो इसे पूरी दुनिया में अनोखा बनाता है।














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