khabarhunt.in

खबर का शिकार

भारी बारिश ने मचाई तबाही: हिमाचल प्रदेश में इमारत गिरी, सड़कें बंद, नदी-नाले उफान पर

Heavy rains wreak havoc: Building collapses in Himachal Pradesh, roads closed, rivers and streams in spate

हिमाचल प्रदेश एक बार फिर मानसूनी तबाही की चपेट में है। रविवार को देशभर में मानसून के पूरी तरह से सक्रिय हो जाने के बाद सोमवार की सुबह राज्य की राजधानी शिमला के भट्टाकुफर क्षेत्र में एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। गनीमत यह रही कि इमारत में कोई मौजूद नहीं था, क्योंकि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए इसे रविवार रात ही खाली करा लिया गया था।

पहले दरारें, फिर मौत जैसा मंजर

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह इमारत पहले ही कमजोर हो चुकी थी और इसके दीवारों में दरारें आने लगी थीं। खास बात यह है कि यह इमारत एक चार लेन सड़क परियोजना के निर्माण के चलते और भी अस्थिर हो गई थी। डीडी न्यूज़ हिमाचल द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे पहले दीवारों में दरारें फैलती हैं और फिर कुछ ही पलों में पूरी इमारत धराशायी हो जाती है। वीडियो में बैकग्राउंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश इस भयावह मंजर को और डरावना बना देती है।

24 घंटे में 3 मौतें, 129 सड़कें बंद

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से एक की मौत ऊना में डूबने से, दूसरी बिलासपुर में और तीसरी शिमला में ऊंचाई से गिरने के कारण हुई। इसी के साथ इस मानसून सीजन में राज्य में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग अब भी लापता हैं।

बारिश के कारण राज्य भर में 129 सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें सिरमौर जिले की 57 और मंडी की 44 सड़कें शामिल हैं। बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है और राज्य में 612 ट्रांसफॉर्मर ठप हो गए हैं।

औद्योगिक इलाकों में जलभराव, पुल बहा

सोलन जिले के बरोटीवाला औद्योगिक क्षेत्र के पास हिमुडा कॉम्प्लेक्स के पास एक पुल बारिश में बह गया है। इसके चलते मंडहाला और बग्गुवाला जाने वाले रास्ते बंद हो गए हैं। बद्दी में बल्द नदी का जलस्तर बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है, खासकर झाड़माजरी इलाके के पास। श‍िवालिक नगर में करीब 20 घरों में पानी घुस गया है और घरों में चार फीट तक पानी भर गया है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हर साल ऐसा होता है, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम को ठीक नहीं किया गया।

नदी-नालों में उफान, बाढ़ का खतरा

मौसम विभाग ने बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर, ऊना और चंबा जिलों में फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ का खतरा जताया है। मंडी जिले में जूनिखड्ड और ब्यास नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। इसके चलते स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने की अपील की है।

लारजी डैम से पानी छोड़ने के चलते पंडोह डैम के सभी पांच स्पिलवे गेट खोल दिए गए हैं, जिससे ब्यास नदी का जलस्तर 44,000 क्यूसेक तक पहुंच गया है। इसके कारण डेहर पावर हाउस में बिजली उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

स्कूल-कॉलेज बंद, रेड अलर्ट जारी

लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा, मंडी, सोलन और सिरमौर जिलों में सोमवार को सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। मंडी के डीसी अपूर्वा देवगन ने आदेश जारी किया कि इन जिलों में सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे, केवल आईआईटी मंडी, लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज और अन्य मेडिकल संस्थान खुले रहेंगे। कांगड़ा के डीसी हेमराज बैरवा ने जिले के सभी गैर-आवासीय शिक्षण संस्थानों में छुट्टी की घोषणा की है।

रेल सेवाएं भी प्रभावित

शिमला-कालका हेरिटेज रेल लाइन भी बारिश की मार से नहीं बच सकी। सोलन के कोटी क्षेत्र में पटरी पर गिरे बोल्डर और पेड़ों के चलते रेल सेवा बाधित हो गई है। सोमवार सुबह की पहली ट्रेन को कोटी स्टेशन पर रोकना पड़ा, वहीं अन्य ट्रेनों को गुम्मन और कालका में ही रोक दिया गया।

हालात गंभीर, प्रशासन अलर्ट पर

राज्य के हालात को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमें पूरी तरह से सक्रिय हैं। एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड के दस्ते संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने लोगों से अपील की है कि वे बिना ज़रूरत के घरों से बाहर न निकलें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

पिछली साल की तबाही की यादें ताजा

2023 में हिमाचल प्रदेश ने अपने इतिहास का सबसे भयावह मानसून झेला था, जिसमें 550 से अधिक लोगों की जान गई थी। उस तबाही के बाद सरकार ने मानसून से निपटने के लिए तमाम इंतज़ाम करने की बात कही थी, लेकिन 2024 के पहले मानसूनी सप्ताह में ही सड़कें बंद, पुल बह गए और लोग फिर उसी डर में जीने को मजबूर हैं।

निष्कर्ष: सबक कब लिया जाएगा?

बार-बार प्राकृतिक आपदाएं इस बात का संकेत हैं कि राज्य को आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की जरूरत है। सिर्फ चेतावनियां और बंदी आदेश काफी नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालीन योजनाएं, ठोस ड्रेनेज प्रणाली, निर्माण कार्यों में पर्यावरणीय सावधानियां और जनभागीदारी से ही राज्य को इस मानसूनी कहर से बचाया जा सकता है।

हिमाचल का पहाड़ी भूगोल सुंदर है, लेकिन यही सुंदरता बिन यथोचित योजना के एक खतरनाक तबाही में बदल जाती है। आने वाले हफ्तों में अगर बारिश इसी तरह जारी रही, तो चुनौतियां और भी गंभीर हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों को भी सजग रहने की ज़रूरत है।

सरकार, प्रशासन और जनता—तीनों को मिलकर इस जलप्रलय से उबरने की दिशा में ईमानदार प्रयास करने होंगे, वरना मानसून हर साल अपना विकराल रूप दिखाता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *