जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ज़िले के दूरदराज़ और पहाड़ी क्षेत्र बिहाली में सुरक्षाबलों और पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकियों के बीच गुरुवार, 26 जून 2025 को भीषण मुठभेड़ जारी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने चार संदिग्ध आतंकियों को कड़ी निगरानी के एक साल बाद ट्रैक करते हुए घने जंगल में घेर लिया है।
यह ऑपरेशन उस समय चलाया गया है जब कश्मीर घाटी में अमरनाथ यात्रा शुरू होने में महज एक हफ्ता बाकी है। ऐसे में यह मुठभेड़ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील बन गई है।
कैसे शुरू हुआ ‘ऑपरेशन बिहाली’?
जानकारी के अनुसार, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस को विशेष खुफिया सूचना मिली थी कि जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादी उधमपुर ज़िले के बसंतगढ़ ब्लॉक के बिहाली इलाके में करूर नाले के पास छिपे हुए हैं। इसके बाद भारतीय सेना की पैरा कमांडो यूनिट और पुलिस के संयुक्त बल ने गुरुवार सुबह इलाके को घेरते हुए तलाशी अभियान शुरू किया।
सुबह 8:30 बजे के करीब आतंकियों से संपर्क स्थापित हुआ, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। इस ऑपरेशन को सेना ने कोडनेम ‘ऑपरेशन बिहाली’ दिया है।
ख़राब मौसम के बीच जारी संघर्ष
उधमपुर का बिहाली इलाका बेहद दुर्गम और जंगलों से आच्छादित है। ऊपर से बारिश और घना कोहरा इस ऑपरेशन को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
जम्मू रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) भीम सेन तूती ने बताया कि,
“आतंकियों से संपर्क स्थापित हो चुका है। वे चार हैं, और हम पिछले एक साल से इन्हें ट्रैक कर रहे थे। मौसम खराब है, इसलिए ऑपरेशन की पूरी तस्वीर मौसम साफ होने के बाद ही सामने आएगी।”
उन्होंने आगे बताया कि अभी तक आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन ऑपरेशन तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और अतिरिक्त बल मौके पर भेजे गए हैं।
जैश-ए-मोहम्मद की मौजूदगी: एक चिंताजनक संकेत
घटना स्थल पर छिपे आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद संगठन के सदस्य हैं, जो कि पाकिस्तान आधारित एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन है। इस संगठन का उद्देश्य भारत में अशांति फैलाना, सुरक्षाबलों पर हमले करना और धार्मिक यात्राओं को निशाना बनाना है।
अमरनाथ यात्रा को देखते हुए यह आशंका पहले से थी कि आतंकी संगठन बड़ी साजिश रच सकते हैं। ऐसे में इन आतंकियों की मौजूदगी और भी अधिक चिंता का विषय बन जाती है।
सुरक्षाबलों की रणनीति: सतर्कता और संकल्प
भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस ऑपरेशन को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देना शुरू किया है।
- पैरा कमांडो यूनिट ने जंगल में घेराबंदी करते हुए टॉप-डाउन रणनीति अपनाई है,
- स्थानीय पुलिस इलाके के आस-पास के गांवों की सीलिंग और निगरानी कर रही है,
- ड्रोन और रात्रि दृष्टि उपकरणों (Night Vision Devices) का उपयोग कर जंगल की निगरानी की जा रही है।
सेना की व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया:
“भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा बिहाली क्षेत्र में विशेष खुफिया सूचना के आधार पर एक संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया गया है। आतंकियों से संपर्क स्थापित हो चुका है, ऑपरेशन जारी है।”
एक साल से ट्रैक हो रहे थे आतंकी
सूत्रों के अनुसार, ये चारों आतंकी पिछले एक वर्ष से घाटी में गुप्त रूप से सक्रिय थे। इनके मूवमेंट की जानकारी अंतर-राज्यीय खुफिया एजेंसियों को समय-समय पर मिलती रही थी। लेकिन, वे छोटे समूहों में विभाजित होकर जंगलों और ऊंचे क्षेत्रों में छिपते रहे, जिससे पकड़ना मुश्किल हो रहा था।
हाल ही में इनकी गतिविधि करूर नाले के पास देखी गई, जहां से ऑपरेशन शुरू किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था और अमरनाथ यात्रा
यह मुठभेड़ ऐसे समय में हो रही है जब वार्षिक अमरनाथ यात्रा की शुरुआत कुछ ही दिनों में होने वाली है। पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों द्वारा यात्रा को बाधित करने की कोशिशें होती रही हैं। इस वर्ष भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए सेना, अर्धसैनिक बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं।
इस संदर्भ में ‘ऑपरेशन बिहाली’ आतंकियों की किसी बड़ी साजिश को नाकाम करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
सांबा जिले में भी तलाशी अभियान
सांबा जिले के पुरमंडल क्षेत्र में भी बुधवार देर रात संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चलाया गया। हालांकि, पुलिस ने पुष्टि की कि मौके से कुछ बरामद नहीं हुआ और अभियान शांतिपूर्वक समाप्त हो गया।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि आतंकियों की घुसपैठ के प्रयास सीमावर्ती जिलों से लगातार जारी हैं, और सुरक्षाबल उन पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।
स्थानीय निवासियों से अपील
प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे:
- घबराएं नहीं,
- अफवाहें न फैलाएं,
- सुरक्षाबलों के साथ सहयोग करें,
- किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
निष्कर्ष: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग
‘ऑपरेशन बिहाली’ केवल एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध चल रही निर्णायक लड़ाई का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है।
भारतीय सुरक्षाबल जिस तरह से लगातार आतंकियों के नेटवर्क को खत्म कर रहे हैं, उससे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की कमर टूट रही है। जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को भारत में जगह नहीं मिलेगी, यह संदेश एक बार फिर स्पष्ट हुआ है।
इस ऑपरेशन की सफलता जहां अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को मजबूत करेगी, वहीं भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को और भी दृढ़ बनाएगी।
















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