इस साल मानसून की विभीषिका ने राजस्थान को झकझोर कर रख दिया है। रेगिस्तानी प्रदेश में इतनी भारी बारिश हुई कि अजमेर और जयपुर जैसे बड़े शहरों में सड़कें, गलियाँ नदियों का रूप ले चुकी हैं। चंबल और पार्वती नदियों के उफान के कारण धौलपुर के कई गाँव टापू बन गए, जबकि चंबल नदी खतरे के निशान से 12 मीटर ऊपर बह रही है। हजारों लोग विस्थापित हुए, लाखों एकड़ फसल बर्बाद, और बुनियादी ढांचे पर गहरा संकट मंडराया हुआ है।
मनसून अभूतपूर्व: बारिश का दर्जा
- Rajasthan ने जुलाई माह में 285 मिमी बारिश दर्ज की—ये आंकड़ा पिछले 69 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है। पिछले रिकॉर्ड की तुलना में यह बेतहाशा ऊँचा है।
- राज्यभर में इस वर्ष 79% अधिक वर्षा हुई है—यहां तक कि महीने के आरंभ तक बारिश सामान्य से कई गुना ज्यादा रही।
किस नदियों ने मचाई तबाही?
चंबल नदी
- नागवेरा बैराज से छोड़े गए 5 लाख क्यूसेक्स पानी ने चंबल नदी को राजस्थान में अधिकतम संवेदनशील स्तर तक उछाल मारा।
- Karauli में नदी 167.40 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान सिर्फ 165 मीटर है।
- धौलपुर में चंबल नदी 12 मीटर तक खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
- Old Chambal Bridge समेत कई बुनियादी संरचनाएं खतरे में थीं; रामाखेड़ा और सरमठुरा जैसे गाँव पूरे पानी में डूब गए। लगभग 60 गाँवों को खतरा मंडराया।
पार्वती नदी
- Kota जिले में पार्वती नदी खतरे के निशान से लगभग 3 मीटर ऊपर बह रही है, जिससे खटौली-एतावा ब्लॉक्स की कई बस्तियों डूब गई हैं।
- Sukhani नदी की बाढ़ से Pipalda क्षेत्र में भी व्यापक जलजमाव हुआ।
नगरों में हालत: जयपुर और अजमेर अटके
- जयपुर में सुबह से दिन भर बारिश से सड़कों और कॉलोनियों में जलभराव हो गया। ट्रैफिक ठप्प, कई सरकारी आवासों के आस-पास पानी भर गया।
- अजमेर में Ana Sagar झील में पानी आगंतुक इलाके तक फैल गया; ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह के आसपास के क्षेत्र बहाव की चपेट में रहे—लगभग एक शख्स और विक्रेता की गाड़ी, एक दोपहिया वाहन बहते पानी में बही।
प्रभावित क्षेत्र और राहत कार्य
- प्रभावित जिलों में धौलपुर, करौली, डूंगरपुर, कोटा, बूँदी, पाली, टोंक, सवाई माधोपुर शामिल हैं।
- SDRF, NDRF, Civil Defence व पुलिस टीमों ने बचाव व राहत कार्य तेज किया। धौलपुर के राजाखेड़ा व सरमठुरा में छह गांवों से हजारों लोग निकाले गए।
- जिला कलेक्टर्स और पुलिस प्रमुख व्यक्तिगत रूप से प्रभावित जिलों का दौरा कर राहत शिविर का उद्घाटन कर रहे हैं।
आदमी नहीं, पर जान बचाने वाला काम
- टोंक जिले में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने दो डूबते बच्चों को बचाने के लिए नदी में छलांग लगाकर अपनी जान न्योछावर कर दी।
फसलें और कृषि संकट
- कई जिलों में बाढ़ से खेतों में पानी भरने से फसलें नष्ट हो गईं। धौलपुर के पास किसान परेशान हैं क्योंकि उनकी फसलें पूर्णतः बर्बाद हो चुकी हैं।
- Bisalpur Dam, Kota Barrage सहित अन्य जलाशयों में पूर्ण जल स्तर हो गया है; आने वाले समय में और अधिक जल छोड़ना पड़ सकता है, जिससे और अधिक प्रभावित होंगे।
रिस्क अलर्ट और भविष्य का पूर्वानुमान
- IMD ने जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर आदि क्षेत्रों में अगले 48-72 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
- इसके चलते स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गईं; एंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए, पर कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य रखा गया।
प्रशासनिक समीक्षा और न्यायपालिका
- राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर के सड़क जलभराव की समस्याओं पर सुओ मोटो कार्रवाई करते हुए सरकार से विस्तृत कार्ययोजना मांगी—दो सप्ताह में रिपोर्ट और चार सप्ताह में सुधार योजनाएं प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
निष्कर्ष: बाढ़ नहीं, चेतावनी की घंटी
इस बाढ़ ने राजस्थान के आपदा-प्रबंधन को एक कड़ा सच दिखाया है—पुरानी मूलभूत ढाँचाएं, जल नियोजन और आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली अब पर्याप्त नजर नहीं आ रही। गुरिल्ला बारिश, पुनर्वितरित जल प्रवाह, और बिगड़ते बुनियादी ढांचे की चपेट में सुंदर शहर और नीची बस्तियाँ दोनों इतनी आसानी से समा गईं, जैसे रेत पर कोई रेखा।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की अगुवाई में राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाए हैं—लेकिन यह वक्तांक है सुधार का; क्योंकि इसी मानसून में सीखा गया सबक आने वाले समय में स्थायी बदलाव की ओर ही ले जाएगा।















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