तिलकामांझी यूनिवर्सिटी के डूबने की दर्दनाक तस्वीर
बिहार में इस समय बाढ़ का कहर चरम पर है। गंगा और कोसी समेत कई नदियां उफान पर हैं। नेपाल में पिछले एक सप्ताह से हो रही मूसलाधार बारिश ने बिहार की नदियों में पानी का प्रवाह बेहिसाब बढ़ा दिया है।
इस बाढ़ का सबसे भयावह असर भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU) पर पड़ा है, जो पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूब चुकी है।
यूनिवर्सिटी कैंपस में अब क्लासरूम, ऑफिस और गलियारों की जगह चारों तरफ पानी ही पानी नजर आता है। हालात इतने खराब हैं कि छात्रों और शिक्षकों को विश्वविद्यालय आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
कैसे डूबी यूनिवर्सिटी
तिलकामांझी यूनिवर्सिटी गंगा के किनारे बसी है और हर साल मॉनसून में बाढ़ का खतरा झेलती है। लेकिन इस बार हालात असामान्य रूप से गंभीर हैं।
- 5 अगस्त से नेपाल में भारी बारिश के बाद गंगा और कोसी का जलस्तर अचानक बढ़ा।
- 8 अगस्त की रात तक पानी यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार तक पहुंच गया।
- 9 अगस्त की सुबह पूरा कैंपस डेढ़ से दो मीटर गहरे पानी में डूब गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है और अगर बारिश जारी रही तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
छात्रों की मुश्किलें – क्लासरूम से नाव तक का सफर
कई छात्र-छात्राएं हॉस्टल में फंसे हुए हैं। कुछ को नाव से बाहर निकाला जा रहा है तो कुछ अपनी पढ़ाई ऑनलाइन जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
अंकिता कुमारी, जो M.Sc. की छात्रा हैं, बताती हैं –
“हमने कभी सोचा नहीं था कि पढ़ाई करने के लिए नाव में बैठना पड़ेगा। हॉस्टल से बाहर निकलना ही मुश्किल है, चारों तरफ पानी है।”
राहुल यादव, B.A. के छात्र, कहते हैं –
“लाइब्रेरी में हमारी किताबें तक पानी में डूब गईं। लैब का सारा सामान खराब हो चुका है।”
शिक्षकों का संघर्ष
यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसर भी अपने घर से विश्वविद्यालय तक पहुंचने के लिए नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रो. अशोक सिंह, हिंदी विभाग, कहते हैं –
“क्लास लेना तो दूर, कैंपस में खड़ा होना भी खतरनाक है। बिजली का कनेक्शन काट दिया गया है ताकि करंट लगने का खतरा न हो।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
भागलपुर जिला प्रशासन और NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।
- यूनिवर्सिटी के आसपास 5 नावें लगातार आ-जा रही हैं, ताकि छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सके।
- राहत कैंप में खाना, पानी और मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
- प्रशासन ने चेतावनी दी है कि लोग पानी में जाने की कोशिश न करें, क्योंकि धार तेज है और पानी में सांप व अन्य जलीय जीव देखे गए हैं।
बाढ़ की वजह – वैज्ञानिक नजरिया
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस साल बाढ़ की तीव्रता का कारण जलवायु परिवर्तन और लगातार होने वाली अनियमित बारिश है।
- नेपाल के पहाड़ी इलाकों में अत्यधिक वर्षा ने गंगा, कोसी और भागमती जैसी नदियों में पानी का बहाव बढ़ा दिया।
- बांध और तटबंध भी इतने बड़े जलप्रवाह को संभालने में नाकाम रहे।
- भागलपुर की भौगोलिक स्थिति गंगा के मेन चैनल के पास होने के कारण बाढ़ का खतरा और बढ़ा देती है।
गंगा का बढ़ता जलस्तर – खतरे का निशान पार
10 अगस्त की सुबह भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर दर्ज किया गया।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगर नेपाल में बारिश का क्रम जारी रहा, तो अगले 48 घंटों में जलस्तर और बढ़ सकता है।
आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान
तिलकामांझी यूनिवर्सिटी में इस बाढ़ के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।
- लैब उपकरण, कंप्यूटर और लाइब्रेरी की किताबें बर्बाद हो चुकी हैं।
- कई सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी हैं।
- हॉस्टल में रखी छात्रों की निजी संपत्ति, किताबें और दस्तावेज भी नष्ट हो गए।
स्थानीय लोग कैसे झेल रहे हैं संकट
यूनिवर्सिटी के आसपास के मोहल्ले जैसे बरारी, नाथनगर, और शाहकुंड भी पानी में डूबे हुए हैं।
लोग छतों और ऊंचे मकानों में शरण ले रहे हैं, जबकि नावें ही एकमात्र परिवहन साधन बन गई हैं।
सरकारी योजनाएं और राहत पैकेज
बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए विशेष राहत पैकेज का ऐलान किया है –
- प्रति मृतक के परिवार को ₹4 लाख मुआवजा।
- हॉस्टल में फंसे छात्रों के लिए फ्री फूड पैकेट और पानी।
- खोई हुई पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज की सुविधा।
- बाढ़ के बाद कैंपस की मरम्मत के लिए विशेष फंड।
सोशल मीडिया पर तिलकामांझी यूनिवर्सिटी की वायरल तस्वीरें
बाढ़ में डूबी यूनिवर्सिटी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
- कुछ में छात्र नाव में बैठकर क्लास जाते दिख रहे हैं।
- कुछ वीडियो में बाढ़ का पानी क्लासरूम के अंदर तक भरा हुआ नजर आ रहा है।
- ट्विटर पर #TMBUFlood और #BiharFlood2025 ट्रेंड कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय – भविष्य में बचाव कैसे हो
- तटबंधों की मजबूती – हर साल की मरम्मत के बजाय लंबी अवधि के समाधान की जरूरत।
- जलनिकासी व्यवस्था – कैंपस और शहर में पानी निकलने के लिए हाई-कैपेसिटी पंप।
- जलवायु-रोधी इन्फ्रास्ट्रक्चर – बाढ़-रोधी डिजाइन वाली बिल्डिंग्स।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग – नेपाल और भारत के बीच नदी जल प्रबंधन समझौते को मजबूत करना।
निष्कर्ष
तिलकामांझी यूनिवर्सिटी का यह दृश्य केवल एक शैक्षणिक संस्थान के डूबने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बिहार की बाढ़ समस्या की गहराई को दिखाता है। हर साल यह संकट आता है, और हर साल राहत के इंतजार में कीमती जानें, पढ़ाई और संपत्ति बह जाती हैं।
जब तक बाढ़ प्रबंधन की ठोस और स्थायी रणनीति नहीं बनाई जाएगी, तब तक “यूनिवर्सिटी से नाव तक” का यह सफर खत्म नहीं होगा।















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