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BRS में पारिवारिक कलह: KTR बनाम कविता का शक्ति संघर्ष

BRS में पारिवारिक कलह: KTR बनाम कविता का शक्ति संघर्ष

तेलंगाना विधानसभा चुनाव में हार के डेढ़ साल बाद भारत राष्ट्र समिति (BRS) एक और गहरे संकट में घिरती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर अब एक खुला पारिवारिक संघर्ष देखने को मिल रहा है, जिसमें पार्टी के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी और सांसद के. कविता तथा उनके बेटे के. टी. रामाराव (KTR) के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ गई है।

KTR और कविता में क्यों हुआ टकराव?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BRS अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां सत्ता की बागडोर को लेकर भाई-बहन के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। कविता ने सार्वजनिक मंचों पर KTR के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं और संकेत दिए हैं कि पार्टी के अंदर उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।

कविता के अनुसार, उन्होंने सामाजिक समानता और ओबीसी वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्यभर में एक जनआंदोलन चलाया। लेकिन इस पहल को पार्टी नेतृत्व—खासतौर पर KTR—का समर्थन नहीं मिला। पार्टी सत्ता में रहते हुए कविता ने इस मुद्दे को ज़्यादा तवज्जो नहीं दी थी, लेकिन अब जब KTR का कद लगातार बढ़ रहा है, तो उन्होंने खुद को एक वैकल्पिक नेता के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया है।

BRS में नए समीकरण

सूत्रों के अनुसार, पार्टी में चर्चा है कि KTR को राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि KCR को राष्ट्रीय अध्यक्ष का दर्जा दिया जाएगा। कविता इसे खुद को पार्टी से किनारे करने की साजिश मान रही हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जैसे T. हरीश राव और पूर्व मंत्री वी. श्रीनिवास गौड़ पहले ही KTR के नेतृत्व में काम करने की इच्छा जता चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी में KTR का समर्थन मजबूत है, जबकि कविता को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

कविता के आरोप

हाल ही में एक रैली में कविता को पोस्टर और होर्डिंग्स में जगह नहीं दी गई, जिसे अपमानजनक कदम माना जा रहा है। कविता ने आरोप लगाया कि उन्हें न केवल पार्टी में बल्कि परिवार में भी अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि BRS ने 10 सालों में सिर्फ भौगोलिक तेलंगाना बनाया, लेकिन सामाजिक रूप से न्यायसंगत तेलंगाना अभी दूर है। यह बयान पार्टी की पूर्व नीतियों पर सीधा हमला माना गया।

लोकसभा चुनाव में हार का ठीकरा

KTR का मानना है कि दिल्ली शराब नीति घोटाले में कविता की गिरफ्तारी ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया और इसका असर लोकसभा चुनाव में BRS के प्रदर्शन पर पड़ा। यही कारण है कि उन्होंने पार्टी नेताओं को कविता के आयोजनों से दूरी बनाए रखने को कहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि KTR कविता को पार्टी के भीतर कोई खास भूमिका नहीं देना चाहते।

हालिया टकराव

कविता ने हाल ही में दावा किया कि BRS के कुछ नेता उनकी 2024 लोकसभा चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब वह जेल में थीं, तब BRS को बीजेपी में विलय करने का प्रस्ताव सामने आया था, जिसे उन्होंने सख्ती से खारिज कर दिया था। कविता ने आरोप लगाया कि पार्टी की एक बेटी पर हमले हो रहे हैं और पार्टी इस पर मौन है।

उन्होंने एक गोपनीय पत्र के माध्यम से KTR से सवाल किया कि क्यों वह अपनी रैलियों में बीजेपी पर खुलकर हमला नहीं कर रहे हैं। यह पत्र लीक हो गया, जिससे विवाद और गहरा गया।

क्या कविता बनाएंगी नई पार्टी?

यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या कविता अब नई पार्टी बनाएंगी या कांग्रेस से जुड़ेंगी, जैसा कि आंध्र प्रदेश में शारमिला ने किया। वहां भी एक भाई-बहन—जगन मोहन रेड्डी और वाईएस शारमिला—के बीच राजनीतिक मतभेद के कारण शारमिला ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।

हालांकि कविता ने इस तरह की सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह BRS में ही रहेंगी और अपने पिता KCR के नेतृत्व में काम करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई पार्टी की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि मौजूदा पार्टी को ही ठीक से संभालने की जरूरत है।

निष्कर्ष

भारत राष्ट्र समिति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां पारिवारिक विवाद ने पार्टी की आंतरिक एकता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। KTR और कविता के बीच यह शक्ति संघर्ष केवल नेतृत्व का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पार्टी की दिशा और विचारधारा को लेकर भी एक गहरा मतभेद दर्शाता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि KCR इस पूरे विवाद में क्या रुख अपनाते हैं। क्या वे अपनी बेटी को राजनीतिक रूप से पुनर्स्थापित करने का प्रयास करेंगे या बेटे को पार्टी की कमान सौंप देंगे? आने वाले समय में BRS के भीतर की यह पारिवारिक लड़ाई न केवल पार्टी की राजनीति, बल्कि राज्य की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकती है।

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