देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच गाजियाबाद पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है जो खुद को बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को ठगते थे। ये लोग फर्जी बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों का भरोसा जीतते और फिर उनकी बैंक डिटेल्स लेकर करोड़ों रुपये की ठगी करते थे।
किस तरह करते थे गिरोह के सदस्य ठगी?
गिरोह का तरीका बेहद योजनाबद्ध और पेशेवर था। ये आरोपी बीमा कंपनियों का नाम लेकर लोगों को फोन करते थे और बताते थे कि आपकी पुरानी बीमा पॉलिसी अब मैच्योर हो चुकी है, बस कुछ फॉर्मलिटीज बाकी हैं। इसके बाद ये फर्जी दस्तावेज़ भेजकर लोगों को विश्वास में लेते और फिर उनसे प्रोसेसिंग फीस, पॉलिसी रिन्यूअल, या टैक्स क्लियरेंस के नाम पर कई किस्तों में रकम वसूलते।
जैसे ही पीड़ित व्यक्ति पैसे भेज देता, गिरोह के सदस्य मोबाइल नंबर बंद कर देते या व्हाट्सऐप डीएक्टिवेट कर देते थे। इस तरह पीड़ित को समझ आने में देर लगती कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने इस गिरोह के पास से भारी मात्रा में डिजिटल और भौतिक सामग्री बरामद की है, जो इनके आपराधिक नेटवर्क की गहराई को दर्शाती है:
- 26 मोबाइल फोन: अलग-अलग फर्जी पहचान पर लिए गए नंबरों से लोगों को कॉल करने के लिए
- 6 चेकबुक और 3 पासबुक: अलग-अलग बैंकों में खोले गए फर्जी खातों के दस्तावेज़
- 14 एटीएम कार्ड और 4 सिम कार्ड: पैसों के ट्रांजैक्शन को ट्रैक से बचाने के लिए
- महिंद्रा थार SUV और XUV 300 कार: ठगी से कमाए गए पैसों से खरीदे गए वाहन
- 1 लाख 98 हजार रुपये नकद: गिरोह के ताजा लेन-देन की राशि
4 राज्यों में फैला था गिरोह का नेटवर्क
अपर पुलिस आयुक्त (अपराध एवं कानून-व्यवस्था) श्री आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क देश के चार राज्यों — उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली — में फैला हुआ था। इन राज्यों में गिरोह ने अलग-अलग मोबाइल नंबर और खातों के जरिए अपनी पहचान छिपाकर काम किया।
अब तक की जांच में 9 अलग-अलग घटनाओं का खुलासा हुआ है, जिनमें पीड़ितों से कुल मिलाकर करीब 4.5 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े और भी सदस्यों की तलाश में हैं।
कैसे हुई गिरोह तक पहुंच?
एक पीड़ित की शिकायत पर गाजियाबाद पुलिस ने जब साइबर विश्लेषण शुरू किया तो एक संदिग्ध मोबाइल नंबर के जरिए ठगी की कड़ी जुड़ती चली गई। टेक्निकल सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन ट्रेसिंग और बैंक खातों की KYC जांच के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले एक आरोपी को पकड़ा, जिसने पूछताछ में बाकी साथियों का नाम उजागर किया।
इसके बाद पुलिस ने एक के बाद एक करके सात लोगों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे अब तक सैकड़ों लोगों को ठग चुके हैं, लेकिन अधिकांश मामले रिपोर्ट तक नहीं हुए।
ठगी के लिए बनाते थे फर्जी दस्तावेज़
आरोपी अपने पास एक कंप्यूटर और प्रिंटर रखते थे जिससे वे फर्जी बीमा कंपनियों के लेटरहेड पर डॉक्युमेंट्स तैयार करते थे। इनमें IRDAI, LIC, SBI Life, HDFC Life जैसे प्रतिष्ठित नामों का झूठा प्रयोग किया जाता था। वे पीड़ित को कॉल करके यह विश्वास दिलाते थे कि वे कंपनी से अधिकृत कॉल सेंटर प्रतिनिधि हैं।
इस झूठी विश्वसनीयता के सहारे वे लोगों से 10 से 50 हजार रुपये तक की कई किश्तों में रकम वसूलते थे। सबसे अहम बात यह थी कि वे कभी किसी एक खाते या नंबर से लगातार लेन-देन नहीं करते थे, जिससे पकड़ना मुश्किल हो जाए।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें, जागरूक बनें
श्री आलोक प्रियदर्शी ने मीडिया से बातचीत में आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंक डिटेल, OTP, या बीमा पॉलिसी की जानकारी साझा न करें।
यदि कोई व्यक्ति बीमा पॉलिसी को लेकर कॉल करता है, तो:
- सीधे बीमा कंपनी के अधिकृत नंबर पर कॉल कर पुष्टि करें।
- ईमेल या मैसेज में आए किसी लिंक पर बिना जांचे क्लिक न करें।
- कभी भी अपने आधार, पैन या बैंक अकाउंट की जानकारी फोन पर न दें।
- यदि शक हो तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें।
क्या आगे होगी सख्त कार्रवाई?
पुलिस ने इस पूरे गिरोह के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब साइबर सेल के माध्यम से डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है। साथ ही, आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया है और उनकी संपत्ति की भी जांच की जा रही है।
इसके अतिरिक्त पुलिस ऐसे अन्य मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें इसी गिरोह का हाथ हो सकता है। भविष्य में पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट और आर्थिक अपराधों से संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
निष्कर्ष
गाजियाबाद पुलिस की इस कार्रवाई ने साबित किया है कि साइबर अपराधियों के लिए अब कानून का शिकंजा पहले से ज्यादा मजबूत है। लेकिन इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है — जनता की जागरूकता और सतर्कता। एक छोटी सी सावधानी न केवल आपके लाखों रुपये बचा सकती है, बल्कि अपराधियों को हौसला भी नहीं देती।
















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