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Excise Policy UP: यूपी में महंगी हुई देशी शराब, अब एक बोतल के लिए देने होंगे ज्यादा रुपये

Excise Policy UP

Excise Policy UP: सरकार ने शराब कारोबार को संगठित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से नई आबकारी नीति लागू करने का फैसला किया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में नई आबकारी और निर्यात नीति को मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद राज्य में देशी शराब की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

नई व्यवस्था के तहत 36 प्रतिशत अल्कोहल वाली देशी शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी 165 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 173 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और एक बोतल की कीमत में औसतन करीब 5 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। हालांकि बाकी श्रेणियों की शराब के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं।

सरकार ने विदेशी शराब की खुदरा बिक्री से मिलने वाले राजस्व में भी 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। आबकारी विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा है, जिसमें केवल देशी शराब की बढ़ी कीमतों से करीब 1,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने की उम्मीद है।

Excise Policy UP

खपत के पैटर्न को देखते हुए शहरों में देशी शराब का कोटा घटाया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानों की संख्या और कोटा बढ़ाया जाएगा, ताकि गांवों की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके। साथ ही Gautam Buddha Nagar, Ghaziabad, Agra, Prayagraj, Varanasi और Lucknow जैसे बड़े शहरों में बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक जैसे कम अल्कोहल पेय पदार्थों के लिए बार लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इससे पर्यटन और युवाओं को ध्यान में रखते हुए बाजार को बढ़ावा मिलेगा।

भांग की दुकानों के लाइसेंस शुल्क में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि वाइन और हल्के पेय पर बेहद कम शुल्क रखा गया है, जिससे फल उत्पादकों और किसानों को आर्थिक फायदा मिल सके।

नीति का एक अहम हिस्सा निर्यात को बढ़ावा देना भी है। सरकार चाहती है कि राज्य में बनने वाले एथनॉल और शराब उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए कई शुल्कों में कटौती की गई है और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़े उद्योगों का विस्तार होगा, रोजगार बढ़ेगा और राज्य की आमदनी में इजाफा होगा। हालांकि बढ़ी कीमतों से आम ग्राहकों को थोड़ा अधिक खर्च करना पड़ेगा, लेकिन लंबे समय में यह नीति राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक साबित हो सकती है।

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