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पटना एम्स में डॉक्टरों की हड़ताल: विधायक चेतन आनंद पर बदसलूकी का आरोप, अस्पताल परिसर में बढ़ा तनाव

Doctors' strike in Patna AIIMS: MLA Chetan Anand accused of misbehavior, tension increased in the hospital premises

पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला गंभीर है और सीधे-सीधे एक जनप्रतिनिधि, शिवहर से आरजेडी विधायक चेतन आनंद से जुड़ा है। डॉक्टरों और सुरक्षाकर्मियों ने चेतन आनंद, उनकी पत्नी और उनके निजी सुरक्षा गार्ड्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा जा रहा है कि इलाज के नाम पर एम्स की व्यवस्था को ताक पर रखकर अस्पताल परिसर में न केवल जबरन प्रवेश किया गया, बल्कि डॉक्टरों के साथ धक्का-मुक्की और सुरक्षाकर्मियों से मारपीट तक की गई।

मामला क्या है? — शुरुआत एक VIP मांग से

जानकारी के मुताबिक, विधायक चेतन आनंद अपने एक रिश्तेदार के इलाज को लेकर पटना एम्स पहुंचे थे। उन्होंने डॉक्टरों से मरीज को प्राथमिकता देने की मांग की। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत स्थिर है और नियमानुसार इलाज किया जाएगा। इसी बात को लेकर विधायक और उनके साथियों ने आपा खो दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चेतन आनंद की पत्नी और हथियारबंद गार्ड जबरन इमरजेंसी वार्ड में घुसे। सुरक्षाकर्मियों ने जब रोकने की कोशिश की, तो हाथापाई शुरू हो गई। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि विधायक ने अपशब्द कहे और ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टर के साथ धक्का-मुक्की की गई।

डॉक्टरों का विरोध — काम बंद कर जताया आक्रोश

इस घटना के विरोध में एम्स के डॉक्टरों ने तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी विभागों में कार्य बहिष्कार कर दिया। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने एकजुट होकर अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

JDA के अध्यक्ष डॉ. अनंत प्रकाश ने मीडिया को बताया कि यह न सिर्फ डॉक्टरों की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि पूरे चिकित्सा तंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा, “हम किसी भी हाल में अपने साथियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। विधायक को माफी मांगनी चाहिए और उनके खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए।”

मरीजों पर पड़ा असर — ओपीडी सेवाएं बंद, लंबी कतारें

डॉक्टरों की हड़ताल का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ा। ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, कई ऑपरेशन टाले गए और इमरजेंसी वार्ड में भी सीमित स्टाफ के कारण दबाव बढ़ गया। अस्पताल के बाहर मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें देखी गईं।

बक्सर से आए एक मरीज के परिजन ने कहा, “हम सुबह 4 बजे आए थे, लेकिन अब डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। अंदर कोई सुनवाई नहीं हो रही। हम गरीब लोग कहां जाएं?”

विधायक की सफाई — “तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया”

इस पूरे मामले में विधायक चेतन आनंद ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “मैं सिर्फ अपने बीमार रिश्तेदार को दिखाने एम्स गया था। डॉक्टरों से विनम्रता से अनुरोध किया, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर माहौल खराब किया।”

चेतन आनंद ने दावा किया कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनकी छवि को खराब करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि अगर कोई वीडियो या सबूत है, तो सामने लाया जाए।

CCTV फुटेज की मांग — कौन सच बोल रहा है?

इस बीच JDA और कई सीनियर डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि घटनास्थल के CCTV फुटेज को सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि कौन सही है और कौन गलत। डॉक्टरों का कहना है कि पूरी घटना इमरजेंसी वार्ड और OPD के बीच के रास्ते में हुई, जहां CCTV कैमरे लगे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल — डॉक्टर असुरक्षित क्यों?

यह घटना एक बार फिर से अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है। AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में यदि हथियारबंद गार्ड जबरन प्रवेश कर सकते हैं और डॉक्टरों को धमका सकते हैं, तो छोटे शहरों के अस्पतालों की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।

JDA ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर क्यों VVIP कल्चर के चलते डॉक्टरों को दबाव में काम करना पड़ता है? क्यों बार-बार डॉक्टरों को निशाना बनाया जाता है?

प्रशासन की चुप्पी — राजनीतिक दबाव में AIIMS?

घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद न तो एम्स प्रशासन की तरफ से कोई ठोस बयान आया है, और न ही राज्य सरकार की तरफ से। डॉक्टरों के बीच यह असंतोष है कि कहीं विधायक के राजनीतिक प्रभाव के चलते मामले को दबाने की कोशिश न हो।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक इस्तीफा देने पर विचार करेंगे।

सोशल मीडिया पर बवाल — “VIP संस्कृति बनाम आम मरीज”

यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया है। #PatnaAIIMS और #ChetanAnand ट्रेंड कर रहे हैं। आम जनता डॉक्टरों के समर्थन में सामने आई है और VIP कल्चर की आलोचना हो रही है।

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “अगर डॉक्टरों को ही धमकाया जाएगा, तो जनता का इलाज कौन करेगा?”

बिहार में डॉक्टरों पर हमले — एक चिंताजनक पैटर्न

यह कोई पहली घटना नहीं है जब बिहार में डॉक्टरों को धमकाया गया हो या हमला हुआ हो। इससे पहले भी गया, भागलपुर और मधुबनी जैसे जिलों में मरीज की मौत के बाद परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। अब जब विधायक पर ही आरोप लगे हैं, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

निष्कर्ष — क्या व्यवस्था टूट रही है?

पटना एम्स की यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़ा करती, बल्कि पूरे राज्य के प्रशासन, कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को कठघरे में लाती है। डॉक्टरों की सुरक्षा, मरीजों की सेवा और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार — इन तीनों में संतुलन न हो, तो स्वास्थ्य तंत्र चरमरा जाता है।

अब देखना यह होगा कि क्या पटना एम्स प्रशासन और बिहार सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कर डॉक्टरों को न्याय दिला पाएगी या एक बार फिर VIP संस्कृति के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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