Delhi Pollution Crisis: राजधानी दिल्ली में गिरते तापमान और प्रतिकूल मौसम हालात ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। सोमवार सुबह भी वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रही। दिन की शुरुआत घने कोहरे और धुंध से हुई, जिससे कई क्षेत्रों में दृश्यता बेहद कम हो गई। प्रदूषण के चलते दमा और सांस संबंधी रोगियों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा, वहीं आम लोगों को आंखों में जलन जैसी शिकायतें हुईं। सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग मास्क पहने नजर आए।
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, सोमवार सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 418 दर्ज किया गया, जो सीधे तौर पर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, अलीपुर में 395, आनंद विहार में 462, अशोक विहार में 473, आया नगर में 340, बवाना में 448, बुराड़ी में 460 और चांदनी चौक में 454 AQI दर्ज किया गया।
इसके अलावा डीटीयू क्षेत्र में 467, द्वारका सेक्टर-8 में 427, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 पर 340, आईटीओ में 431, लोधी रोड पर 382, मुंडका में 467, नजफगढ़ में 346, नरेला में 437, पंजाबी बाग में 434, आरकेपुरम में 439, रोहिणी में 471, सोनिया विहार में 469, विवेक विहार में 472 और वजीरपुर में 472 AQI रिकॉर्ड किया गया।
इसी बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने शनिवार देर रात दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)-4 लागू कर दिया है। इसके साथ ही अब राजधानी में ग्रेप के सभी चरण प्रभावी हो गए हैं। प्रदूषण पर काबू पाने के लिए 5-सूत्रीय कार्ययोजना को सख्ती से लागू किया जाएगा।
दिल्ली की हवा क्यों हो रही है और खराब?
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बनी गंभीर वायु गुणवत्ता के पीछे सबसे बड़ा कारण मौसम की स्थिति है। तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक हवा में ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। पश्चिमी विक्षोभ के चलते ठंडी हवा नीचे फंसी हुई है, जिसमें वाहनों का धुआं और निर्माण कार्य से उठने वाली धूल जमा हो रही है। प्रदूषकों को फैलने या ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिल पा रहा, इसलिए वे जमीन के पास ही अटके हुए हैं।
इसके अलावा, बारिश न होना और हवा की रफ्तार धीमी रहना भी स्थिति को और बिगाड़ रहा है, जिससे प्रदूषण लंबे समय तक वातावरण में बना रहता है।













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