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Delhi Governance Crisis: दिल्ली में बढ़ती परेशानियों के बीच फिर याद आए केजरीवाल, आप ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

Delhi Governance Crisis

Delhi Governance Crisis: राजधानी की राजनीति में बीते एक साल के भीतर हालात किस तरह बदल गए हैं, यह अब आम लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी में साफ झलकने लगा है। आम आदमी पार्टी ने मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि दिल्ली की जनता अब पिछला दौर याद करने लगी है, जब बुनियादी सुविधाओं में सुधार दिखाई देता था।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि जमीन पर हालात किसी से छिपे नहीं हैं। उनके मुताबिक, लोग अब खुलकर कह रहे हैं कि उन्हें अरविंद केजरीवाल का कार्यकाल याद आ रहा है, जब सरकारी सेवाओं को लेकर भरोसा महसूस होता था।

आप का कहना है कि 2025 से पहले की दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले थे। मोहल्ला क्लीनिक जरूरतमंदों के लिए राहत बने हुए थे। सरकारी स्कूलों के परिणाम और सुविधाएं चर्चा का विषय बनते थे। कम बिजली बिल और बेहतर जल आपूर्ति ने आम लोगों को सीधे फायदा पहुंचाया था।

Delhi Governance Crisis

हालांकि मौजूदा समय में तस्वीर अलग नजर आ रही है। कई इलाकों से शिकायत मिल रही है कि मोहल्ला क्लीनिक या तो बंद हैं या पहले की तरह सक्रिय नहीं। सरकारी अस्पतालों में लंबी कतारें लग रही हैं। स्कूलों में पहले जैसा जोश और सुधार दिखाई नहीं देता। ट्रैफिक जाम अब आम समस्या बन चुका है, जबकि प्रदूषण का स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की अनियमित सप्लाई और सफाई व्यवस्था की ढिलाई ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे में रोजमर्रा की दिक्कतों का असर सीधे जनता की नाराजगी में दिख रहा है।

पार्टी नेताओं का तर्क है कि पहले के शासनकाल में काम की राजनीति पर जोर था। स्कूलों का कायाकल्प हुआ, क्लीनिक शुरू हुए और मूलभूत सेवाओं में राहत मिली। इसी वजह से आज जब सुविधाओं में गिरावट महसूस हो रही है, तो लोग उस समय से तुलना करने लगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनता भावनाओं से ज्यादा अपने अनुभव के आधार पर फैसला करती है। अगर घर में पानी न आए, अस्पताल में डॉक्टर न मिले या सड़कों पर घंटों फंसना पड़े, तो असंतोष स्वाभाविक है। यही असंतोष अब चर्चा और बहस का विषय बनता जा रहा है।

कुल मिलाकर, राजधानी में एक साल की सरकार के बाद लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हुई हैं या नहीं। इसी तुलना ने पुराने मॉडल की यादों को फिर ताजा कर दिया है। अब देखना यह है कि दिल्ली फिर से विकास के उसी रास्ते पर लौटेगी या मौजूदा हालात ही नई पहचान बनेंगे।

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