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Crisis Of Familialism In BSP: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पदों से हटाया, डैमेज कंट्रोल की कोशिश

mayawati vs akash anand

बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया है और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। आकाश आनंद की जगह अब उनके पिता आनंद कुमार और रामजी गौतम नेशनल कोऑर्डिनेटर का पद संभालेंगे। मायावती ने एक तरफ आकाश आनंद को पार्टी में हाशिए पर डाला, तो दूसरी तरफ अपने भाई आनंद कुमार पर भरोसा जताया है। हालांकि, रामजी गौतम भी अब नेशनल कोऑर्डिनेटर की भूमिका संभालेंगे।

मायावती ने इस फैसले के बारे में कहा, “मैंने खुद यह फैसला लिया है कि मेरे जीते जी मेरी आखिरी सांस तक पार्टी में कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। मेरे लिए पार्टी और आंदोलन सबसे पहले हैं। भाई-बहन और उनके बच्चे तथा अन्य रिश्ते सभी बाद में आते हैं।”

फैसले की समीक्षा:

मायावती के इस फैसले को दो तरह से देखा जा रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर और उत्तराधिकारी बनाया गया था, लेकिन कुछ ही महीनों में मायावती ने अपने ही फैसले को पलट दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के घटते जनाधार और वोटबैंक को ध्यान में रखकर लिया गया है।

वोटबैंक के लिए फैसला?

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार का कहना है कि मायावती ने पार्टी के घटते जनाधार के लिए आकाश आनंद को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि उनका राजनीति से कोई गहरा नाता नहीं है। आकाश आनंद की पत्नी डॉक्टर प्रज्ञा, जो एक डॉक्टर हैं, पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होती हैं। मायावती का यह फैसला दर्शाता है कि वह पार्टी और परिवार दोनों की लगाम अपने हाथ में रखना चाहती हैं।

पारिवारिक तनाव का असर:

आकाश आनंद और डॉक्टर प्रज्ञा की शादी को अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ और डॉक्टर प्रज्ञा के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। कुछ दिनों पहले ही मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर दिया था। मायावती ने कहा था कि अशोक सिद्धार्थ दक्षिण भारत में पार्टी का विस्तार करने की बजाय चुनावी राज्यों में अधिक सक्रिय थे, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ।

ईशान आनंद अलग-थलग:

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अशोक सिद्धार्थ की वजह से छोटे भतीजे ईशान आनंद अलग-थलग पड़ गए थे। इसके अलावा, पार्टी में ससुर-दामाद का गठजोड़ न दिखे, इसके लिए भी यह कार्रवाई की गई। अशोक सिद्धार्थ, जो कभी मायावती के भरोसेमंद थे, पहले पार्टी से बाहर किए गए और अब आकाश आनंद को भी हाशिए पर डाल दिया गया है।

आकाश आनंद का उभरता नेतृत्व:

राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार के अनुसार, आकाश आनंद एक पढ़ा-लिखा और ऊर्जावान युवा नेता के रूप में बसपा में उभर रहा था। लोकसभा चुनाव में उनके तेवर सबने देखे थे। हालांकि, मायावती के “यसमैन” वाले ढांचे में वह फिट नहीं बैठ रहा था। मायावती को आनंद कुमार और रामजी गौतम जैसे नेता चाहिए, जो बिना सवाल किए उनके फैसलों को पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाएं।

चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया:

दलित राजनीति के धुरंधर और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस फैसले को मायावती के परिवारवाद से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा, “यह बहनजी का अपना निर्णय है। वे पार्टी की मालिक हैं और उनके फैसलों का समाज पर भी असर होता है। पिछले एक साल में उनके फैसलों ने बाबा साहेब आंबेडकर के सिद्धांत को ठुकरा दिया है। रानी के पेट से राजा जन्म नहीं लेगा, यह सिद्धांत समाज ने अस्वीकार कर दिया है।”

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