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Chamoli News: चमोली हादसे की दर्दभरी कहानी, मौत को सामने देख कांप गए मजदूर

chamoli hadsa

हादसे के बाद मातम

उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव में एक भयावह हादसा हुआ, जब बीआरओ कैंप पर ग्लेशियर टूटने से चार मजदूरों की मौत हो गई। राहत और बचाव कार्य जारी है, जबकि चार मजदूर अब भी लापता हैं।

बर्फीले तूफान में 24 घंटे तक संघर्ष

हादसे के वक्त मजदूरों ने भयानक हालातों का सामना किया। नंगे पैर बर्फ में फंसकर कांपते हुए उन्होंने मौत को सामने देखा। 24 घंटे तक बिना भोजन के रहकर उन्होंने जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

  • सेना की टीमों ने 55 में से 50 मजदूरों को बचाया।
  • 4 मजदूर अभी भी लापता, खोजबीन जारी।
  • लापता श्रमिक: हिमाचल प्रदेश के हरमेश चंद, उत्तर प्रदेश के अशोक, और उत्तराखंड के अनिल कुमार व अरविंद सिंह।

प्रत्यक्षदर्शियों की खौफनाक दास्तां

“हाथ-पैर कांप गए थे”

मनोज भंडारी ने बताया कि वह बीआरओ कैंपसाइट पर आराम कर रहे थे, जब अचानक बर्फीला तूफान आया।

  • तूफान में कंटेनर सैकड़ों मीटर तक लुढ़क गया।
  • कंटेनर के टुकड़े-टुकड़े हो गए, फोन और सामान बह गया।
  • घायल हालत में नंगे पैर आर्मी गेस्ट हाउस तक पहुंचे, जहां ठंड से पैर सुन्न हो गए।

“हर तरफ अंधेरा छा गया था”

नरेश सिंह और दीक्षित सिंह बिष्ट ने भी इस हादसे का दर्द झेला।

  • हादसे के दौरान अंधेरे में घंटों फंसे रहे।
  • उनके परिवार ने हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर राहत की सांस ली।

“अब सब खत्म हो गया”

गोपाल जोशी ने कहा कि जैसे ही उन्होंने बर्फ के तूफान की गड़गड़ाहट सुनी, वे भागने लगे।

  • भारी बर्फबारी के कारण तेजी से दौड़ना मुश्किल था।
  • दो घंटे बाद रेस्क्यू टीम ने बचाया।

“मौत को सामने खड़ा देखा”

विपन कुमार ने कहा,

  • “मैं कुछ समझ पाता, इससे पहले चारों ओर अंधेरा छा गया।”
  • “मुझे लगा कि यह मेरी आखिरी घड़ी है।”
  • कई मजदूरों को गंभीर चोटें आईं, जबकि 4 की मौत हो गई।

यह हादसा एक डरावनी त्रासदी थी, जहां मजदूरों ने मौत को बेहद करीब से देखा। सेना का बचाव अभियान जारी है, और लापता मजदूरों को खोजने का प्रयास किया जा रहा है।

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