कैग रिपोर्ट पेश, आप सरकार पर बढ़ा दबाव
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पेश की, जिसमें आबकारी नीति और राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस रिपोर्ट के बाद पूर्व की आप सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
शराब नीति के साथ अन्य मामलों की भी होगी जांच?
पूर्व कैग महानिदेशक शेष कुमार के अनुसार, रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर मौजूदा सरकार जांच करा सकती है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों के कारण हुए अन्य नुकसान की भी समीक्षा होनी चाहिए, जिससे सटीक निष्कर्ष निकाला जा सके और कानूनी कार्रवाई संभव हो।

2,026.91 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का खुलासा
कैग की 165 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया कि 2021-22 की आबकारी नीति से सरकार को 2,026.91 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में कमजोर नीति ढांचे और इसके अपर्याप्त कार्यान्वयन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी उठे सवाल
कैग रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिकों की स्थिति पर भी चिंता जताई गई।
- 21 मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय नहीं
- 15 में बिजली बैकअप की सुविधा नहीं
- 6 में जांच के लिए टेबल उपलब्ध नहीं
- 12 में विकलांगों के लिए कोई विशेष सुविधा नहीं
आयुष औषधालयों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। 49 निरीक्षित औषधालयों में से:
- 17 में बिजली बैकअप नहीं
- 7 में शौचालय की सुविधा नहीं
- 14 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
कैग रिपोर्ट पेश होने से पहले ही भाजपा ने पूर्व की दिल्ली सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। भाजपा का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर कैग रिपोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल कर एक नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है।














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