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यूपी STF के जांबाज अधिकारियों को मिला वीरता पदक — बड़े एनकाउंटर के लिए मिला राष्ट्रपति सम्मान

Brave officers of UP STF got gallantry medals - President's award for big encounters

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का नाम देशभर में अपराधियों के बीच खौफ और जनता के बीच भरोसे का प्रतीक बन चुका है। बुधवार को इस प्रतिष्ठा में एक और सुनहरा पन्ना जुड़ गया, जब STF के कई जांबाज अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति द्वारा वीरता पदक (गैलंट्री मेडल) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी अदम्य साहस और जुझारूपन की पहचान है, बल्कि उन कठिन और जानलेवा परिस्थितियों की भी गवाही है, जिनमें इन अधिकारियों ने अपनी जान दांव पर लगाकर कुख्यात अपराधियों को ढेर किया।

समारोह दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में हुआ, जहां देशभर से चुने गए वीरता पदक विजेताओं के बीच यूपी STF के अधिकारी भी गर्व से सिर ऊंचा किए खड़े थे। मंच पर जब उनका नाम पुकारा गया और राष्ट्रपति ने मेडल पहनाया, तो पूरे हॉल में तालियों की गूंज उठी। उस पल न केवल वे अधिकारी, बल्कि उनके साथ खड़े वरिष्ठ अफसर, उनके परिवार और पूरा उत्तर प्रदेश गर्व से भर उठा।

इस सम्मान के पीछे सिर्फ एक-दो दिन की बहादुरी नहीं, बल्कि सालों का कठिन प्रशिक्षण, अनगिनत खतरनाक मिशन और जोखिम भरे एनकाउंटर की लंबी कहानी है। जिन मुठभेड़ों के लिए इन जांबाजों को सम्मानित किया गया, वे किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं थे। कई मौकों पर ये अधिकारी अपराधियों की गोलियों के बीच घिर गए थे, कई बार अंधेरी रातों में जंगलों और नदी किनारे पीछा करना पड़ा, और कई बार भीड़-भाड़ वाले इलाकों में ऐसी सटीक कार्रवाई करनी पड़ी जिसमें आम नागरिक की जान को ज़रा भी खतरा न हो।

एक अधिकारी को यह मेडल उस ऐतिहासिक ऑपरेशन के लिए मिला, जिसमें STF ने पश्चिमी यूपी में आतंक का दूसरा नाम बन चुके एक 50,000 रुपये इनामी बदमाश को मार गिराया था। यह बदमाश पिछले पांच सालों में दर्जनों हत्याएं और लूट की वारदात कर चुका था। उसके पास एके-47 से लेकर हैंड ग्रेनेड तक का जखीरा था। ऑपरेशन की रात पुलिस को खुफिया सूचना मिली कि वह अपने गिरोह के साथ एक सुनसान फार्महाउस में छिपा है। STF की टीम ने रातभर इलाके को घेर लिया और सुबह पांच बजे जैसे ही उसने बाहर निकलने की कोशिश की, गोलीबारी शुरू हो गई। मुठभेड़ करीब 45 मिनट चली और आखिरकार वह अपराधी ढेर हो गया। टीम के दो जवान उस समय घायल भी हुए, लेकिन मिशन पूरा हुआ।

दूसरे अधिकारी को पूर्वी उत्तर प्रदेश के उस बहुचर्चित एनकाउंटर के लिए सम्मान मिला, जिसमें STF ने एक अंतर्राज्यीय हथियार तस्कर गिरोह का सफाया किया था। यह गिरोह बिहार, झारखंड और यूपी में अवैध हथियार सप्लाई करता था और कई बड़े गैंगवार का हिस्सा था। इस ऑपरेशन में STF ने न केवल गिरोह के चार मुख्य सदस्यों को मार गिराया, बल्कि उनके ठिकाने से 60 से ज्यादा हथियार और हजारों जिंदा कारतूस बरामद किए। कार्रवाई इतनी तगड़ी और खतरनाक थी कि टीम को इलाके में बम डिस्पोज़ल स्क्वॉड के साथ उतरना पड़ा, क्योंकि गिरोह ने अपने ठिकाने के आसपास बम और बारूदी सुरंगें लगा रखी थीं।

इनके अलावा भी कई ऐसे एनकाउंटर हैं, जिनके लिए अधिकारियों को गैलंट्री मेडल मिला। कहीं उन्होंने अपहरण करके फिरौती मांगने वाले गिरोह को खत्म किया, तो कहीं महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले दरिंदों को पकड़ा या मार गिराया। कई बार उन्हें ग्रामीण इलाकों में खेतों और तालाबों के बीच घंटों छिपकर इंतज़ार करना पड़ा, और कई बार शहर के भीड़भरे मोहल्लों में सेकंड के हिस्से में फैसला लेकर कार्रवाई करनी पड़ी। हर ऑपरेशन में खतरा बराबर था—गलत निशाना लगा तो न सिर्फ अपराधी भाग सकता था, बल्कि कोई निर्दोष भी घायल हो सकता था।

STF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन मेडल पाने वाले सभी अधिकारी सिर्फ बहादुर ही नहीं, बल्कि बेहद अनुशासित और प्रोफेशनल भी हैं। उनकी खासियत यह है कि वे अपराधी की ताकत और चाल दोनों को समझकर रणनीति बनाते हैं। कई बार ऑपरेशन महीनों की प्लानिंग के बाद होता है, और उसमें कई खुफिया एजेंसियां शामिल रहती हैं। लेकिन आखिरी पल में वही अधिकारी आगे होते हैं, जिन्हें अब गैलंट्री मेडल से नवाजा गया है।

परिवार वालों के लिए यह सम्मान जितना गर्व का पल है, उतना ही भावुक कर देने वाला भी। कई अधिकारियों की पत्नियां और बच्चे समारोह में मौजूद थे। एक अधिकारी की पत्नी ने आंखों में आंसू लिए कहा कि “हर बार जब वे ऑपरेशन पर जाते हैं, तो हम डर में होते हैं कि न जाने कब क्या खबर आए। लेकिन आज जब यह मेडल उनके सीने पर लगा, तो लगा कि उनका हर जोखिम, हर कठिन रात, हर घायल होने का दर्द अब सम्मान में बदल गया है।”

उत्तर प्रदेश STF की स्थापना ही इस मकसद से हुई थी कि राज्य में संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और आतंकवादी गतिविधियों को खत्म किया जाए। पिछले कुछ सालों में STF ने न केवल बड़े-बड़े गैंग का सफाया किया, बल्कि साइबर क्राइम, नशा तस्करी और हथियार तस्करी जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। लेकिन इन कामयाबियों के पीछे जिनकी मेहनत और जान का खतरा छिपा है, वही असली हीरो हैं — और आज उन्हीं को राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान मिला।

समारोह में मौजूद केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने STF की तारीफ करते हुए कहा कि यूपी STF ने देशभर में एक मिसाल कायम की है कि कैसे प्रोफेशनल ट्रेनिंग, सटीक खुफिया जानकारी और साहसिक कार्रवाई मिलकर अपराध पर लगाम लगा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान बाकी पुलिस बलों के लिए भी प्रेरणा है कि वे भी ऐसे काम करें, जिससे जनता का पुलिस पर भरोसा और मजबूत हो।

लखनऊ लौटने पर इन अधिकारियों का स्वागत भी किसी हीरो की तरह हुआ। एयरपोर्ट पर पुलिस बैंड बजा, फूलों की माला पहनाई गई और पुलिस कर्मियों ने “जय हिंद” के नारे लगाए। उनके साथी और अधीनस्थ अधिकारी गर्व से भरे थे कि उनके यूनिट का नाम आज पूरे देश में गूंज रहा है।

इन वीरता पदक विजेताओं की कहानियां बताती हैं कि अपराध से लड़ना सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है। इसमें सफलता तब ही मिलती है जब आप अपने डर को हराकर आगे बढ़ते हैं, जब गोली चलने के बीच भी आपका ध्यान अपने लक्ष्य पर होता है, और जब आपकी प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ कानून और जनता की सुरक्षा होती है। यही वजह है कि आज यूपी STF के ये जांबाज न सिर्फ अपने राज्य, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

राष्ट्रपति द्वारा दिया गया यह गैलंट्री मेडल उनके साहस का आधिकारिक प्रमाण है, लेकिन असल में उनका असली इनाम जनता का वह भरोसा है, जो उन्होंने अपनी हर कार्रवाई से जीता है। और शायद यही वजह है कि जब वे फिर से किसी ऑपरेशन के लिए निकलेंगे, तो उनके सीने पर टंगा यह मेडल न केवल उन्हें गर्व देगा, बल्कि उन्हें याद दिलाएगा कि उनके कंधों पर कितना बड़ा जिम्मा है।

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